संसद सत्र 2026: पीएम मोदी का प्रहार, विपक्ष का पलटवार और सत्ता पक्ष पर 'साजिश' के आरोपों से गरमाई राजनीति
भारतीय संसद का बजट सत्र 2026 एक ऐसी राजनीतिक जंग का मैदान बन गया है जहाँ मर्यादा और आरोपों की सीमाएं हर दिन लांघी जा रही हैं। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट पर तीखे तंज कसे, वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के आरोपों ने विपक्ष को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। इसके जवाब में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे प्रधानमंत्री की 'कमजोरी' करार दिया है। इस राजनीतिक खींचतान के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आर्थिक सुधारों और सोने की कीमतों में गिरावट ने बाजार और संसद दोनों का तापमान बढ़ा रखा है।
लोकसभा अध्यक्ष का बयान और गिरिराज सिंह के आरोप
संसद के भीतर तनाव उस समय चरम पर पहुँच गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक अभूतपूर्व बयान देते हुए कहा कि बुधवार को सदन में कांग्रेस के कई सदस्य प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ किसी 'अप्रत्याशित घटना' को अंजाम देने की फिराक में थे। स्पीकर ने दावा किया कि सदस्यों के व्यवहार के कारण ही उन्होंने खुद प्रधानमंत्री को सदन में न आने का सुझाव दिया था। उन्होंने विपक्षी सदस्यों के व्यवहार को लोकसभा के इतिहास पर एक 'काले धब्बे' की तरह बताया और कहा कि उनके चैंबर में आकर जिस तरह का आचरण किया गया, वह पहले कभी नहीं देखा गया।
इसी सुर में सुर मिलाते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी आरोप लगाया कि विपक्षी महिला सांसदों का सत्ता पक्ष की सीटों की ओर बढ़ना एक पूर्व-नियोजित हमले का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि शाम पांच बजे जब प्रधानमंत्री को अपना संबोधन देना था, तब विपक्ष का इस तरह ट्रेजरी बेंच के पास आकर खड़ा होना केवल अराजकता फैलाने के उद्देश्य से किया गया था। सत्ता पक्ष का स्पष्ट मानना है कि विपक्ष सदन की कार्यवाही को बाधित करने के लिए मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहा है।
प्रियंका गांधी का पलटवार: 'स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं प्रधानमंत्री'
सत्ता पक्ष के इन गंभीर आरोपों पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए इसे सरासर झूठ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री अब लोकसभा अध्यक्ष के पीछे छिप रहे हैं और उनके माध्यम से निराधार बातें कहलवा रहे हैं। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी महज तीन महिला सांसदों के खड़ा होने से इतना डर गए कि वे सदन के भीतर आने की हिम्मत नहीं जुटा सके। उन्होंने इसे 'बकवास' करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पर हमला करने या उन्हें चोट पहुँचाने जैसी कोई योजना कभी थी ही नहीं।
प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आखिर विपक्ष के नेता को बोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है और क्या सरकार राहुल गांधी को तथ्यों को उद्धृत करने से रोकने के लिए बहाने बना रही है। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी इस विवाद में जाति और लिंग का मुद्दा जोड़ते हुए पूछा कि क्या सरकार दलित महिला सांसदों के खड़े होने को आतंकवाद मानती है। उन्होंने मांग की कि सरकार को देश की महिला सांसदों, विशेषकर दलित महिलाओं से उनके प्रति व्यक्त किए गए इन अपमानजनक संदेहों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
राज्यसभा में प्रधानमंत्री का संबोधन और वैश्विक छवि
इस हंगामे के बीच राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपना पक्ष रखा और विपक्ष के वॉकआउट को उनकी 'थकान' और 'जवाबदेही से भागने' की प्रवृत्ति बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष देश की उस बदहाली के लिए जिम्मेदार है जिसे सुधारने में मौजूदा सरकार जुटी हुई है। उन्होंने भारत को 'विश्व बंधु' बताते हुए कहा कि आज दुनिया के देश भारत की आर्थिक शक्ति और विनिर्माण क्षमता के कारण हमारे साथ व्यापारिक समझौते करने के लिए कतार में खड़े हैं। अंतरिक्ष से लेकर खेल तक, भारत की उपलब्धियां आज वैश्विक पटल पर एक नई पहचान बना रही हैं।
वित्त मंत्री का आर्थिक स्पष्टीकरण: सोना और STT
आर्थिक मोर्चे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोने की कीमतों में आई 13% की भारी गिरावट पर स्पष्टीकरण देते हुए इसे वैश्विक अस्थिरता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्राओं के प्रति अविश्वास ही निवेशकों को सोने की ओर ले जाता है और वर्तमान गिरावट वैश्विक सुधारों का हिस्सा है। बजट 2026 में सुरक्षा लेनदेन कर (STT) बढ़ाने के निर्णय पर उन्होंने दोहराया कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर टैक्स में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी को नियंत्रित करना है ताकि खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके।
राजनीतिक और कानूनी पृष्ठभूमि
यह संपूर्ण विवाद वित्त विधेयक 2026 के पारित होने की प्रक्रिया और संसदीय मर्यादाओं के उल्लंघन की शिकायतों के बीच फंसा हुआ है। कानूनी तौर पर जहाँ सरकार सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स एक्ट में बदलाव कर रही है, वहीं संसदीय कार्यप्रणाली के तहत सदस्यों के आचरण की जांच विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) के पास जा सकती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच का यह गतिरोध अब नीतियों से हटकर व्यक्तिगत आरोपों और संस्थानों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने तक पहुँच गया है।
Our Final Thoughts (हमारा निष्कर्ष)
संसद का यह बजट सत्र केवल विधायी कार्यों के लिए नहीं, बल्कि संस्थानों के बीच बढ़ते अविश्वास के लिए याद रखा जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष जैसे निष्पक्ष पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा विपक्ष के व्यवहार को 'काला धब्बा' कहना और उसके जवाब में प्रियंका गांधी द्वारा 'प्रधानमंत्री का स्पीकर के पीछे छिपना' जैसे आरोप लगाना भारतीय संसदीय लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत है। जब सदन का अध्यक्ष और विपक्ष एक-दूसरे के प्रति इस कदर कटु हो जाएं, तो संवाद की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है।
एक तरफ भारत वैश्विक मंच पर 'विश्व बंधु' बनने की राह पर है, वहीं घरेलू स्तर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती यह खाई देश के आर्थिक और सामाजिक विजन को प्रभावित कर सकती है। वित्त मंत्री के आर्थिक सुधार जहाँ निवेशकों को अनुशासित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं सोने के गिरते दाम आम आदमी की बचत पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अंततः, देश को एक ऐसी संसद की जरूरत है जहाँ आरोप-प्रत्यारोप के बजाय नीतियों पर सार्थक बहस हो, क्योंकि लोकतंत्र की मजबूती केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि सदन की गरिमापूर्ण चर्चाओं में निहित होती है।
