नए साल पर पूर्वोत्तर को मोदी सरकार का 'सुपरफास्ट' तोहफा—कोलकाता से गुवाहाटी दौड़ेगी 'वंदे भारत स्लीपर', किराया इतना कम कि फ्लाइट वाले भी सोच में पड़ जाएंगे
नई दिल्ली/कोलकाता/गुवाहाटी, [दिनांक: 2 जनवरी 2026] — नए साल की शुरुआत भारतीय रेल यात्रियों, विशेषकर पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर (North East) के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी के साथ हुई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि देश की बहुप्रतीक्षित और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 'वंदे भारत स्लीपर ट्रेन' (Vande Bharat Sleeper Train) कोलकाता और गुवाहाटी के बीच पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
यह ट्रेन न केवल गति और आराम का पर्याय होगी, बल्कि यह मिडिल क्लास की जेब और स्वाद का भी पूरा ख्याल रखेगी। जहां एक तरफ हवाई सफर महंगा होता जा रहा है, वहीं रेलवे ने इस ट्रेन को एक 'किफायती लक्जरी' (Affordable Luxury) विकल्प के रूप में पेश किया है।
किराया ऐसा कि फ्लाइट को दे मात: मिडिल क्लास की 'पहली पसंद'
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका 'किराया मॉडल' है। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वंदे भारत स्लीपर का किराया आम आदमी, विशेषकर मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर तय किया गया है।
किराये का गणित:
- हवाई सफर: वर्तमान में गुवाहाटी से कोलकाता की हवाई टिकट औसतन 6,000 से 8,000 रुपये के बीच पड़ती है, जो कई बार त्योहारों के सीजन में और महंगी हो जाती है।
वंदे भारत: इसके मुकाबले, इस स्लीपर ट्रेन का किराया आधे से भी कम है।
- थर्ड एसी (3AC): मात्र ₹2,300 (इसमें खाना भी शामिल है)।
- सेकंड एसी (2AC): करीब ₹3,000।
- फर्स्ट एसी (1AC): लगभग ₹3,600।
यह अंतर उन यात्रियों के लिए गेमचेंजर साबित होगा जो आरामदायक सफर तो चाहते हैं, लेकिन फ्लाइट का भारी-भरकम खर्च नहीं उठाना चाहते।
स्वाद का सफर: थाली में परोसा जाएगा 'बंगाल और असम' का प्यार
वंदे भारत स्लीपर सिर्फ एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव भी होगी। रेलवे ने कैटरिंग मेन्यू (Catering Menu) में एक बड़ा बदलाव किया है—अब ट्रेन में स्टैंडर्ड खाना नहीं, बल्कि स्थानीय व्यंजन (Local Cuisine) परोसे जाएंगे।
गुवाहाटी से चलते वक्त: जब ट्रेन गुवाहाटी से रवाना होगी, तो यात्रियों को पारंपरिक असमिया भोजन का स्वाद चखने को मिलेगा। इसमें स्थानीय चावल, दाल, सब्जी और असम की मशहूर चाय शामिल हो सकती है।
कोलकाता से चलते वक्त: वहीं, जब ट्रेन 'सिटी ऑफ जॉय' कोलकाता से प्रस्थान करेगी, तो मेन्यू में बंगाली व्यंजनों की खुशबू होगी। इसमें लूची-आलू दम, मिष्टी दोई (मीठा दही) और रसगुल्ला जैसे आइटम शामिल किए जा सकते हैं।
रेल मंत्री का कहना है कि "हम चाहते हैं कि यात्री सफर के साथ-साथ उस क्षेत्र के स्वाद को भी याद रखें।"
रफ्तार और तकनीक: 180 की क्षमता, 130 पर दौड़
यह स्लीपर ट्रेन तकनीकी रूप से भारतीय रेलवे की सबसे उन्नत ट्रेनों में से एक है।
डिजाइन स्पीड: इस ट्रेन को 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने के लिए डिजाइन किया गया है।
परिचालन गति: हालांकि, पटरियों की सुरक्षा और क्षमता को देखते हुए फिलहाल इसे 120-130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा, जो इसे इस रूट की सबसे तेज ट्रेन बनाता है। यह दोनों शहरों के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगी।
कोच और सीटिंग: 823 यात्रियों का 'चलता-फिरता होटल'
वंदे भारत स्लीपर को यात्रियों के आराम को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए डिजाइन किया गया है। यह 16 कोच वाली एक पूरी तरह से वातानुकूलित ट्रेन होगी।
कोच कंपोजिशन:
- कुल क्षमता: 823 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे।
- थर्ड एसी (3AC): सबसे ज्यादा 11 कोच थर्ड एसी के होंगे, जिनमें 611 सीटें होंगी। यह बताता है कि फोकस आम यात्री पर है।
- सेकंड एसी (2AC): इसके 4 कोच होंगे, जिनमें 188 यात्री सफर करेंगे।
- फर्स्ट एसी (1AC): लक्जरी अनुभव के लिए 1 कोच फर्स्ट एसी का होगा, जिसमें 24 बर्थ होंगी। इसमें होटल जैसी सुविधाएं और प्राइवेसी मिलेगी।
पूर्वोत्तर के लिए क्यों है यह 'जीवनरेखा'?
कोलकाता और गुवाहाटी के बीच यह कनेक्टिविटी रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। गुवाहाटी को 'पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार' कहा जाता है। यह ट्रेन व्यापारियों, छात्रों, मरीजों (जो इलाज के लिए कोलकाता आते हैं) और पर्यटकों के लिए एक वरदान साबित होगी। चिकन नेक कॉरिडोर (Siliguri Corridor) से गुजरते हुए यह ट्रेन न केवल बंगाल और असम को, बल्कि पूरे भारत को पूर्वोत्तर से और मजबूती से जोड़ेगी।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का लॉन्च होना भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब तक वंदे भारत केवल चेयर कार (बैठने वाली) थी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा मुश्किल थी। स्लीपर वर्जन ने उस कमी को पूरा कर दिया है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 2,300 रुपये में खाने के साथ 3AC का सफर एक बेहद आकर्षक डील है। यह ट्रेन 'उड़ान' योजना को टक्कर दे सकती है। स्थानीय भोजन को मेन्यू में शामिल करना रेलवे की 'वोकल फॉर लोकल' सोच को दर्शाता है। अगर रेलवे इस ट्रेन की समय की पाबंदी (Punctuality) और साफ-सफाई को बनाए रख पाता है, तो यह रूट भारतीय रेलवे के लिए 'सोने का अंडा' देने वाली मुर्गी साबित होगा।
