साइबर ठगों की अब खैर नहीं! आपके हाथ में होगा 'किल स्विच'—एक बटन दबाते ही फ्रीज हो जाएंगे सारे खाते, डिजिटल अरेस्ट का होगा 'द एंड'
नई दिल्ली, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — डिजिटल इंडिया की रफ्तार जितनी तेज हुई है, साइबर अपराधियों की चालें भी उतनी ही शातिर हो गई हैं। 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) जैसे नए और डरावने फ्रॉड ने आम आदमी की गाढ़ी कमाई को खतरे में डाल दिया है। लेकिन अब केंद्र सरकार इस डिजिटल डकैती पर लगाम कसने के लिए एक ऐसा ब्रह्मास्त्र लाने की तैयारी में है, जो ठगों के मंसूबों पर पानी फेर देगा।
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही आपके यूपीआई (UPI) और बैंकिंग ऐप्स में एक खास ‘फ्रीज’ (Freeze) या ‘किल स्विच’ (Kill Switch) बटन देखने को मिल सकता है। यह एक ऐसा इमरजेंसी बटन होगा जिसकी मदद से यूजर सिर्फ एक टैप में अपने सभी बैंक और यूपीआई अकाउंट्स को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर सकेगा। इसका सीधा मतलब है कि फ्रॉड की रत्ती भर भी आशंका होते ही किसी भी तरह का पेमेंट ट्रांसफर तुरंत रोका जा सकेगा।
क्या है 'फ्रीज' या 'किल स्विच' बटन? (The Panic Button)
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए इस क्रांतिकारी फीचर को यूपीआई प्लेटफॉर्म्स (जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm) और सभी बैंकिंग ऐप्स में अनिवार्य रूप से जोड़ने पर विचार कर रहा है।
- कार्यप्रणाली: जैसे ही आपको लगेगा कि कोई आपको ठगने की कोशिश कर रहा है या आपका फोन हैक हो गया है, आप इस 'किल स्विच' को दबा देंगे।
- असर: बटन दबाते ही यूजर के आधार या मोबाइल नंबर से लिंक सभी बैंक खातों और यूपीआई आईडी से जुड़े लेन-देन (Debit Transactions) एक साथ फ्रीज हो जाएंगे। पैसा खाते में ही लॉक हो जाएगा और ठग उसे निकाल नहीं पाएगा।
- सुरक्षा: यह सुविधा एटीएम कार्ड ब्लॉक करने जैसी है, लेकिन यह बहुत व्यापक और तेज होगी क्योंकि यह एक साथ सभी वित्तीय रास्तों को बंद कर देगी।
बैंक और परिवार को अलर्ट: डबल लेयर सुरक्षा
इस प्रस्तावित सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि फ्रीज बटन सिर्फ पेमेंट रोकने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक सुरक्षा चक्र भी सक्रिय करेगा।
- बैंक अलर्ट: बटन दबाते ही संबंधित बैंकों के सर्वर को तुरंत 'फ्रॉड अलर्ट' मिल जाएगा, जिससे वे बैकएंड से भी खाते की निगरानी शुरू कर देंगे।
- SOS: इसके साथ ही यूजर के परिवार या इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स (जैसे पुलिस) को भी लोकेशन के साथ अलर्ट भेजने का विकल्प मिलेगा। इससे 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी स्थिति में, जहां पीड़ित को अलग-थलग कर दिया जाता है, मदद पहुंचना आसान होगा।
क्या होता है 'डिजिटल अरेस्ट'? (Modus Operandi)
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में स्कैमर खुद को पुलिस, सीबीआई, कस्टम, इनकम टैक्स या किसी अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं।
- डर का खेल: वे पीड़ित को डराते हैं कि उनके आधार या पार्सल में ड्रग्स या अवैध सामान मिला है। फिर 'डिजिटल गिरफ्तारी' का नाटक कर उन्हें घंटों तक वीडियो कॉल पर नजरबंद रखते हैं और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लेते हैं। 'किल स्विच' ऐसे समय में पीड़ित के लिए हथियार का काम करेगा।
इंश्योरेंस फ्रॉड और RBI का 'प्रोटेक्शन फंड'
सरकार की नजर केवल बैंकिंग फ्रॉड पर नहीं, बल्कि इंश्योरेंस सेक्टर पर भी है। फर्जी तरीके से इंश्योरेंस क्लेम जारी करने वाले सिंडिकेट्स पर भी सख्ती की तैयारी चल रही है।
- RBI का सुझाव: वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल पेमेंट से जुड़े फ्रॉड से निपटने के लिए एक 'डिजिटल पेमेंट प्रोटेक्शन फंड' बनाने का सुझाव दिया है। इसका मकसद यह है कि अगर सिस्टम की खामी या बड़ी साइबर सेंधमारी से पैसा चोरी होता है, तो उसका नुकसान अकेले यूजर को न उठाना पड़े। फ्रॉड को अब 'यूजर की गलती' के बजाय 'सिस्टम-वाइड रिस्क' (Systemic Risk) के तौर पर देखा जा रहा है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
'किल स्विच' का विचार सुनने में जितना सरल लगता है, इसका प्रभाव उतना ही बड़ा हो सकता है। साइबर फ्रॉड में सबसे महत्वपूर्ण 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती कुछ मिनट) होता है। अगर उस दौरान पैसा निकलने से रोक दिया जाए, तो ठगी नाकाम हो जाती है।
The Trending People का विश्लेषण है कि यह फीचर बुजुर्गों और कम तकनीक-प्रेमी लोगों के लिए वरदान साबित होगा, जो अक्सर ठगों के दबाव में आ जाते हैं। हालांकि, इसे लागू करने में तकनीकी चुनौतियां होंगी—जैसे गलती से बटन दबने पर क्या होगा या फ्रीज खाते को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया कितनी सुगम होगी। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह एक अनिवार्य कदम है। अब डरना नहीं, बस 'बटन दबाना' है।
