बिहार में 2500 से अधिक पंचायत सरकार भवनों के निर्माण खर्च का हिसाब तलब, अभियंताओं को 24 घंटे का अल्टीमेटम
राज्य सरकार ने बिहार में ग्रामीण प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुके पंचायत सरकार भवनों के खर्च को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। राज्यभर में ढाई हजार से अधिक पंचायत सरकार भवनों के निर्माण पर हुए खर्च का अब विस्तृत लेखा-जोखा मांगा गया है। इस संबंध में भवन निर्माण विभाग ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर उपयोगिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराएं।
वित्तीय पारदर्शिता पर सरकार का जोर
सूत्रों के अनुसार पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में बड़ी धनराशि आवंटित की गई है। इन भवनों का उद्देश्य पंचायत स्तर पर प्रशासनिक गतिविधियों को एक ही परिसर में संचालित करना और ग्रामीण जनता को सरकारी सेवाएं सरलता से उपलब्ध कराना है। सरकार चाहती है कि इन परियोजनाओं में खर्च की गई प्रत्येक राशि का स्पष्ट और प्रमाणित रिकॉर्ड मौजूद हो।
अलग-अलग चरणों में चल रहा निर्माण कार्य
वर्तमान में बिहार के विभिन्न जिलों में पंचायत सरकार भवनों का निर्माण अलग-अलग चरणों में जारी है। कई स्थानों पर भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि कुछ जिलों में कार्य प्रगति पर है। इसी क्रम में पंचायती राज विभाग ने भवन निर्माण विभाग से अब तक जारी की गई राशि के विरुद्ध किए गए खर्च का पूरा विवरण मांगा है।
अपर सचिव के सख्त निर्देश
इस मामले में सरकार के अपर सचिव राजेश कुमार सिंह की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आवंटित राशि के अनुरूप उपयोगिता प्रमाण-पत्र विहित प्रपत्र में और सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ प्रस्तुत किए जाएं। इसके लिए अभियंताओं को महज 24 घंटे का समय दिया गया है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है।
समय पर जवाब नहीं देने पर कार्रवाई के संकेत
सरकारी सूत्रों का कहना है कि समयसीमा के भीतर उपयोगिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। सरकार इस कदम के जरिए न केवल निर्माण कार्यों की वास्तविक प्रगति जानना चाहती है, बल्कि वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही भी सुनिश्चित करना चाहती है।
ग्रामीण शासन को सशक्त करने की बड़ी योजना
पंचायत सरकार भवनों को ग्रामीण शासन की रीढ़ माना जा रहा है। इन भवनों के माध्यम से पंचायत कार्यालय, जनसेवा केंद्र और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि निर्माण गुणवत्ता और वित्तीय प्रबंधन दोनों स्तरों पर किसी भी तरह की लापरवाही न हो।
हमारी राय
पंचायत सरकार भवनों के खर्च का हिसाब तलब करना एक सकारात्मक कदम है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं पर जनता का भरोसा भी मजबूत होगा। समय पर और सटीक जवाबदेही से ही ग्रामीण प्रशासन को वास्तव में सशक्त बनाया जा सकता है।
