संसद सत्र 2026: पीएम मोदी का विपक्ष पर प्रहार और वित्त मंत्री का आर्थिक रोडमैप – एक विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण
संसद का बजट सत्र 2026 राजनीतिक गहमागहमी के केंद्र में है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष पर तीखा हमला बोला, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतों में गिरावट और बजट में सुरक्षा लेनदेन कर (STT) बढ़ाने के फैसलों का बचाव किया। जहाँ विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर अपना विरोध दर्ज कराया, वहीं सरकार ने भारत की उभरती 'विश्व बंधु' की छवि और आर्थिक सामर्थ्य पर जोर दिया।
राज्यसभा में पीएम मोदी का संबोधन: 'विश्व बंधु' छवि और विपक्ष का विरोध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत से ही विपक्ष के कड़े विरोध का सामना किया। जब विपक्षी सांसदों ने "तानाशाही नहीं चलेगी" के नारे लगाए, तो पीएम ने तंज कसते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से कहा कि वे "उम्र का ध्यान रखते हुए बैठकर नारेबाजी करें" ताकि उन्हें असुविधा न हो।
संबोधन के मुख्य बिंदु:
- विपक्ष का वॉकआउट: विपक्ष के वॉकआउट पर पीएम ने कहा कि जो लोग थककर चले गए, उन्हें जवाब देना होगा कि उन्होंने देश की क्या हालत बना रखी थी।
- आर्थिक सामर्थ्य और वैश्विक साख: पीएम ने स्पष्ट किया कि विश्व आज भारत के साथ समझौते करने के लिए आगे आ रहा है क्योंकि देश में मजबूत आर्थिक तंत्र और ऊर्जा है। उन्होंने कहा, "आज चाहे अंतरिक्ष हो, विज्ञान हो या खेल, भारत हर क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।"
- विश्वस्त भागीदार: पीएम ने भारत को 'विश्व मित्र' और 'विश्व बंधु' के रूप में परिभाषित किया, जो कोविड के बाद की अस्थिर दुनिया में एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है।
वित्त मंत्री का आर्थिक स्पष्टीकरण: सोना और STT
उसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'पीटीआई' के साथ बातचीत में बाजार की हालिया हलचल पर महत्वपूर्ण तथ्य रखे:
- सोने की कीमतों में अस्थिरता: सोमवार को MCX पर सोना करीब ₹1,47,475 प्रति 10 ग्राम पर रहा, जो रिकॉर्ड स्तर ₹1,70,480 से 13% नीचे है। वित्त मंत्री के अनुसार, यह गिरावट वैश्विक अनिश्चितता का परिणाम है जहाँ निवेशक किसी भी मुद्रा को पूरी तरह सुरक्षित नहीं मान रहे हैं।
- STT (Security Transaction Tax) में वृद्धि: बजट 2026 में फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% किया गया है। इसका उद्देश्य बाजार में सट्टेबाजी को कम करना और छोटे निवेशकों को सुरक्षित रखना है।
राजनीतिक और कानूनी पृष्ठभूमि
यह संपूर्ण घटनाक्रम वित्त विधेयक (Finance Bill) 2026 और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान घटित हो रहा है। कानूनी रूप से, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स एक्ट, 2004 में संशोधन और विनिवेश के लक्ष्यों को लेकर सरकार की रणनीति स्पष्ट है। राजनीतिक रूप से, सत्ता पक्ष भारत के वैश्विक उत्थान (जैसे स्पेस और साइंस में प्रगति) को अपनी उपलब्धि बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरा और मध्यम वर्ग पर कर का बोझ बताकर विरोध कर रहा है।
प्रभाव और प्रतिक्रिया
राजनीतिक प्रभाव:
- विपक्ष की एकजुटता: नारेबाजी और वॉकआउट यह दर्शाता है कि विपक्ष सरकार को घेरने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
- पीएम का कड़ा संदेश: पीएम मोदी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि विपक्ष रचनात्मक चर्चा के बजाय भागने का रास्ता चुन रहा है।
आर्थिक प्रभाव:
निवेशकों का रुख: सोने में गिरावट और STT में बढ़ोतरी से शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट के शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स पर दबाव बढ़ेगा, हालांकि सरकार इसे दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जरूरी मान रही है।
Our Final Thoughts (हमारा निष्कर्ष)
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि सरकार और विपक्ष के बीच की खाई और गहरी हुई है। जहाँ प्रधानमंत्री मोदी भारत को एक वैश्विक महाशक्ति (Global Power) और 'विश्व बंधु' के रूप में स्थापित करने का विजन पेश कर रहे हैं, वहीं विपक्ष का वॉकआउट संसदीय संवाद की कमी को दर्शाता है।
आर्थिक मोर्चे पर, वित्त मंत्री का सोने और STT पर दिया गया बयान यह संकेत है कि सरकार 'राजकोषीय अनुशासन' (Fiscal Discipline) के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहती। ₹1,70,000 के पार गया सोना अब ₹1,47,000 के करीब है, जो मध्यम वर्ग की बचत के मूल्य को प्रभावित कर सकता है। वहीं, डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर कर बढ़ाना एक साहसी कदम है, लेकिन इसे सट्टेबाजी बनाम निवेश की बहस के रूप में देखा जाना चाहिए। अंततः, भारत की प्रगति तभी समावेशी होगी जब सदन में सार्थक चर्चा हो और आर्थिक नीतियां मध्यम वर्ग की सुरक्षा और राष्ट्र के विकास के बीच संतुलन बनाने में सफल हों।
