कैंसर के महंगे इलाज पर रूस का 'सर्जिकल स्ट्राइक'—बनाई ₹2600 वाली वैक्सीन 'इमुरोन वैक', ब्लैडर कैंसर के मरीजों के लिए संजीवनी
नई दिल्ली/मॉस्को, दिनांक: 2 जनवरी 2026 — कैंसर (Cancer) का नाम सुनते ही आम आदमी न केवल बीमारी की गंभीरता से डरता है, बल्कि उसके इलाज में लगने वाले लाखों रुपयों के खर्च से भी सहम जाता है। लेकिन नए साल की शुरुआत में मेडिकल जगत से एक ऐसी खबर आई है जो न केवल राहत देने वाली है, बल्कि उम्मीद की एक नई किरण भी है। रूस (Russia) ने ब्लैडर कैंसर (Bladder Cancer) के लिए एक नई और बेहद किफायती वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है, जिसकी कीमत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे।
रूस के वैज्ञानिकों ने 'इमुरोन वैक' (Imuron Vac) नामक टीका तैयार किया है, जिसकी कीमत भारतीय मुद्रा में 2,600 रुपये से भी कम बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर इसे लेने से कैंसर को नियंत्रित करने और दोबारा लौटने से रोकने में क्रांतिकारी सफलता मिल सकती है। भारत जैसे देश में, जहां ब्लैडर कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, यह वैक्सीन एक 'गेमचेंजर' साबित हो सकती है।
'इमुरोन वैक': गैमेलिया सेंटर का नया करिश्मा
इस वैक्सीन का निर्माण रूस के विश्व प्रसिद्ध गैमेलिया सेंटर (Gamaleya Center) ने किया है। यह वही संस्थान है जिसने कोविड-19 के दौरान 'स्पूतनिक वी' (Sputnik V) जैसी वैक्सीन बनाकर दुनिया में अपनी वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवाया था।
खास बातें:
किफायती दाम: रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय के 'स्टेट रजिस्टर ऑफ ड्रग्स' के अनुसार, इस टीके के दो डोज (Dose) वाले पैक की कीमत लगभग 2,500 से 2,600 भारतीय रुपये के बीच रखी गई है। कैंसर की दवाओं की लाखों रुपये की कीमत के मुकाबले यह न के बराबर है।
कैसे करती है काम: यह वैक्सीन मुख्य रूप से 'पोस्ट-ऑपरेटिव थेरेपी' (Post-operative Therapy) के तौर पर डिजाइन की गई है। इसका मतलब है कि जिन मरीजों की कैंसर सर्जरी हो चुकी है, उन्हें यह टीका लगाया जाता है ताकि ट्यूमर दोबारा न पनपे।
उपलब्धता: रूस के साथ-साथ आर्मेनिया जैसे देशों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है और उम्मीद है कि जल्द ही यह भारत समेत अन्य देशों के लिए भी उपलब्ध होगी।
भारत के लिए खतरे की घंटी: क्यों जरूरी है यह वैक्सीन?
भारत में ब्लैडर कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े डराने वाले हैं।
आंकड़े (2020): साल 2020 में भारत में ब्लैडर कैंसर के 22,000 से अधिक नए मामले सामने आए थे।
मृत्यु दर: चिंताजनक बात यह है कि इनमें से करीब 12,000 लोगों की मौत हो गई। समय पर इलाज न मिलना और महंगा उपचार इसकी मुख्य वजहें हैं। ऐसे में एक सस्ती वैक्सीन हजारों जान बचा सकती है।
क्या है ब्लैडर कैंसर? समझिए बीमारी को
मूत्राशय (Bladder) शरीर का वह थैलीनुमा अंग है जो किडनी से आने वाले मूत्र को इकट्ठा करता है। जब इसकी अंदरूनी परतों (Lining) की कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बढ़ने लगती हैं और गांठ या ट्यूमर का रूप ले लेती हैं, तो इसे ब्लैडर कैंसर कहते हैं।
खतरे के 4 बड़े संकेत (Red Flags): शरीर बीमारी से पहले कुछ इशारे देता है, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है:
- मूत्र में रक्त (Hematuria): पेशाब के साथ खून आना इसका सबसे प्रमुख लक्षण है। अक्सर इसमें दर्द नहीं होता, इसलिए लोग इसे टाल देते हैं।
- जलन और दर्द: पेशाब करते समय लगातार चुभन या पीड़ा महसूस होना।
- पीठ और पेट दर्द: पेट के निचले हिस्से या कमर के किनारों (Flanks) में लगातार दर्द बना रहना।
- अधूरा अहसास: बार-बार बाथरूम जाने की इच्छा होना, लेकिन हर बार ऐसा लगना कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ है।
स्टेज दर स्टेज बढ़ता जोखिम
- शुरुआती दौर (स्टेज 1-2): कैंसर केवल ब्लैडर की आंतरिक परत तक सीमित होता है। यहाँ इलाज और वैक्सीन की सफलता दर सबसे अधिक है।
- मध्यम दौर (स्टेज 3): ट्यूमर दीवारों को पार कर आसपास के ऊतकों (Tissues) तक पहुँच जाता है।
- अंतिम दौर (स्टेज 4): जब कैंसर हड्डियों, फेफड़ों या लिवर तक फैल जाता है (Metastasis), तो स्थिति जानलेवा हो जाती है।
बचाव का 'पंच-सूत्र': जीवनशैली में लाएं ये 5 बदलाव
डॉक्टरों का मानना है कि इलाज से बेहतर बचाव है। अपनी किडनी और ब्लैडर को स्वस्थ रखने के लिए इन नियमों को गांठ बांध लें:
- जल ही जीवन है: दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। पानी विषैले तत्वों (Toxins) को शरीर से बाहर निकालता है, जिससे ब्लैडर में गंदगी जमा नहीं होती।
- धूम्रपान को कहें 'ना': तंबाकू और सिगरेट का धुआं ब्लैडर कैंसर का सबसे बड़ा कारण (Risk Factor) है। हानिकारक रसायन मूत्र में जमा होकर कैंसर पैदा करते हैं।
- नेचुरल डाइट: अपने भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां और एंटीऑक्सीडेंट्स को शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड से बचें।
- पेशाब न रोकें: लंबे समय तक मूत्र रोकने की आदत मूत्राशय की कोशिकाओं पर अनावश्यक दबाव डालती है, जो हानिकारक हो सकता है। जब भी हाजत हो, तुरंत जाएं।
- पेनकिलर्स से दूरी: बिना डॉक्टरी सलाह के अत्यधिक दर्द निवारक (Painkillers) दवाएं खाने से बचें, क्योंकि इनका सीधा असर किडनी और ब्लैडर पर पड़ता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
रूस की यह नई वैक्सीन चिकित्सा विज्ञान में एक 'ब्रेकथ्रू' है। कैंसर का इलाज अब तक अमीरों की पहुंच तक सीमित माना जाता था, लेकिन 2,600 रुपये की वैक्सीन ने 'स्वास्थ्य समानता' (Health Equity) की उम्मीद जगाई है।
The Trending People का विश्लेषण है कि भारत सरकार को रूस के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर इस वैक्सीन को भारतीय मरीजों के लिए जल्द उपलब्ध कराने की पहल करनी चाहिए। 'आयुष्मान भारत' जैसी योजनाओं में इसे शामिल कर हम मृत्यु दर को काफी हद तक कम कर सकते हैं। हालांकि, वैक्सीन आने का मतलब यह नहीं कि हम लापरवाही बरतें; जीवनशैली में सुधार ही स्वस्थ जीवन की पहली और आखिरी शर्त है।
