ग्रीनलैंड पर पुतिन का 'मास्टरस्ट्रोक'—कहा "इसकी कीमत तो सिर्फ 23 अरब रुपये है, अमेरिका इतना तो खर्च कर ही सकता है," यूरोप के जख्मों पर छिड़का नमक
मॉस्को/कोपेनहेगन, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — वैश्विक कूटनीति के मंच पर ग्रीनलैंड को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने वाशिंगटन से लेकर ब्रुसेल्स तक के गलियारों में सन्नाटा खींच दिया है। अक्सर अपनी आक्रामक सैन्य नीतियों के लिए चर्चा में रहने वाले पुतिन ने इस बार हथियारों के बजाय 'इतिहास' और 'गणित' का इस्तेमाल कर पश्चिम पर करारा तंज कसा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड खरीदने के पुराने प्रस्ताव पर चुटकी लेते हुए पुतिन ने इस विशाल द्वीप की कीमत महज 200 से 250 मिलियन डॉलर (करीब 23 अरब रुपये) आंकी है।
रूसी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड का विवाद रूस से जुड़ा नहीं है और यह पूरी तरह डेनमार्क और अमेरिका का आपसी मामला है, लेकिन उनकी टिप्पणियों ने यूरोप को असहज कर दिया है। पुतिन ने कहा कि यह निश्चित रूप से हमसे संबंधित नहीं है और मुझे लगता है कि वे इसे आपस में सुलझा लेंगे, लेकिन उनके शब्दों के चयन ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे इस विवाद का आनंद ले रहे हैं और पश्चिमी गठबंधन में दरार डालने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।
इतिहास के पन्नों से निकाली 'कीमत': अलास्का का फॉर्मूला
21 जनवरी 2026 को रूसी सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान पुतिन ने एक मंझे हुए इतिहासकार की तरह ग्रीनलैंड की कीमत समझाई। उन्होंने 1867 की उस ऐतिहासिक घटना का जिक्र किया जब रूस ने अपना अलास्का क्षेत्र अमेरिका को बेच दिया था। पुतिन ने याद दिलाया कि उस समय रूस ने अलास्का को महज 7.2 मिलियन डॉलर में अमेरिका को सौंपा था। उन्होंने मुद्रास्फीति और आज के आर्थिक हालात का हवाला देते हुए गणना की कि आज के हिसाब से अलास्का की वह कीमत करीब 158 मिलियन डॉलर बैठती है।
इस आधार पर पुतिन ने तुलनात्मक विश्लेषण पेश किया। उन्होंने बताया कि अलास्का का क्षेत्रफल लगभग 1.717 मिलियन वर्ग किलोमीटर है, जबकि ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल लगभग 2.166 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। इस तुलना के आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि ग्रीनलैंड की कीमत किसी भी हाल में 200 से 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसी महाशक्ति के लिए इतना खर्च उठाना कोई बड़ी बात नहीं है। पुतिन का यह बयान ग्रीनलैंड को एक 'संप्रभु क्षेत्र' के बजाय एक 'बिकाऊ जमीन' के टुकड़े की तरह पेश करने की कोशिश थी, जिसने डेनमार्क की संप्रभुता को चुनौती दी है।
डेनमार्क पर सीधा हमला: "कॉलोनी जैसा व्यवहार किया"
पुतिन का निशाना केवल अमेरिका तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने डेनमार्क को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने डेनमार्क को चिढ़ाते हुए कहा कि उसने ग्रीनलैंड के साथ हमेशा एक 'कॉलोनी' जैसा व्यवहार किया है और वहां के स्थानीय लोगों के साथ सख्ती बरती है। यह बयान डेनमार्क की मानवाधिकार छवि पर चोट करने वाला है। पुतिन ने इतिहास का एक और पन्ना पलटते हुए याद दिलाया कि 1917 में डेनमार्क ने अपने वर्जिन आइलैंड्स (Virgin Islands) अमेरिका को बेच दिए थे। उनका तर्क था कि इन दोनों देशों के बीच जमीन की खरीद-फरोख्त का पुराना इतिहास रहा है, इसलिए ग्रीनलैंड का सौदा कोई नई या अनैतिक बात नहीं है।
यूरोप के जख्म कुरेदे: फूट डालने की रणनीति
विश्लेषकों के मुताबिक, पुतिन का यह बयान महज संयोग नहीं है। यह यूरोप और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी को और उजागर करने की एक सोची-समझी रणनीति है। जिस ग्रीनलैंड द्वीप को यूरोप अपनी संप्रभुता और सम्मान का मुद्दा मानता है, उसे पुतिन ने एक सस्ते रियल एस्टेट सौदे की तरह पेश कर दिया। इससे यूरोप की राजनीतिक और नैतिक स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं। दरअसल, यूक्रेन युद्ध को लेकर पिछले चार वर्षों से यूरोपीय देशों के साथ प्रतिबंधों और कूटनीतिक अलगाव का सामना कर रहे पुतिन अब अमेरिका और यूरोप के आपसी मतभेदों को दूर से देख रहे हैं और मौका मिलते ही उन पर तंज कसने से नहीं चूक रहे।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
व्लादिमीर पुतिन का यह बयान कूटनीति में 'सार्केज्म' (व्यंग्य) का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने बड़ी चालाकी से अमेरिका की विस्तारवादी सोच और डेनमार्क के औपनिवेशिक अतीत को एक साथ कटघरे में खड़ा कर दिया है। 23 अरब रुपये की कीमत लगाना ग्रीनलैंड के संसाधनों और रणनीतिक महत्व का मजाक उड़ाना है, लेकिन यह पश्चिमी देशों को आइना भी दिखाता है कि वे अभी भी जमीनों को 'सौदा' मानते हैं।
The Trending People का विश्लेषण है कि पुतिन का उद्देश्य पश्चिम की एकता में सेंध लगाना है। जब नाटो देश रूस के खिलाफ एकजुट होने का दावा करते हैं, तब पुतिन ऐसे बयानों से उनके आपसी विवादों को हवा देते हैं। अलास्का की तुलना करना अमेरिका को यह याद दिलाने जैसा है कि उसने इतिहास में सबसे सस्ती जमीन रूस से ही खरीदी थी। यह बयानबाजी भले ही जमीन पर कुछ न बदले, लेकिन इसने भू-राजनीतिक विमर्श में रूस की मौजूदगी को एक बार फिर दर्ज करा दिया है।
