नई दिल्ली : केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मोदी सरकार ने वेतन आयोग के गठन के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर इसकी प्रक्रिया को गति देना शुरू कर दिया है। ताजा अपडेट के अनुसार, आयोग के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति की गई है, जो इस बात का संकेत है कि आयोग अब 'एक्शन मोड' में आ चुका है।
प्रशासनिक हलचल तेज: डायरेक्टर पद पर आशीष यादव की नियुक्ति
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के अंतर्गत डायरेक्टर के पद को भरने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए आशिष यादव को नियुक्त किया गया है।
यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति (Deputation) के आधार पर की गई है। आशीष यादव की भूमिका आयोग की प्रशासनिक और नीतिगत तैयारियों को अंतिम रूप देने में बेहद अहम होगी। उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यभार संभालने और निर्धारित समय-सीमा के भीतर ज्वाइनिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?
सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी। आयोग को केंद्र सरकार के कर्मचारियों की वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन से जुड़ी मांगों का विश्लेषण करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
उम्मीद जताई जा रही है कि आयोग अपनी रिपोर्ट 2026 के मध्य तक सौंप देगा। यदि सब कुछ तय समय के अनुसार रहा, तो 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी रूप से लागू की जा सकती हैं।
बजट और भविष्य की गणना
हाल ही में व्यय सचिव वी. वुअलनाम ने स्पष्ट किया था कि आयोग वर्तमान में अपने शुरुआती चरण में है। उन्होंने बताया कि इस बार के बजट में 8वें वेतन आयोग के लिए अलग से कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है, क्योंकि अभी तक इसके वित्तीय प्रभाव की गणना नहीं की गई है। आयोग के सदस्य जैसे-जैसे अपना काम आगे बढ़ाएंगे, भविष्य में इसके लिए बजटीय आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।
TheTrendingPeople.com की राय
आशीष यादव की नियुक्ति यह दर्शाती है कि सरकार अब कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर वेतन आयोग की संरचना को मजबूत कर रही है। हालांकि, कर्मचारियों की उम्मीदें बहुत अधिक हैं—चाहे वह फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी हो या न्यूनतम वेतन में संशोधन। 18 महीने की अवधि लंबी लग सकती है, लेकिन एक व्यवस्थित ढांचे का निर्माण यह सुनिश्चित करेगा कि जब सिफारिशें आएं, तो उनका कार्यान्वयन बिना किसी देरी के हो सके।
