दक्षिणी दिल्ली में साफ पानी का संकट, सोशल मीडिया पर उठा जन आंदोलन
मध्य प्रदेश के इंदौर में हाल में सामने आई दूषित पानी से जुड़ी घटना ने एक बार फिर देशभर में साफ पेयजल के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। इसी कड़ी में राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में लंबे समय से बनी दूषित जलापूर्ति और सीवर ओवरफ्लो की समस्या पर भी सवाल उठने लगे हैं। खासतौर पर दक्षिणी दिल्ली के कई पाश और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
दैनिक जागरण द्वारा इस मुद्दे पर चलाए गए स्वच्छ सरोकार अभियान के बाद अब रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) भी खुलकर सामने आ गई हैं। वर्षों से विभागीय अनदेखी झेल रहे लोग अब सोशल मीडिया को माध्यम बनाकर सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं।
वर्षों पुरानी समस्या, नई पीढ़ी की आवाज
दक्षिणी दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, साकेत, गढ़ी, संत नगर, श्रीनिवासपुरी और ग्रेटर कैलाश जैसे इलाकों में सीवर ओवरफ्लो और दूषित पानी की समस्या कोई नई नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह संकट बीते एक दशक से लगातार बना हुआ है। सीवर लाइनों की जाम स्थिति के कारण गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है, जिससे न केवल दुर्गंध फैलती है, बल्कि पीने के पानी के दूषित होने का भी खतरा बना रहता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार दिल्ली जल बोर्ड, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग को शिकायतें दी गईं, निरीक्षण भी हुए, लेकिन समाधान कागजों तक ही सीमित रह गया।
सोशल मीडिया बना हथियार
अब आरडब्ल्यूए ने सोशल मीडिया को जन आंदोलन का रूप देना शुरू कर दिया है। एक्स (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल, जिला अधिकारी, दिल्ली जल बोर्ड और नगर निगम को टैग कर लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं। इसके साथ ही ई-मेल और पत्राचार के जरिए भी विभागों पर जवाबदेही तय करने का दबाव बनाया जा रहा है।
आरडब्ल्यूए सदस्यों का कहना है कि जब पारंपरिक शिकायत तंत्र से राहत नहीं मिली, तो डिजिटल माध्यम ही आखिरी रास्ता बचा है। इस अभियान में दैनिक जागरण में प्रकाशित खबरों को भी बड़े स्तर पर साझा किया जा रहा है, ताकि मुद्दा व्यापक जनसमर्थन हासिल कर सके।
10 साल से 15 हजार आबादी परेशान
ईस्ट ऑफ कैलाश क्षेत्र में राजा धीर सेन मार्ग, इस्कान मंदिर के पास बीते दस वर्षों से सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई है। मंदिर, स्कूल और आसपास की सोसाइटियों में आने-जाने वाले लोगों को रोजाना गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इस क्षेत्र से सी, डी और जी ब्लॉक के अलावा गढ़ी, संत नगर, श्रीनिवासपुरी और ग्रेटर कैलाश जाने वाले हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं।
आरडब्ल्यूए सदस्य पवन शर्मा के अनुसार करीब चार सोसाइटियों की लगभग 15 हजार आबादी इस समस्या से जूझ रही है। नगर निगम द्वारा जुर्माना लगाए जाने, जल मंत्री और सांसद द्वारा दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ को पत्र लिखे जाने और विभिन्न विभागों की टीमों के निरीक्षण के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।
न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में भी हालात खराब
न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के ए, बी, सी और डी ब्लॉक में बीते छह महीनों से सीवर ओवरफ्लो की गंभीर समस्या बनी हुई है। महारानी बाग की वह मुख्य सीवर लाइन, जो किलोकरी स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक जाती है, पूरी तरह जाम बताई जा रही है। इससे आसपास के इलाकों में लगातार गंदा पानी फैल रहा है।
न्यू फ्रेंड्स को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के कोषाध्यक्ष अरुण जग्गी का कहना है कि आरडब्ल्यूए, सिटीजन फोरम और अन्य संगठनों ने दर्जनों बार शिकायतें कीं। सांसद की ओर से भी दिल्ली जल बोर्ड को पत्र लिखा गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि करीब 50 साल पुरानी सीवर लाइनों को बदले बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है।
साकेत में सभी ब्लॉक प्रभावित
साकेत इलाके में भी हालात चिंताजनक हैं। यहां के सभी 12 ब्लॉकों में सीवर व्यवस्था चरमराई हुई है। स्थानीय आरडब्ल्यूए के अनुसार पांच दशक पहले डाली गई सीवर लाइनें अब बढ़ती आबादी का दबाव नहीं झेल पा रही हैं। नतीजतन, आए दिन ओवरफ्लो और जलभराव की स्थिति बनती है।
फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए साकेत के पूर्व अध्यक्ष राकेश डबास का कहना है कि सीवर और गंदे पानी की समस्या विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। बार-बार पत्र लिखने और सुझाव देने के बावजूद जब समाधान नहीं हुआ, तो सोशल मीडिया अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया।
समस्या की जड़ क्या है
विशेषज्ञों और स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार, दक्षिणी दिल्ली में सीवर संकट की मुख्य वजह पुरानी और जर्जर सीवर लाइनें हैं। कई इलाकों में 40 से 50 साल पहले बिछाई गई लाइनों पर आज कई गुना अधिक आबादी का बोझ है। इसके अलावा नियमित रखरखाव की कमी, समय पर डीसिल्टिंग न होना और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भी हालात को और बिगाड़ रही है।
आंकड़ों में संकट
ईस्ट ऑफ कैलाश में लगभग 15 हजार लोग प्रभावित हैं।
न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में करीब 5 हजार आबादी सीवर ओवरफ्लो से परेशान है।
साकेत के 12 ब्लॉकों में सीवरेज की गंभीर समस्या बनी हुई है।
प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल
साफ पानी और स्वच्छ वातावरण नागरिकों का मूल अधिकार है। बावजूद इसके, दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में लोग वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उठता यह जन आंदोलन न केवल स्थानीय समस्या को उजागर कर रहा है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
हमारी की राय में
दक्षिणी दिल्ली में दूषित पानी और सीवर ओवरफ्लो की समस्या अब केवल स्थानीय असुविधा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। आरडब्ल्यूए द्वारा सोशल मीडिया के जरिए उठाई जा रही आवाज यह दिखाती है कि जब संस्थागत शिकायत तंत्र विफल हो जाता है, तो जनता को नए रास्ते तलाशने पड़ते हैं। जरूरत इस बात की है कि सरकार और संबंधित विभाग तात्कालिक मरम्मत के बजाय दीर्घकालिक योजना के तहत पुरानी सीवर लाइनों को बदले और जल प्रबंधन को प्राथमिकता दें। तभी साफ पानी का अधिकार कागजों से निकलकर जमीन पर उतर सकेगा।
