धर्म डेस्क: 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण
3 मार्च 2026 को वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। परंपरागत मान्यता के अनुसार ग्रहण लगते ही देश के अधिकांश मंदिरों में पूजा-पाठ रोक दिया जाता है और कपाट बंद कर दिए जाते हैं। धार्मिक विश्वास है कि ग्रहण के दौरान वातावरण अशुद्ध हो जाता है, इसलिए भगवान की मूर्तियों को ढक दिया जाता है और नियमित अनुष्ठान स्थगित कर दिए जाते हैं।
हालांकि भारत में कुछ ऐसे प्रसिद्ध मंदिर भी हैं, जहां ग्रहण के दौरान भी पूजा-अर्चना, आरती और दर्शन की परंपरा निरंतर जारी रहती है। आइए जानते हैं इन विशेष मंदिरों के बारे में।
Mahakaleshwar Temple
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां मान्यता है कि महाकाल स्वयं काल के स्वामी हैं। जब समय और मृत्यु भी उनके अधीन हैं, तो ग्रहण जैसी खगोलीय घटना उन पर प्रभाव नहीं डाल सकती।
इसी कारण ग्रहण के दौरान भी मंदिर के कपाट खुले रहते हैं और श्रद्धालु निर्बाध रूप से दर्शन कर सकते हैं।



Kalkaji Temple
राजधानी दिल्ली का कालकाजी मंदिर भी उन चुनिंदा मंदिरों में शामिल है जहां ग्रहण के समय कपाट बंद नहीं किए जाते। मान्यता है कि मां कालका कालचक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं और ग्रह-नक्षत्र उनके नियंत्रण में हैं।
ग्रहण के समय यहां पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है, इसलिए इस दौरान भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।




Kalpeshwar Temple
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित कल्पेश्वर मंदिर पंच केदारों में से एक है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव ने मां गंगा की धारा को नियंत्रित किया था। इस विशेष आध्यात्मिक महत्व के कारण यहां ग्रहण को अशुभ नहीं माना जाता।
ग्रहण के दौरान भी यहां नियमित पूजा-पाठ जारी रहता है।


Thiruvaarppu Sree Krishna Temple
केरल के कोट्टायम में स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान श्रीकृष्ण को दिन में दस बार भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि भगवान को अधिक भूख लगती है, इसलिए मंदिर के दरवाजे लंबे समय तक बंद नहीं रखे जा सकते।
इसी कारण ग्रहण के दौरान भी यहां पूजा और भोग की परंपरा जारी रहती है।

Vishnupad Temple
बिहार के गया स्थित विष्णुपद मंदिर पिंडदान के लिए विश्व प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के समय पितरों के निमित्त किए गए अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है।
इसी वजह से यहां ग्रहण के दौरान कपाट बंद नहीं किए जाते और श्रद्धालु विशेष पूजा करते हैं।



Laxminath Temple
राजस्थान के बीकानेर स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर की परंपरा एक रोचक कथा से जुड़ी है। मान्यता है कि एक बार ग्रहण के दौरान भगवान को भोग नहीं लगाया गया, जिसके बाद सपने में भगवान ने अपनी भूख का संकेत दिया।
तभी से परंपरा है कि ग्रहण के समय भी मंदिर के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे और नियमित रूप से भोग लगाया जाएगा।
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जहां अधिकांश मंदिरों में ग्रहण को अशुभ मानते हुए कपाट बंद कर दिए जाते हैं, वहीं देश के कुछ प्रमुख मंदिर अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक परंपराओं के कारण इस नियम से अलग हैं।
3 मार्च 2026 के पूर्ण चंद्र ग्रहण के अवसर पर इन मंदिरों में विशेष धार्मिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर आध्यात्मिक अनुभव और आस्था को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।