PAN Card Rule 2026: पोस्ट ऑफिस में लेनदेन के लिए PAN अनिवार्य, नियम सख्त
भारतीय डाक विभाग ने वित्तीय लेनदेन को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया है। Department of Posts India के नए निर्देशों के तहत अब पोस्ट ऑफिस में होने वाले कई अहम कामों के लिए PAN देना अनिवार्य होगा। यह बदलाव आयकर नियम 2026 और SB आदेश संख्या 02/2026 के तहत लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना और निगरानी को मजबूत करना है।
अब नया खाता खोलने, बड़ी नकद राशि जमा या निकालने और टाइम डिपॉजिट (TD) में निवेश करने जैसे प्रमुख लेनदेन बिना PAN के संभव नहीं होंगे। जिन ग्राहकों के पास PAN नहीं है, उन्हें ‘फॉर्म 97’ भरना होगा, जिसमें पूरी व्यक्तिगत जानकारी, लेनदेन का विवरण और संबंधित दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया के बिना कोई भी वित्तीय कार्य आगे नहीं बढ़ेगा।
एक और बड़ा बदलाव ब्याज पर टैक्स छूट से जुड़ा है। अब तक इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 15G और 15H को हटाकर नया ‘फॉर्म 121’ लागू किया गया है। यह फॉर्म उन लोगों के लिए जरूरी होगा जो अपनी आय को टैक्स के दायरे से बाहर मानते हैं और टीडीएस से बचना चाहते हैं। इसे हर वित्तीय वर्ष में जमा करना अनिवार्य होगा। हालांकि, जब तक सिस्टम पूरी तरह अपडेट नहीं होता, तब तक पुरानी व्यवस्था भी सीमित रूप से जारी रह सकती है।
नए नियमों के साथ पोस्ट ऑफिस की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। विभाग को अब ग्राहकों द्वारा जमा किए गए फॉर्म 121 का रिकॉर्ड कम से कम 7 वर्षों तक सुरक्षित रखना होगा। साथ ही, दस्तावेजों के सत्यापन और डेटा सुरक्षा को लेकर भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव काले धन पर लगाम और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में जरूरी कदम हैं, लेकिन इससे छोटे निवेशकों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शुरुआती दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर जहां PAN और डिजिटल प्रक्रियाओं की पहुंच सीमित है।
पोस्ट ऑफिस से जुड़े नए PAN नियम पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी को मजबूत करने के लिहाज से जरूरी हैं, लेकिन इनका प्रभाव हर वर्ग पर समान नहीं होगा। शहरी क्षेत्रों में यह बदलाव आसानी से लागू हो सकते हैं, जबकि ग्रामीण और कम जागरूक उपभोक्ताओं के लिए यह प्रक्रिया जटिल बन सकती है। सरकार और डाक विभाग को चाहिए कि इन नियमों के साथ-साथ जागरूकता अभियान और आसान सहायता व्यवस्था भी सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी व्यक्ति केवल प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण सेवाओं से वंचित न रह जाए।
