डिजिटल डकैती'—मशहूर रबड़ कारोबारी का फोन हैक, व्हाट्सएप पर फैलाया जाल और दोस्तों को लगा दिया 1.15 लाख का चूना
जालंधर (पंजाब), दिनांक: 14 जनवरी 2026 — पंजाब के औद्योगिक शहर जालंधर (Jalandhar) में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक ऐसा दुस्साहसिक कारनामा अंजाम दिया है, जिसने शहर के व्यापारिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। इस बार उनका शिकार कोई आम आदमी नहीं, बल्कि देश-विदेश में अपनी पहचान रखने वाले शहर के प्रसिद्ध रबड़ कारोबारी राजेश मेहंदीरत्ता उर्फ कुकू (Rajesh Mehandiratta) बने हैं। हैकर्स ने बड़ी चालाकी से उनका मोबाइल फोन हैक किया और उनके भरोसेमंद दोस्तों को विश्वास में लेकर 1 लाख 15 हजार रुपये की चपत लगा दी।
यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि इसमें ठगों ने तकनीक (हैकिंग) और मनोविज्ञान (Psychology) का खतरनाक मिश्रण इस्तेमाल किया। 'सिक्सर बॉल्स' (Sixer Balls) के नाम से मशहूर ग्रेटवे इंडिया कार्पोरेशन के पार्टनर राजेश मेहंदीरत्ता की साख का फायदा उठाते हुए ठगों ने उनके करीबी दोस्तों को निशाना बनाया।
कैसे बिछाया गया ठगी का जाल?
वारदात का तरीका बेहद शातिर था। जानकारी के अनुसार, हैकर्स ने सबसे पहले राजेश मेहंदीरत्ता का मोबाइल फोन हैक कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया।
व्हाट्सएप हाइजैक: फोन हैक होते ही ठगों ने उनके व्हाट्सएप अकाउंट (WhatsApp Account) से कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद सभी रिश्तेदारों, मित्रों और व्यापारिक संपर्कों को संदेश भेजना शुरू कर दिया।
इमरजेंसी का बहाना: संदेशों में एक ही स्क्रिप्ट थी— "मुझे 65,000 रुपये की सख्त और तुरंत जरूरत है। कृप्या यूपीआई (UPI) कर दें, रात तक पूरी रकम वापस लौटा दूंगा।"
चूंकि संदेश राजेश मेहंदीरत्ता के अपने नंबर से आ रहे थे और उनकी बाजार में अच्छी साख है, इसलिए किसी को भी शुरुआत में शक नहीं हुआ।
विश्वास का कत्ल: दो दोस्त फंसे जाल में
हालांकि अधिकांश करीबियों ने सतर्कता बरती और पैसे भेजने से पहले स्थिति को भांप लिया, लेकिन दो करीबी दोस्त ठगों के झांसे में आ गए।
- रबड़ कारोबारी: एक मित्र ने विश्वास करते हुए दो किस्तों में कुल 65,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
- लोहा कारोबारी: दूसरे मित्र ने 50,000 रुपये यूपीआई के माध्यम से उन अनजान खातों में भेज दिए, जो साइबर ठगों ने बताए थे।
कुल मिलाकर, कुछ ही मिनटों में ठगों ने 1.15 लाख रुपये उड़ा लिए।
फोन रिकवर हुआ तो खुला राज
कुछ समय बाद जब राजेश मेहंदीरत्ता का फोन रिकवर हुआ और उन्हें भनक लगी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मेहंदीरत्ता ब्रदर्स ने तुरंत डैमेज कंट्रोल करते हुए सभी परिचितों को अपनी ओर से स्पष्ट संदेश भेजा और बताया कि उनका फोन हैक हो गया था और किसी भी तरह के पैसों की मांग पर ध्यान न दें। इस त्वरित कार्रवाई से ठगी का सिलसिला रुक पाया और कई अन्य लोग संभावित नुकसान से बच गए। पीड़ित पक्ष अब साइबर क्राइम सेल (Cyber Crime Cell) में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
शहर के प्रबुद्ध नागरिकों में आक्रोश: "बैंक खातों की जांच हो"
इस घटना ने शहर के प्रतिष्ठित नागरिकों और व्यापारियों को झकझोर दिया है।
- अमरजीत आहूजा: उन्होंने मांग की कि जिन बैंक खातों में ठगी की रकम गई है, उनकी तुरंत गहन जांच (Audit) की जाए। पैसा कहां गया, यह पता लगाना मुश्किल नहीं होना चाहिए।
- जसबीर सिंह बिट्टू: उन्होंने तर्क दिया कि आज हर बैंक खाता आधार और पैन से लिंक है। "ऐसे में ठगों तक पहुंचना रॉकेट साइंस नहीं है, बस प्रशासन को इच्छाशक्ति दिखानी होगी। अगर समय रहते कार्रवाई हो, तो बड़े गिरोह पकड़े जा सकते हैं," बिट्टू ने कहा।
"बैंकों की भी तय हो जिम्मेदारी"
जिमखाना क्लब के एग्जीक्यूटिव सदस्य नितिन बहल ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में बैंकों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
- फ्रॉड मॉनिटरिंग: जिन खातों में अचानक संदिग्ध और बार-बार बड़ी राशि की ट्रांजेक्शन होती है, उन्हें तुरंत फ्रीज कर जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए। इससे डिजिटल लेन-देन पर आम आदमी का भरोसा बना रहेगा।
- अतुल चावला की अपील: गारमेंट कारोबारी अतुल चावला ने जनता से अपील की, "चाहे संदेश किसी भी करीबी का क्यों न हो, बिना फोन पर बात किए और आवाज सुने एक भी रुपया ट्रांसफर न करें। डिजिटल दुनिया में 'आंखें मूंदकर भरोसा' करना सबसे बड़ी गलती है।"
हमारी राय (The Trending People Analysis)
जालंधर की यह घटना एक 'केस स्टडी' है कि कैसे साइबर अपराधी हमारी डिजिटल पहचान (Digital Identity) को हथियार बना रहे हैं। फोन हैक होना केवल डेटा चोरी नहीं, बल्कि आपकी सामाजिक साख (Social Reputation) पर हमला है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 'टू-स्टेप वेरिफिकेशन' (Two-Step Verification) जैसे सुरक्षा फीचर्स को इग्नोर करना भारी पड़ सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वे न केवल ठगों को पकड़ें बल्कि उन 'मूल खातों' (Mule Accounts) पर भी कार्रवाई करें जिनका इस्तेमाल पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। आम जनता के लिए सबक साफ है—पैसों के मामले में डिजिटल संदेश पर नहीं, बल्कि 'वॉयस कॉल' पर भरोसा करें।
