हरिद्वार में गरजे अमित शाह—"विश्व ढूंढ रहा समाधान, रास्ता भारतीय संस्कृति के पास," गायत्री परिवार के मंच से दिया 'व्यक्ति से राष्ट्र निर्माण' का मंत्र
हरिद्वार/नई दिल्ली, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — देवभूमि उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार, जहां गंगा की कलकल और मंत्रों की गूंज वातावरण को पवित्र करती है, वहां गुरुवार को राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम देखने को मिला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शांतिकुंज में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए एक ऐसा संदेश दिया जो वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती धमक को रेखांकित करता है। शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज पूरी दुनिया जिन जटिल समस्याओं—चाहे वह मानसिक तनाव हो, पर्यावरण संकट हो या युद्ध—से जूझ रही है, उनका स्थायी समाधान किसी पश्चिमी मॉडल में नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं और सनातन संस्कृति की जड़ों में निहित है।
गृह मंत्री का यह संबोधन केवल एक औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि यह भारत की 'सॉफ्ट पावर' और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उद्घोष था। उन्होंने कहा कि जो भी भारत और उसकी संस्कृति की गहराई को समझता है, वह यह स्वीकार करेगा कि विश्व की समस्त समस्याओं की कुंजी हमारे वेदों और उपनिषदों में छिपी है।
तपोभूमि की ऊर्जा और पंडित श्रीराम शर्मा का ऋण
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए अमित शाह ने हरिद्वार की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की यह पावन भूमि, विशेषकर सप्तर्षि भूमि हरिद्वार, केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है। यहां आते ही हजारों वर्षों की तपस्या की अदृश्य ऊर्जा का अनुभव होता है, जो मन को स्वतः ही शांत और एकाग्र कर देती है।
समारोह का केंद्र बिंदु शांतिकुंज के संस्थापक और युगद्रष्टा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का जीवन और दर्शन रहा। शाह ने भावुक होते हुए कहा कि भारत उनके उपकारों से कभी ऋणमुक्त नहीं हो सकता।
क्रांतिकारी कदम: उन्होंने याद दिलाया कि एक समय था जब गायत्री मंत्र को केवल कुछ वर्गों तक सीमित रखा गया था, लेकिन पंडित श्रीराम शर्मा ने इसे जन-जन तक सर्वसुलभ बनाकर आध्यात्मिक लोकतंत्र की स्थापना की।
वैज्ञानिक अध्यात्म: शाह ने कहा कि आचार्य जी ने वैश्विक मानवतावाद की अवधारणा को सुदृढ़ किया और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि उन्होंने 'वैज्ञानिक अध्यात्मवाद' (Scientific Spirituality) को तर्कों के साथ प्रस्तुत किया, जिससे युवा पीढ़ी भी धर्म से जुड़ सकी।
"हम बदलेंगे, युग बदलेगा": राष्ट्र परिवर्तन का सूत्र
गृह मंत्री ने गायत्री परिवार के प्रसिद्ध ध्येय वाक्य “हम बदलेंगे, युग बदलेगा” को राष्ट्र परिवर्तन की कुंजी बताया। उन्होंने विश्लेषण किया कि यह केवल एक नारा नहीं है, बल्कि आत्म-सुधार से समाज-सुधार की एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। शाह ने कहा कि गायत्री महामंत्र केवल संस्कृत के शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह जप करने वाले साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला 'जीवन मंत्र' है। पंडित श्रीराम शर्मा ने सनातन धर्म में समय के साथ आई विकृतियों को दूर कर आध्यात्मिकता को सीधे सामाजिक सरोकारों से जोड़ा। उन्होंने समानता, संस्कृति, एकता और अखंडता के मूल्यों को सुदृढ़ किया, जो आज के भारत की आवश्यकता है।
व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण
अमित शाह ने आचार्य के दर्शन को डिकोड करते हुए कहा कि उन्होंने “व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और समाज निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के विचार को व्यवहार में उतारने का मार्ग प्रशस्त किया। जब एक व्यक्ति चरित्रवान बनता है, तो समाज अपने आप उन्नत हो जाता है। शाह ने उपस्थित जनसमूह और गायत्री परिजनों से आह्वान किया कि वे आचार्य के मानव कल्याण के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएं।
उन्होंने पिछले दस वर्षों (मोदी सरकार के कार्यकाल) का जिक्र करते हुए कहा कि देश की कार्य-संस्कृति और सोच में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आया है। आज दुनिया भारत को उसकी गौरवशाली विरासत, संस्कृति और मूल्यों के संदर्भ में आदर भाव से देख रही है। शाह ने स्वामी विवेकानंद और अरविंद घोष जैसे युगपुरुषों के विचारों का उल्लेख करते हुए दोहराया कि भारत के उत्कर्ष से ही मानवता का उत्कर्ष सुनिश्चित होगा।
सीएम धामी: "शांतिकुंज एक वटवृक्ष है"
इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने गायत्री परिवार की तुलना एक विशाल वटवृक्ष से की, जो अपनी शाखाओं के जरिए आध्यात्मिक चेतना का प्रचार-प्रसार कर रहा है और समाज को शांति व सकारात्मकता की छाया प्रदान कर रहा है। धामी ने कहा कि आज भारत अपनी गौरवशाली संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान को नए स्वरूप में पुनः स्थापित कर रहा है। सनातन संस्कृति का यह विराट संदेश विश्व के कोने-कोने तक पहुंचे, इसके लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है, जिसमें गायत्री परिवार अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
आधुनिक तकनीक और वेद: अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. चिन्मय पांड्या ने संस्थान के विजन को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का मूल दर्शन समाज से भागना नहीं, बल्कि समाज में रहकर मानव कल्याण और सामाजिक उत्थान के कार्यों को आगे बढ़ाना है। संस्थान प्राचीन वेद, उपनिषद और गीता से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक तकनीक को आत्मसात कर रहा है और शिक्षा, प्रशिक्षण व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
अमित शाह का हरिद्वार दौरा और गायत्री परिवार के मंच से दिया गया संदेश यह बताता है कि सरकार 'विकास' के साथ-साथ 'विरासत' को भी समान महत्व दे रही है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जैसे संतों ने आजादी के बाद के भारत में नैतिक मूल्यों को बचाने का जो काम किया, वह अतुलनीय है।
The Trending People का विश्लेषण है कि आज जब दुनिया मानसिक अवसाद और संघर्षों से घिरी है, भारतीय दर्शन का 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'आत्मवत सर्वभूतेषु' का सिद्धांत ही शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। गृह मंत्री का यह कहना सही है कि समस्या का समाधान बाहर नहीं, भीतर है। गायत्री परिवार जैसे संगठन जो नशामुक्ति और वृक्षारोपण जैसे सामाजिक कार्यों को धर्म का हिस्सा मानते हैं, वे ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माता हैं।
