Sonam Wangchuk NSA Detention: जोधपुर जेल में 100 दिन पूरे, सुप्रीम कोर्ट में 7 जनवरी को सुनवाई
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जोधपुर जेल में हिरासत के 100 दिन से अधिक पूरे कर लिए हैं। उन्हें 26 सितंबर को उस समय हिरासत में लिया गया था, जब लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण की मांग को लेकर किया गया एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इस घटना में चार लोगों की गोली लगने से मौत हुई थी और करीब 90 लोग घायल हुए थे।
इस मामले में आखिरी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 8 दिसंबर को हुई थी। अगली सुनवाई 15 दिसंबर को तय थी, लेकिन समयाभाव के कारण वह नहीं हो सकी। अब वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई 7 जनवरी को सूचीबद्ध की गई है।
गीतांजलि आंगमो ने कहा कि यह समय उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से फैसले में हो रही देरी से सोनम की हिरासत लगातार लंबी होती जा रही है। उनके मुताबिक, कानून के तहत अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने हो सकती है, लेकिन सरकार को इतना समय लेने की जरूरत नहीं थी।
आंगमो ने यह भी बताया कि उन्हें कई एजेंसियों—आयकर विभाग, ईडी और जीएसटी—की पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है, साथ ही वह दूर से हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) का मार्गदर्शन भी कर रही हैं।
वांगचुक के वकील मुस्तफा हाजी ने सवाल उठाया कि उनका अपराध क्या है—सरकार को उसके ही वादों की याद दिलाना। इस बीच एपेक्स बॉडी लेह और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस ने केंद्र सरकार से बातचीत की शर्त के रूप में वांगचुक की रिहाई की मांग की है।
हमारी राय
सोनम वांगचुक का मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक अधिकारों और संवाद के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। शांतिपूर्ण मांगों को लंबे समय तक हिरासत से जवाब देना संवेदनशील क्षेत्रों में असंतोष बढ़ा सकता है। समाधान टकराव में नहीं, बल्कि बातचीत और भरोसे में ही निकलता है।
