US-Israel-Iran Conflict: ट्रंप का बड़ा ऐलान- '4 गुना बढ़ेगा हथियारों का उत्पादन', ईरान के राष्ट्रपति बोले- 'कब्र में ले जाओ सरेंडर का सपना'
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और तानातनी अपने चरम पर पहुंच गई है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस महायुद्ध को आठ दिन बीत चुके हैं और दोनों तरफ से लगातार भीषण हमले जारी हैं। ईरान अब तक मध्य पूर्व के 10 से ज्यादा देशों को निशाना बना चुका है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बड़ा ऐलान किया है जिसने वैश्विक स्तर पर खलबली मचा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अपने हथियारों के उत्पादन (Weapons Production) को चार गुना करने जा रहा है, जिसका ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया है।
डिफेंस कंपनियों के साथ ट्रंप की बड़ी बैठक और ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ' (Truth Social) पर एक विस्तृत पोस्ट कर दुनिया को अपनी आक्रामक रणनीति का सीधा संदेश दिया है। ट्रंप ने लिखा, "हमने अभी-अभी अमेरिका की सबसे बड़ी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ एक बहुत अच्छी और अहम मीटिंग खत्म की है, जहां हमने 'प्रोडक्शन और प्रोडक्शन शेड्यूल' पर विस्तार से चर्चा की। सभी कंपनियां 'एक्सक्विजिट क्लास' (उत्तम श्रेणी) के हथियारों का उत्पादन चार गुना करने पर सहमत हो गई हैं। हम जितनी जल्दी हो सके, हथियारों की क्वांटिटी (मात्रा) के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंचना चाहते हैं।"
ट्रंप ने आगे की जानकारी देते हुए बताया कि इस महाविस्तार की तैयारी तीन महीने पहले ही शुरू कर दी गई थी। इनमें से कई हथियारों के प्लांट और उनका प्रोडक्शन पहले से ही एक्टिव मोड में चल रहा है।
उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, "हमारे पास मीडियम और अपर-मीडियम ग्रेड म्यूनिशन्स (गोला-बारूद) की लगभग 'अनलिमिटेड सप्लाई' (असीमित आपूर्ति) है। इसका सीधा इस्तेमाल हम, उदाहरण के लिए, ईरान में कर रहे हैं, और हाल ही में हमने इसे वेनेजुएला में भी किया है। फिर भी, हमने इन स्तरों पर हथियारों के आर्डरों को काफी बढ़ा दिया है।"
इस हाई-लेवल मीटिंग में दुनिया की 7 सबसे बड़ी रक्षा कंपनियों के सीईओ (CEO) शामिल हुए थे, जिनमें बीएई सिस्टम्स, बोइंग, हनीवेल एयरोस्पेस, एल3हैरिस मिसाइल सॉल्यूशंस, लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन और रेथियॉन के नाम प्रमुख हैं। इन नए डिफेंस प्लांट्स को लगाने के लिए अमेरिका भर के राज्य अब बिड (बोली) लगा रहे हैं।
'कब्र में जाएगा सरेंडर का सपना': मसूद पेजेशकियान का पलटवार
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को खुली धमकी देते हुए 'बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण' (Unconditional Surrender) करने को कहा था। ट्रंप ने साफ किया था कि जब तक ईरान आत्मसमर्पण नहीं करता, तब तक कोई भी शांति समझौता नहीं हो पाएगा।
इस धमकी का जवाब देते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) ने शनिवार को बेहद सख्त लहजे में अमेरिका पर पलटवार किया। पेजेशकियान ने दावा किया कि अमेरिका यह चाहता है कि तेहरान बिना शर्त घुटने टेक दे, लेकिन उसका यह सपना उसके मरते दम तक पूरा नहीं होगा।
ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया, "अमेरिका की बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग एक ऐसा कोरा सपना है, जिसे उन्हें अपने साथ कब्र में ले जाना चाहिए।"
खाड़ी देशों पर नहीं होगा हमला: ईरान का नया रुख
इस भीषण संघर्ष के बीच, ईरान ने अपने पड़ोसी खाड़ी देशों को लेकर एक बड़ी कूटनीतिक घोषणा भी की है। राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा कि अब पड़ोसी देशों पर किसी भी तरह के हमले नहीं किए जाएंगे, बशर्ते उन देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए न किया जाए।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की अंतरिम नेतृत्व परिषद (Interim Leadership Council) ने इस अहम फैसले को अपनी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ किसी भी तरह का तनाव नहीं बढ़ाना चाहता और भविष्य में ऐसे किसी भी हमले से बचने का पूरा प्रयास करेगा।
संपादकीय विश्लेषण: अमेरिका द्वारा हथियारों के उत्पादन को रातों-रात चार गुना बढ़ाने का फैसला इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह युद्ध जल्द खत्म होने वाला नहीं है। ट्रंप की नीतियां 'पीस थ्रू स्ट्रेंथ' (ताकत के जरिए शांति) पर आधारित हैं, जो क्षेत्र में हथियारों की एक नई अंधी दौड़ (Arms Race) को जन्म दे रही हैं। दूसरी ओर, ईरान का पलटवार और खाड़ी देशों को दिया गया आश्वासन उसकी एक सोची-समझी कूटनीति है, ताकि वह इस संघर्ष में अरब देशों को अपने खिलाफ लामबंद होने से रोक सके। आठ दिनों से जारी यह युद्ध अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और खासकर कच्चे तेल के बाजार के लिए एक बड़ा और वास्तविक खतरा बन चुका है।
