सोने की कीमतों में अस्थिरता और STT पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान: राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषण
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को सोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण बताया है। सोमवार को घरेलू बाजार (MCX) में सोना करीब ₹1,47,475 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जो अपने रिकॉर्ड स्तर ₹1,70,480 (29 जनवरी 2026) से 13% से अधिक की गिरावट दर्शाता है। वित्त मंत्री ने 'पीटीआई' को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर किसी एक मुद्रा पर भरोसा न होना निवेशकों को सोने की ओर धकेल रहा है। साथ ही, उन्होंने बजट 2026 में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि को 'सट्टेबाजी रोकने' के लिए एक जरूरी कदम बताया।
राजनीतिक और कानूनी पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद में वित्त विधेयक (Finance Bill) 2026 पर चर्चा जारी है। कानूनी तौर पर, सरकार ने सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स एक्ट, 2004 के प्रावधानों के तहत डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर कर की दरों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है।
राजनीतिक गलियारों में, विपक्ष ने सोने की कीमतों में गिरावट को 'मध्यम वर्ग की संपत्ति के क्षरण' के रूप में पेश किया है, जबकि सत्ता पक्ष इसे आयात शुल्क (Import Duty) समायोजन और वैश्विक बाजार के सुधार के रूप में देख रहा है। सरकार का तर्क है कि लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स (श्रम-प्रधान क्षेत्र) पर ध्यान केंद्रित करना और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) बनाए रखना 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए अनिवार्य है।
प्रमुख बयान: जो वित्त मंत्री ने कहा
- सोने की अस्थिरता पर: "दुनियाभर में बनी अनिश्चितता के कारण हालात साफ नहीं हैं। निवेशक किसी एक करेंसी को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं, इसलिए वे सोने की ओर भागते हैं। कीमतों में अस्थिरता वैश्विक डर का प्रतिबिंब है।"
- STT में वृद्धि पर: "फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से 0.15% करने का उद्देश्य सट्टेबाजी (Speculation) को हतोत्साहित करना है। हम नहीं चाहते कि छोटे निवेशक बिना सोचे-समझे डेरिवेटिव बाजार में अपनी पूंजी गंवाएं।"
- निवेश और रोजगार: "हमारी प्राथमिकता निवेश को बढ़ावा देना है। बजट में लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि समावेशी विकास और रोजगार सृजन सुनिश्चित हो सके।"
प्रभाव और प्रतिक्रिया
आर्थिक प्रभाव:
- निवेशकों में हलचल: रिकॉर्ड स्तर से ₹23,000 की गिरावट ने उन निवेशकों को चिंतित किया है जिन्होंने ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी। हालांकि, ज्वैलरी इंडस्ट्री के लिए यह मांग बढ़ाने वाला कारक हो सकता है।
- डेरिवेटिव बाजार: STT बढ़ने से ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमी आने की संभावना है, जिससे शेयर बाजार में अत्यधिक अस्थिरता पर लगाम लग सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:
- पक्ष: सरकार का मानना है कि स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स और मौद्रिक स्थिरता से भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों को झेलने में सक्षम होगी।
- विपक्ष: विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि STT बढ़ाने से पहले खुदरा निवेशकों (Retail Investors) के हितों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए और रोजगार के दावों पर श्वेत पत्र जारी होना चाहिए।
Our Final Thoughts (हमारा निष्कर्ष)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का हालिया रुख यह स्पष्ट करता है कि सरकार अब 'लो-रिस्क, हाई-ग्रोथ' इकोनॉमी की ओर कदम बढ़ा रही है। सोने की कीमतों में 13% की भारी गिरावट केवल एक बाजार सुधार नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक जियो-पॉलिटिकल परिदृश्य का संकेत है। सरकार ने STT बढ़ाकर यह संकेत दिया है कि वह शेयर बाजार को 'कैसीनो' बनने से रोकना चाहती है, जो कि दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए सकारात्मक हो सकता है।
हालांकि, सोने की कीमतों में यह गिरावट आम भारतीय परिवारों के लिए दोहरी तलवार की तरह है—जहाँ एक तरफ नई खरीदारी सस्ती होगी, वहीं दूसरी तरफ घरेलू गोल्ड लोन और बचत की वैल्यू कम हुई है। बजट 2026 के माध्यम से लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स पर फोकस करना सही दिशा में कदम है, बशर्ते इसका क्रियान्वयन धरातल पर पारदर्शी तरीके से हो। अंततः, 'विकसित भारत' का रास्ता वैश्विक बाजार की अस्थिरता को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने और घरेलू उपभोग (Private Consumption) को मजबूत बनाए रखने से होकर गुजरता है।
