राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ीं—हाई कोर्ट का अल्टीमेटम, "4 फरवरी तक करें सरेंडर", चेक बाउंस मामले में कोर्ट ने कहा "न्यायिक प्रक्रिया से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
नई दिल्ली/मुंबई, दिनांक: 3 फरवरी 2026 — अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और हंसाने वाले किरदारों के लिए मशहूर बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) की असल जिंदगी में एक गंभीर कानूनी संकट खड़ा हो गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने चेक बाउंस से जुड़े एक पुराने और लंबी अवधि से चल रहे मामले में अभिनेता के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राजपाल यादव को निर्देश दिया है कि वे 4 फरवरी को दोपहर 4 बजे तक संबंधित जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) करें। अदालत ने अभिनेता के व्यवहार को निंदनीय करार देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद भुगतान न करना न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करने जैसा है और इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
यह मामला दिल्ली स्थित कंपनी मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसने राजपाल यादव की कंपनी को फिल्म निर्माण के लिए एक बड़ी रकम उधार दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने तल्ख टिप्पणी की कि चेक बाउंस जैसे मामलों में भुगतान को लेकर अदालत को दिए गए वचनों (Undertakings) का उल्लंघन करना एक गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि राजपाल यादव को सुधरने और भुगतान करने के कई अवसर दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने कोर्ट का भरोसा तोड़ा है। अब कोर्ट के पास सख्ती बरतने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
इस विवाद की जड़ें साल 2010 में हैं, जब राजपाल यादव ने अभिनय से निर्देशन की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया था। उन्होंने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म 'अता-पता लापता' (Ata Pata Laapata) बनाने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। दुर्भाग्यवश, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी और आर्थिक रूप से असफल रही। इसके बाद कर्ज की रकम लौटाने में लगातार देरी होती गई और मामला कानूनी पचड़ों में फंस गया। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि रकम चुकाने के लिए राजपाल यादव की ओर से दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद उन्होंने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत केस दर्ज कराया।
इस केस का इतिहास काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कड़कड़डूमा कोर्ट में सुनवाई के दौरान राजपाल यादव को कई बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन वे लंबे समय तक अदालत में पेश नहीं हुए। इसकी परिणति यह हुई कि साल 2013 में उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और वे 3 से 6 दिसंबर 2013 तक चार दिन जेल में भी रहे थे। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उनकी अपील पर सजा को निलंबित कर दिया था। इसके बाद, निचली अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराते हुए छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा पर यह कहते हुए अस्थायी रोक लगा दी थी कि अभिनेता कोई आदतन अपराधी नहीं हैं और उनके मामले में सुधार और समाधान की गुंजाइश है। इसी आधार पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावनाएं तलाशने की सलाह दी थी और केस को मेडिएशन सेंटर (मध्यस्थता केंद्र) भेज दिया था।
मध्यस्थता के दौरान एक उम्मीद की किरण जगी थी जब राजपाल यादव ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वे शिकायतकर्ता कंपनी को कुल 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। समझौते के तहत, इसमें 40 लाख रुपये की पहली किश्त और 2.10 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त शामिल थी। लेकिन अदालत के अनुसार, तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद अभिनेता की ओर से एक भी किश्त जमा नहीं की गई। जब कोर्ट ने जवाब मांगा, तो अभिनेता की ओर से एक अजीबोगरीब तर्क दिया गया कि ड्राफ्ट में 'टाइपिंग की गलती' हो गई थी। जस्टिस शर्मा ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि गलती की जानकारी होने के बावजूद न तो रकम जमा की गई और न ही कोई औपचारिक स्पष्टीकरण दिया गया। यह अदालत को गुमराह करने की कोशिश है।
जनवरी 2026 में कोर्ट ने राजपाल यादव को भुगतान के लिए एक 'अंतिम मौका' दिया था, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में बार-बार किए गए वादों का उल्लंघन बेहद गंभीर है। कोर्ट ने अभिनेता के वकील के अनुरोध पर उन्हें 4 फरवरी तक की मोहलत दी है, क्योंकि बताया गया कि वे मुंबई में अपने पेशेवर काम (Shooting) में व्यस्त हैं। इसके साथ ही, अदालत ने पहले से जमा रकम को शिकायतकर्ता कंपनी को जारी करने का आदेश भी दिया है, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी, जिसमें जेल अधीक्षक से राजपाल यादव के सरेंडर की अनुपालन रिपोर्ट मांगी जाएगी।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
राजपाल यादव का मामला यह साबित करता है कि कानून की नजर में 'सेलिब्रिटी स्टेटस' कोई मायने नहीं रखता। 5 करोड़ का कर्ज और 15 साल की कानूनी लड़ाई ने एक प्रतिभाशाली अभिनेता के करियर को भी प्रभावित किया है। बार-बार कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करना या भुगतान के वादे से मुकरना किसी भी वादी के लिए महंगा पड़ सकता है।
The Trending People का विश्लेषण है कि अगर 4 फरवरी को सरेंडर होता है, तो यह राजपाल यादव की छवि के लिए बड़ा झटका होगा। यह मामला फिल्म इंडस्ट्री में वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) की कमी को भी उजागर करता है, जहां प्रोजेक्ट्स फेल होने पर कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, कोर्ट ने अभी भी सुधार की गुंजाइश छोड़ी है, लेकिन अब गेंद पूरी तरह से राजपाल यादव के पाले में है कि वे जेल जाते हैं या अंतिम समय में कोई सेटलमेंट कर पाते हैं।
