सिर्फ 'आधार' दिखाओ और ले जाओ 90 हजार—रेहड़ी-पटरी वालों के लिए मोदी सरकार की 'स्वनिधि' बनी संजीवनी, जानें कैसे मिलेगा लाभ
नई दिल्ली, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — अक्सर कहा जाता है कि बड़ा कारोबार शुरू करने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत होती है, लेकिन कई बार सही समय पर मिली छोटी सी आर्थिक मदद भी जिंदगी की दिशा बदल सकती है। भारत जैसे देश में, जहां लाखों लोग रोज कुआं खोदते हैं और रोज पानी पीते हैं (दिहाड़ी मजदूर/स्ट्रीट वेंडर्स), उनके लिए केंद्र सरकार की एक महत्वकांक्षी योजना 'रामबाण' साबित हो रही है। इस योजना का नाम है— प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM SVANidhi Scheme)।
अगर आप सड़क किनारे छोटी दुकान लगाते हैं, फल-सब्जी बेचते हैं या कोई छोटा-मोटा काम करते हैं, तो अब आपको साहूकारों के चंगुल में फंसने की जरूरत नहीं है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पात्र व्यक्ति सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर 90 हजार रुपये तक का लोन ले सकता है। इसके लिए न किसी 'गारंटर' की जरूरत है और न ही कोई संपत्ति (Collateral) गिरवी रखनी होती है।
क्या है 'पीएम स्वनिधि' का गणित? (Loan Structure)
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM Street Vendor's AtmaNirbhar Nidhi) को विशेष रूप से शहरी इलाकों में काम कर रहे स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे दुकानदारों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए डिजाइन किया गया है। इस स्कीम में लोन एक बार में नहीं, बल्कि तीन चरणों (Tranches) में मिलता है, जो वित्तीय अनुशासन सिखाता है।
- पहला चरण: शुरुआत में वेंडर को 10,000 रुपये का लोन मिलता है। यह राशि काम शुरू करने या माल भरने के लिए काफी होती है।
- दूसरा चरण: अगर लाभार्थी पहले लोन का भुगतान समय पर या उससे पहले कर देता है, तो उसे दूसरे चरण में 30,000 रुपये का बड़ा लोन मिलता है।
- तीसरा चरण: दूसरे लोन को चुकाने के बाद, तीसरे और अंतिम चरण में 50,000 रुपये की राशि दी जाती है।
इस तरह, नियमों का पालन करते हुए एक छोटा व्यापारी कुल 90,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकता है। लोन की पूरी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते (DBT) में ट्रांसफर की जाती है, जिससे बिचौलियों का खेल खत्म हो जाता है।
ब्याज में छूट और कैशबैक का 'डबल बोनांजा'
यह योजना केवल लोन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईमानदारी को पुरस्कृत भी करती है।
- सब्सिडी: समय पर या जल्दी ईएमआई (EMI) चुकाने वाले लाभार्थियों को 7 प्रतिशत तक की ब्याज सब्सिडी का फायदा दिया जाता है। यह सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में जमा होती है, जिससे लोन पर ब्याज का बोझ नाममात्र रह जाता है।
- डिजिटल कैशबैक: डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए, यदि वेंडर यूपीआई (QR Code) के जरिए लेनदेन करता है, तो उसे हर महीने 100 रुपये तक का कैशबैक मिल सकता है। साल भर में यह राशि 1200 रुपये तक हो सकती है, जो एक अतिरिक्त कमाई है।
कौन ले सकता है लाभ? (Eligibility)
इस योजना का लाभ वही लोग ले सकते हैं जो शहरों या कस्बों में स्ट्रीट वेंडर के रूप में काम कर रहे हों।
- पहचान पत्र: इसके लिए नगर निकाय (Municipal Corporation) से मिला वेंडिंग सर्टिफिकेट (Vending Certificate) या पहचान पत्र होना जरूरी है।
- सर्वे लिस्ट: जिन लोगों का नाम सरकारी सर्वे में शामिल नहीं है, वे भी नगर निकाय से सिफारिश पत्र (Letter of Recommendation) प्राप्त कर और अपना सत्यापन कराकर इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
आवेदन कैसे करें? (How to Apply)
प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी रखा गया है।
- वेबसाइट: आवेदक को योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmsvanidhi.mohua.gov.in पर जाना होगा।
- लॉगिन: अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन करें और वेंडर श्रेणी चुनें।
- फॉर्म: ऑनलाइन फॉर्म भरें और आधार कार्ड व वेंडिंग सर्टिफिकेट अपलोड करें।
- मंजूरी: सभी दस्तावेज सही पाए जाने पर बैंक द्वारा आमतौर पर 30 दिनों के भीतर लोन मंजूर कर दिया जाता है।
- ट्रैकिंग: आप अपनी एप्लीकेशन का स्टेटस ऑनलाइन कभी भी चेक कर सकते हैं। इसके अलावा, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर भी आवेदन किया जा सकता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
पीएम स्वनिधि योजना 'अंत्योदय' की भावना को चरितार्थ करती है। जिन रेहड़ी-पटरी वालों को बैंक कभी गेट के अंदर नहीं घुसने देते थे, आज सरकार उन्हें बिना गारंटी लोन दे रही है। यह न केवल उन्हें साहूकारों के 10-20% मासिक ब्याज से बचाता है, बल्कि उन्हें मुख्यधारा की बैंकिंग से भी जोड़ता है।
The Trending People का विश्लेषण है कि डिजिटल कैशबैक और ब्याज सब्सिडी जैसे प्रावधान छोटे व्यापारियों को तकनीक अपनाने और वित्तीय अनुशासन रखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अगर इस योजना का लाभ हर पात्र वेंडर तक पहुंचता है, तो यह शहरी गरीबी उन्मूलन (Urban Poverty Alleviation) की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम होगा। यह 'आत्मनिर्भर भारत' की नींव को मजबूत करने वाला प्रयास है।
