ड्राइवर के बेटे से विधायक तक: सबरीनाथन की जीत ने तमिलनाडु राजनीति में मचाया हलचल
तमिलनाडु की राजनीति में इस बार एक ऐसा परिणाम सामने आया है, जिसने पारंपरिक समीकरणों को झटका दिया है। R. Sabarinathan ने विरुगंबक्कम सीट से बड़ी जीत दर्ज करते हुए मौजूदा विधायक A. M. V. Prabhakar Raja को 27,000 से अधिक वोटों से हरा दिया। उनकी पृष्ठभूमि भी चर्चा में है—वह अभिनेता-राजनेता Vijay (थलपति विजय) के निजी ड्राइवर के बेटे बताए जा रहे हैं, जिससे इस जीत को “ग्राउंड-लेवल उभार” के रूप में देखा जा रहा है।
इस जीत के साथ सबरीनाथन अब तमिलनाडु विधानसभा के सदस्य बन गए हैं। विधायक के तौर पर उन्हें करीब 1.05 लाख रुपये मासिक वेतन मिलेगा, जो 2017 के वेतन संशोधन के बाद लागू है। सबरीनाथन ने अपनी जीत को “जनता के भरोसे” और “बदलाव की मांग” का नतीजा बताया है।
राज्यभर में Tamilaga Vetri Kazhagam (TVK) के प्रदर्शन ने भी राजनीतिक तस्वीर बदली है। 234 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी ने 100 से अधिक सीटें जीतकर खुद को प्रमुख दावेदार के रूप में स्थापित किया है। बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, ऐसे में सरकार गठन के लिए संभावित समर्थन समीकरणों पर नजर टिकी है।
खुद विजय ने पेरंबूर सीट से 50,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है, जिससे पार्टी कैडर में उत्साह है। समर्थकों का मानना है कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में मजबूत दावेदार बन सकते हैं। वहीं, चौंकाने वाले परिणामों में M. K. Stalin का कोलाथुर सीट से हारना भी शामिल है, जहां उन्हें TVK के V. S. Babu ने करीब 9,000 वोटों से मात दी। इस नतीजे ने Dravida Munnetra Kazhagam और उसके सहयोगियों के प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबरीनाथन की जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में बदलते रुझानों का संकेत है। गैर-परंपरागत पृष्ठभूमि से आए उम्मीदवार का इतनी बड़ी जीत हासिल करना बताता है कि मतदाता अब स्थापित चेहरों से आगे बढ़कर नए विकल्पों को मौका दे रहे हैं। हालांकि TVK का प्रदर्शन प्रभावशाली है, लेकिन बहुमत से दूर रहने के कारण असली चुनौती अब स्थिर सरकार बनाने की होगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह लहर स्थायी राजनीतिक बदलाव में बदलती है या केवल एक चुनावी उछाल तक सीमित रहती है।
