बेलवनिया–बगहा पुल परियोजना रद, यूपी–बिहार के सीमावर्ती इलाकों में निराशा, आंदोलन की चेतावनी
नारायणी नदी पर प्रस्तावित बेलवनिया–बगहा पुल परियोजना के रद होने से उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली करीब एक लाख आबादी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार और बिहार सरकार की संयुक्त सहमति से 12 दिसंबर 2024 को स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रारंभिक आगणन लगभग 750 करोड़ रुपये था। हालांकि, बाद में लागत में भारी वृद्धि होने के कारण परियोजना को निरस्त कर दिया गया।
लागत बढ़ने के बाद बदला फैसला
सूत्रों के अनुसार, स्वीकृति के बाद बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बीएसआरडीसी) द्वारा सर्वे कराया गया। सर्वे के आधार पर जब नए सिरे से आगणन तैयार किया गया, तो परियोजना की अनुमानित लागत काफी बढ़ गई। इसके बाद केंद्र और बिहार सरकार की आपसी सहमति से पिछले सप्ताह इस परियोजना को रद करने का निर्णय लिया गया।
सीमावर्ती गांवों में नाराजगी
परियोजना रद होने की खबर सामने आते ही उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती गांवों में नाराजगी फैल गई। इस फैसले के खिलाफ छितौनी–तमकुही रेल चलाओ संघर्ष समिति ने विरोध दर्ज कराया है और आंदोलन की चेतावनी दी है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर यह पुल बनता तो कुशीनगर जिले के छितौनी, बेलवनिया, दरगौली, नरकहवां, तीनबरदहां, केशवपट्टी, धरनीपट्टी समेत करीब 20 गांव सीधे बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के पिपरासी प्रखंड और बगहा को जोड़ते।
विकास की बड़ी उम्मीदें जुड़ी थीं
स्थानीय लोगों के अनुसार इस पुल के जरिए यूपी और बिहार के करीब सौ गांवों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलती। इससे व्यापार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई गति मिलने की उम्मीद थी। बेलवनिया में आयोजित संघर्ष समिति की बैठक में अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि यह पुल दोनों राज्यों के लोगों के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता था।
आंदोलन की रूपरेखा तय
संघर्ष समिति के महामंत्री शैलेश यदुवंशी ने कहा कि पुल निर्माण की स्वीकृति के लिए संघर्ष जारी रहेगा। पहले चरण में हस्ताक्षर अभियान और जनजागरण किया जाएगा। यदि इसके बाद भी वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलती है, तो धरना और प्रदर्शन किया जाएगा।
वैकल्पिक समाधान पर विचार
बीएसआरडीसी के कार्यपालक अभियंता अविनाश कुमार के अनुसार, परियोजना की लागत बढ़ने के कारण इसे रद किया गया है। आमजन की सुविधा को देखते हुए वैकल्पिक समाधान के रूप में रतवल–धनहां पुल को चौड़ा करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसके लिए पुल के एलायनमेंट में बदलाव किया जा रहा है।
हमारी राय
बेलवनिया–बगहा पुल परियोजना का रद होना सीमावर्ती इलाकों के विकास के लिए बड़ा झटका है। सरकार को चाहिए कि जनहित को ध्यान में रखते हुए या तो परियोजना के लिए नए सिरे से समाधान निकाले या वैकल्पिक व्यवस्था को जल्द अमल में लाकर लोगों की कठिनाइयों को कम करे।
