वे चाहते हैं मैं छोड़ दूं, पर मैं डटी रहूंगी"—पायल राजपूत ने खोली इंडस्ट्री की पोल, नेपोटिज्म के 'विशेषाधिकार' पर भारी पड़ी 12 साल की मेहनत
हैदराबाद/चेन्नई, दिनांक: 3 फरवरी 2026 — चमक-दमक से भरी फिल्म इंडस्ट्री दूर से जितनी सुहानी लगती है, पास जाने पर उसकी खामोश सच्चाइयां उतनी ही कड़वी नजर आती हैं। साउथ फिल्म इंडस्ट्री की उभरती हुई और प्रतिभावान अभिनेत्री पायल राजपूत (Payal Rajput) ने हाल ही में अपने दिल का गुबार निकालते हुए सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट साझा किया है, जिसने इंडस्ट्री के भीतरी काले सच को उजागर कर दिया है। अपनी मेहनत और संघर्ष की कहानी बयां करते हुए पायल ने उन ताकतों को खुली चुनौती दी है जो उन्हें इंडस्ट्री से बाहर करने की कोशिश कर रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए उनके एक भावनात्मक लेकिन दृढ़ पोस्ट ने उनके फैंस और सिनेप्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। पायल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे झुकने वाली नहीं हैं और न ही हार मानने वाली हैं।
पायल ने अपने पोस्ट में बिना किसी लाग-लपेट के स्वीकार किया कि इंडस्ट्री के भीतर कुछ प्रभावशाली लोग और लॉबी उन्हें एक्टिंग छोड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यह बयान इशारा करता है कि एक 'आउटसाइडर' (बाहरी व्यक्ति) के लिए अपनी जगह बनाए रखना कितना मुश्किल है। पायल ने लिखा कि वे चाहते हैं कि मैं छोड़ दूं, और कई बार हताशा के पलों में मैं खुद से सवाल करती हूं कि क्या मुझे ऐसा करना चाहिए? क्या यह लड़ाई लड़ने लायक है? लेकिन फिर मेरा ध्यान पिछले 12 सालों में की गई मेरी कड़ी मेहनत और संघर्ष की ओर जाता है। उन रातों की ओर जाता है जब मैंने सपने देखे थे। इसलिए मैं खुद से कहती हूं—नहीं, मैं फेल हो सकती हूं, गिर सकती हूं, लेकिन हार नहीं मानूंगी। यह जज्बा उस अभिनेत्री का है जिसने अपनी पहचान अपने दम पर बनाई है, किसी गॉडफादर के सहारे नहीं।
नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) और फेवरेटिज्म जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर पायल राजपूत अक्सर अपनी बेबाक राय रखती रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री में व्याप्त असमानता पर खुलकर बात की थी। उनका मानना है कि एक्टर बनना दुनिया के सबसे मुश्किल करियर विकल्पों में से एक है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है। यहां हर दिन अनिश्चितता (Uncertainty) के साथ शुरू होता है। पायल ने लिखा था कि इंडस्ट्री में अक्सर टैलेंट से ज्यादा 'विशेषाधिकार' (Privilege) और 'कनेक्शन' हावी हो जाते हैं। कई बार उन्हें शक होता है कि उनकी मेहनत और लगन इस चकाचौंध वाली दुनिया में नोटिस भी होगी या नहीं, क्योंकि बड़े मौके अक्सर मशहूर सरनेम वाले स्टार किड्स या पावरफुल एजेंट वाले लोगों की झोली में चले जाते हैं। लेकिन इन तमाम बाधाओं के बावजूद, उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और अपनी प्रतिभा पर भरोसा रखा।
काम के मोर्चे पर बात करें तो पायल राजपूत के पास फिलहाल कई दिलचस्प प्रोजेक्ट्स हैं जो उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। वे जल्द ही तेलुगू फिल्म 'वेंकटलक्ष्मी' (Venkatalakshmi) में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म का निर्माण मशहूर डायरेक्टर मुनि कर रहे हैं। मेकर्स की योजना इसे तेलुगू, तमिल और हिंदी भाषाओं में एक साथ रिलीज करने की है, जिससे पायल की पहुंच पैन-इंडिया स्तर पर बढ़ेगी। इसके अलावा, पायल के पास एक और बड़ी तमिल फिल्म है, जो अभी अनटाइटल्ड है। यह एक बड़े बजट का प्रोजेक्ट है जिसे साउथ के जाने-माने निर्देशक आर.एस. दुरई सेंथिलकुमार डायरेक्ट कर रहे हैं। इस फिल्म की शूटिंग का पहला फेज चेन्नई में पूरा हो चुका है। जानकारी के अनुसार, यह फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित एक रोमांचक एक्शन-ड्रामा है, जिसमें पायल का किरदार काफी दमदार बताया जा रहा है। फिल्म का संगीत जिब्रान दे रहे हैं, सिनेमैटोग्राफी एस. वेंकटेश की है और आर्ट डायरेक्शन दुरईराज संभाल रहे हैं।
पायल राजपूत का यह पोस्ट महज एक अपडेट नहीं, बल्कि इंडस्ट्री के उस 'अदृश्य दीवार' के खिलाफ एक हुंकार है जो बाहरी कलाकारों को रोकती है। 12 साल का सफर छोटा नहीं होता और इतने समय तक टिके रहना ही उनकी सबसे बड़ी जीत है।
The Trending People का विश्लेषण है कि नेपोटिज्म पर बहस पुरानी है, लेकिन जब कोई कलाकार अपने करियर के बीच में इसे उठाता है, तो यह जोखिम भरा होता है। पायल ने यह जोखिम उठाया है क्योंकि उन्हें अपनी कला पर भरोसा है। 'वेंकटलक्ष्मी' और दुरई सेंथिलकुमार की फिल्म उनके करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। अगर टैलेंट को मौका मिला, तो पायल जैसी अभिनेत्रियां यह साबित कर देंगी कि सिनेमा किसी की जागीर नहीं, बल्कि प्रतिभा का मंच है। उनका यह जज्बा उन हजारों स्ट्रगलर्स के लिए प्रेरणा है जो मुंबई या हैदराबाद की सड़कों पर अपनी आंखों में सपने लिए घूम रहे हैं।