Sabarimala Review Petitions: सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की नई बेंच करेगी सुनवाई, 14 मार्च तक लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश
नेशनल डेस्क: सबरीमाला मंदिर प्रवेश सहित महिलाओं के अधिकारों से जुड़े अहम मामलों में सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई आगे बढ़ गई है। शीर्ष अदालत ने सभी पक्षकारों को 14 मार्च तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके लिए कोर्ट ने दोनों पक्षों से एक-एक वकील को नोडल पर्सन नियुक्त किया है, जो सभी दलीलों को क्रमबद्ध कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
इन मामलों में सबरीमाला मंदिर में विशेष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का प्रश्न, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं से जुड़ी धार्मिक प्रथाएं, पारसी महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकार और मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश जैसे संवैधानिक मुद्दे शामिल हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट किया है कि इन याचिकाओं पर नौ जजों की संविधान पीठ खुली अदालत में सुनवाई करेगी। पिछली बार 10 फरवरी 2020 को नौ जजों की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई थी, लेकिन अब उस पीठ के अधिकांश न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वर्तमान में उस पीठ से केवल जस्टिस सूर्यकांत ही कार्यरत हैं।
ऐसे में नई नौ सदस्यीय संविधान पीठ का गठन किया जाएगा, जिसकी अगुवाई स्वयं मुख्य न्यायाधीश कर सकते हैं। यह सुनवाई धार्मिक स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और ‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’ जैसे संवैधानिक सवालों पर व्यापक मंथन का रास्ता खोलेगी।
Our Thoughts
सबरीमाला और इससे जुड़े मामलों की सुनवाई केवल एक धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि संविधान के मूल सिद्धांतों की परीक्षा है। लैंगिक समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और ‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’ की परिभाषा जैसे प्रश्न भारत की न्यायिक और सामाजिक दिशा तय करते हैं।
नई नौ जजों की पीठ का गठन यह संकेत देता है कि अदालत इस मुद्दे को व्यापक और गहन संवैधानिक दृष्टिकोण से देखना चाहती है। छह वर्षों के अंतराल के बाद फिर से इस बहस का शुरू होना दर्शाता है कि यह मामला केवल एक मंदिर या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि भारत के बहुलतावादी समाज की संरचना से जुड़ा हुआ है।
अंततः, सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में ऐसे कई विवादों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत तय कर सकता है।
