संसद सत्र 2026: पीएम मोदी का प्रहार, एलआईसी का मुनाफा और सत्ता पक्ष-विपक्ष की 'साजिश' पर रार
भारतीय संसद का बजट सत्र 2026 राजनीतिक संघर्ष और आर्थिक उपलब्धियों के एक अनोखे संगम का गवाह बन रहा है। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट पर तीखे तंज कसे और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने सरकार पर स्पीकर के पीछे छिपने का आरोप लगाया, वहीं आर्थिक मोर्चे पर देश के लिए अच्छी खबर आई है। सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12,958 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। राजनीतिक खींचतान के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आर्थिक सुधारों और एलआईसी के इन मजबूत आंकड़ों ने सरकार के विकास के दावों को नई मजबूती दी है।
एलआईसी के शानदार नतीजे: आर्थिक सामर्थ्य का प्रमाण
संसद में चल रही आर्थिक चर्चाओं के बीच भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अपने वित्तीय प्रदर्शन से बाजार को चौंका दिया है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 12,958 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 11,056 करोड़ रुपये था। यह 17 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि सरकार के उस दावे को बल देती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अब पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी और लाभदायक बन रहे हैं।
इस तिमाही के दौरान एलआईसी की शुद्ध प्रीमियम आय में भी भारी उछाल देखा गया है। कंपनी ने 1,25,613 करोड़ रुपये की शुद्ध प्रीमियम आय दर्ज की है, जो पिछले साल की समान अवधि में 1,06,891 करोड़ रुपये थी। वहीं कंपनी की कुल आय भी बढ़कर 2,33,984 करोड़ रुपये के स्तर को छू गई है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू नए कारोबार से मिलने वाला प्रीमियम रहा, जो 7,285 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,605 करोड़ रुपये हो गया है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि बीमा क्षेत्र में एलआईसी की पकड़ और नागरिकों का भरोसा निरंतर बना हुआ है।
लोकसभा अध्यक्ष का बयान और सत्ता पक्ष के आरोप
संसद के भीतर राजनीतिक तनाव उस समय चरम पर पहुँच गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दावा किया कि बुधवार को विपक्ष के कुछ सदस्य प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ किसी 'अप्रत्याशित घटना' को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों के व्यवहार को लोकसभा के इतिहास पर एक 'काले धब्बे' की तरह बताया और कहा कि सदस्यों के अभद्र आचरण के कारण ही उन्होंने प्रधानमंत्री को सदन में न आने का सुझाव दिया था।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी महिला सांसदों का ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़ना एक पूर्व-नियोजित हमले का हिस्सा था। उनके अनुसार, यह पूरी साजिश प्रधानमंत्री के संबोधन को बाधित करने और सदन में अराजकता फैलाने के लिए रची गई थी। सत्ता पक्ष इसे संसदीय मर्यादाओं के खुले उल्लंघन के रूप में देख रहा है।
विपक्ष का पलटवार: 'स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं प्रधानमंत्री'
सत्ता पक्ष के इन आरोपों पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सरासर झूठ और प्रधानमंत्री की कमजोरी बताया है। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अब लोकसभा अध्यक्ष के पीछे छिप रहे हैं और उनके माध्यम से अपनी विफलताएं छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी महज चंद महिला सांसदों के विरोध से इतना डर गए कि वे सदन में आने की हिम्मत नहीं जुटा सके। उन्होंने इसे 'बकवास' करार देते हुए कहा कि विपक्ष केवल विरोध कर रहा था और किसी भी तरह की हिंसा की कोई योजना नहीं थी।
प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बात करते हुए यह भी पूछा कि आखिर विपक्ष के नेता को सदन में बोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह राहुल गांधी को तथ्यों के साथ बोलने से रोकने के लिए नए-नए बहाने बना रही है। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी इस विवाद को दलित और महिला अस्मिता से जोड़ते हुए सरकार से माफी की मांग की है।
राज्यसभा में प्रधानमंत्री का संबोधन और वैश्विक छवि
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए विपक्ष के वॉकआउट को उनकी हार और जवाबदेही से भागने का रास्ता बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व आज भारत की आर्थिक शक्ति और विनिर्माण क्षमता को मान्यता दे रहा है और इसीलिए आज भारत 'विश्व बंधु' के रूप में उभर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि अंतरिक्ष, विज्ञान और खेल जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति आज दुनिया के लिए प्रेरणा बन रही है और वैश्विक निवेशक भारत के आर्थिक तंत्र पर अटूट विश्वास जता रहे हैं।
वित्त मंत्री का आर्थिक स्पष्टीकरण और बाजार की हलचल
आर्थिक परिदृश्य पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण सोने की कीमतों में आई 13% की भारी गिरावट पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर मुद्राओं के प्रति अविश्वास ही सोने के दाम गिराने का मुख्य कारण है। इसके साथ ही बजट 2026 में सुरक्षा लेनदेन कर (STT) बढ़ाने के निर्णय को उन्होंने सट्टेबाजी रोकने और खुदरा निवेशकों की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य कदम बताया। वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि एलआईसी जैसे मजबूत संस्थानों और सरकारी सुधारों के चलते आने वाले महीनों में निजी खपत और राजकोषीय स्थिति और भी बेहतर होगी।
Our Final Thoughts (हमारा निष्कर्ष)
संसद का यह सत्र भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के एक नए दौर को परिभाषित कर रहा है। एक तरफ जहाँ राजनीतिक मर्यादाएं और संसदीय संवाद अपने निम्नतम स्तर पर पहुँच गए हैं, वहीं दूसरी तरफ एलआईसी जैसे सार्वजनिक संस्थानों के नतीजे भारत की आर्थिक मजबूती की एक अलग कहानी कह रहे हैं। एलआईसी का 17% का मुनाफा यह साबित करता है कि घरेलू बाजार में भारतीय कंपनियों की साख बढ़ रही है, जो 'विकसित भारत' के विजन के लिए शुभ संकेत है।
हालांकि, सदन के भीतर बढ़ता अविश्वास और एक-दूसरे पर 'हमले' या 'छिपने' जैसे आरोप लगाना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है। वित्त मंत्री के सुधार और एलआईसी के लाभ का वास्तविक फायदा तभी होगा जब देश में एक स्थिर राजनीतिक वातावरण हो। सोने की कीमतों में गिरावट ने आम आदमी की चिंता बढ़ाई है, जिसे संतुलित करना सरकार के लिए आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती होगी। निष्कर्षतः, 2026 का यह बजट सत्र केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और आर्थिक आत्मनिर्भरता की एक बड़ी परीक्षा है।
