संसद सत्र के घटते समय पर मायावती की चिंता, 100 दिन के कैलेंडर की मांग; मदरसा फैसले का स्वागत
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संसद और राज्यों के विधानमंडलों के सत्र का समय घटने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हंगामा और बार-बार स्थगन के कारण जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी चर्चा नहीं हो पा रही है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की उपयोगिता कम होती जा रही है।
100 दिन के कैलेंडर पर जोर
मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में इस विषय पर चिंता जताना समयानुकूल और सराहनीय है। उन्होंने सरकार और विपक्ष—दोनों से गंभीरता से अमल की अपील करते हुए कहा कि संसद और विधानमंडलों की कार्यवाही साल में कम से कम 100 दिन के निर्धारित कैलेंडर और स्पष्ट नियमों के अनुसार चलनी चाहिए।
हंगामे से घट रही कार्यवाही की गुणवत्ता
बसपा प्रमुख के अनुसार, सत्रों के घटते समय के साथ-साथ व्यवधान बढ़ने से नीति निर्माण, जवाबदेही और जनहित के प्रश्न पीछे छूट रहे हैं। ऐसे में समयबद्ध और अनुशासित कार्यवाही ही समाधान है।
मदरसा फैसले का समर्थन
मायावती ने ‘सरकारी मान्यता न होना मदरसा बंद करने का आधार नहीं’ संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के फैसले का भी स्वागत किया। उन्होंने श्रावस्ती में मदरसे की सील 24 घंटे में हटाने के निर्देश को महत्वपूर्ण बताया।
प्रशासनिक मनमानी पर सख्ती की मांग
उन्होंने कहा कि निजी मदरसों के खिलाफ नीतिगत विरोध नहीं, बल्कि जिला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी से ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। सरकार को इस पर सख्ती करनी चाहिए।
हमारी राय
सत्रों के लिए तय कैलेंडर और अनुशासन लोकतंत्र को मजबूत करते हैं। साथ ही, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में न्यायिक स्पष्टता प्रशासनिक संतुलन के लिए जरूरी है।
