ट्रंप के दावे पर रूस की 'दो टूक', इधर पीयूष गोयल का राहुल पर पलटवार—कहा "डील ऐतिहासिक है, विपक्ष झूठ फैलाकर देश को गुमराह कर रहा
नई दिल्ली/मॉस्को, दिनांक: 4 फरवरी 2026 — भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते और रूसी तेल को लेकर चल रहे कूटनीतिक घमासान के बीच भारत सरकार ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। एक तरफ जहां रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद रोकने की बात कही गई थी, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने मोर्चा संभालते हुए इस डील को 140 करोड़ भारतीयों के लिए 'स्वर्णिम भविष्य' का द्वार बताया है। उन्होंने संसद में हुए हंगामे और विपक्ष के आरोपों पर कड़ा प्रहार करते हुए राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया।
रूस का इनकार: "हमें दिल्ली से कोई संदेश नहीं मिला"
सबसे पहले बात अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने ट्रंप के दावे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मास्को को नई दिल्ली की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है कि वह रूसी तेल की खरीद रोकने जा रहा है। पेसकोव ने जोर देकर कहा कि रूस भारत के साथ अपने 'रणनीतिक साझेदारी' वाले रिश्तों को बेहद अहम मानता है। यह बयान ट्रंप के उस नरेटिव को चुनौती देता है जिसमें उन्होंने भारत को रूस से दूर करने का श्रेय लेने की कोशिश की थी।
पीयूष गोयल की प्रेस कॉन्फ्रेंस: "विपक्ष का व्यवहार शर्मनाक"
संसद में हुए हंगामे के बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मीडिया के सामने आकर सरकार का पक्ष रखा।
ऐतिहासिक समझौता: गोयल ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए कहा कि लंबे इंतजार के बाद कल रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक ऐसी डील फाइनल हुई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। टैरिफ को 18% करना एक बड़ी जीत है।
विपक्ष पर हमला: उन्होंने संसद में हुए हंगामे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए विपक्ष के व्यवहार को 'शर्मनाक' बताया। गोयल ने कहा, "हम इस डील की जानकारी संसद पटल पर देना चाहते थे, लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने स्पीकर की कुर्सी तक पहुंचकर उनका अपमान किया। इस नकारात्मक सोच की वजह से ही हमें प्रेस के सामने आना पड़ा।"
"कृषि और डेयरी पूरी तरह सुरक्षित": किसानों को भरोसा
विपक्ष द्वारा कृषि और डेयरी क्षेत्र को लेकर उठाए गए सवालों पर पीयूष गोयल ने स्थिति स्पष्ट की।
भ्रम पर प्रहार: उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को 'झूठ और फरेब' बताते हुए कहा कि विपक्ष देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जनता सच्चाई समझती है।
आश्वासन: गोयल ने विश्वास दिलाया कि भारत के संवेदनशील क्षेत्रों, जैसे कृषि (Agriculture) और डेयरी (Dairy) को इस समझौते में पूरी तरह सुरक्षित (Protected) रखा गया है। यानी अमेरिकी उत्पादों की बाढ़ से भारतीय किसानों को नुकसान होने का डर बेबुनियाद है।
युवाओं और निर्यातकों के लिए अवसर
सरकार का दावा है कि यह डील रोजगार के नए अवसर लाएगी। पीयूष गोयल के अनुसार, टैरिफ कम होने से भारतीय निर्यातकों को 'ग्लोबल वैल्यू चेन' का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा। इससे गांवों के युवाओं, मछुआरों और किसानों के लिए रोजगार के नए साधन पैदा होंगे और भारत में आधुनिक तकनीक व निवेश का प्रवाह तेज होगा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि भारत-अमेरिका डील केवल अर्थशास्त्र नहीं, बल्कि राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गई है। रूस का बयान भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की पुष्टि करता है, जबकि पीयूष गोयल का स्पष्टीकरण घरेलू राजनीति में डैमेज कंट्रोल की कोशिश है।
The Trending People का विश्लेषण है कि कृषि क्षेत्र पर सरकार का आश्वासन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की 70% आबादी की आजीविका है। हालांकि, विपक्ष का काम सवाल पूछना है और सरकार का काम जवाब देना। संसद में संवादहीनता लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। अब देखना होगा कि क्या सरकार इस डील के दस्तावेज सार्वजनिक करती है ताकि 'शर्तों' को लेकर बना संशय पूरी तरह खत्म हो सके।
