दुनिया को बचाने का '100 अरब डॉलर' वाला फॉर्मूला—WEF की चेतावनी, स्वच्छ ईंधन में निवेश 4 गुना नहीं बढ़ा तो 2030 के लक्ष्य रह जाएंगे अधूरे
नई दिल्ली/दावोस, दिनांक: 16 जनवरी 2026— जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की विभीषिका से जूझ रही दुनिया के सामने एक नई और बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। अगर हमें धरती को रहने लायक बनाए रखना है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, तो केवल वादों से काम नहीं चलेगा, बल्कि भारी-भरकम निवेश की जरूरत होगी। स्विट्जरलैंड के दावोस (Davos) में अगले हफ्ते शुरू होने वाली विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक से ठीक पहले जारी एक अध्ययन रिपोर्ट ने वैश्विक नेताओं और उद्योगपतियों के कान खड़े कर दिए हैं।
बृहस्पतिवार को जारी इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि स्वच्छ ईंधन (Clean Fuel) से जुड़े वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए वर्ष 2030 तक निवेश की रफ्तार को मौजूदा स्तर से चार गुना बढ़ाकर सालाना 100 अरब डॉलर (100 Billion USD) तक ले जाने की तत्काल आवश्यकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो नेट-जीरो (Net Zero) का सपना केवल सपना बनकर रह जाएगा।
निवेश का 'गैप': 25 अरब से 100 अरब डॉलर का सफर
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया अभी स्वच्छ ऊर्जा को लेकर कितनी सुस्त है।
- मौजूदा स्थिति: इस समय दुनिया भर में स्वच्छ ईंधन क्षेत्र में सालाना करीब 25 अरब डॉलर का निवेश हो रहा है।
- जरूरत: लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इसे 2030 तक कम से कम 100 अरब डॉलर सालाना करना होगा।
- अनुपात: चिंताजनक बात यह है कि अभी स्वच्छ ईंधन में निवेश का अनुपात कुल स्वच्छ ऊर्जा निवेश (जैसे सोलर, विंड) के एक प्रतिशत से थोड़ा ही अधिक है। यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, "स्वच्छ ईंधन के लिए संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन बड़े लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए हकीकत को समझते हुए ठोस और निवेश-योग्य परियोजनाएं (Bankable Projects) बनानी होंगी।"
नौकरियां और अर्थव्यवस्था: क्लीन फ्यूल है 'गेमचेंजर'
यह रिपोर्ट केवल पर्यावरण बचाने की बात नहीं करती, बल्कि यह आर्थिक मुनाफे का भी सौदा है। डब्ल्यूईएफ का दावा है कि स्वच्छ ईंधन ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
रोजगार का गणित: रिपोर्ट के मुताबिक, पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की तुलना में स्वच्छ ईंधन क्षेत्र दो से तीन गुना ज्यादा नौकरियां पैदा करने की क्षमता रखता है।
विविधता: यह देशों की ऊर्जा आपूर्ति को अधिक विविध (Diversified) बना सकता है, जिससे तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेंगे।
क्या है 'स्वच्छ ईंधन'? (The Clean Fuel Spectrum)
आम आदमी के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर स्वच्छ ईंधन के दायरे में क्या आता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- जैव ईंधन (Biofuels): जो कृषि अवशेषों या कचरे से बनते हैं।
- हाइड्रोजन आधारित ईंधन (Hydrogen-based fuels): ग्रीन हाइड्रोजन जो भविष्य का ईंधन माना जा रहा है।
- कम कार्बन वाले जीवाश्म ईंधन: जिनमें तकनीक का इस्तेमाल कर कार्बन उत्सर्जन को कम किया गया हो।
ये ईंधन विशेष रूप से परिवहन (Transport) और भारी उद्योग (Heavy Industry) जैसे क्षेत्रों में उत्सर्जन घटाने में मददगार हैं, जहां बिजली (Electrification) का इस्तेमाल मुश्किल है। गौरतलब है कि फिलहाल तरल और गैसीय ईंधन दुनिया की कुल ऊर्जा जरूरतों का 56 प्रतिशत हिस्सा पूरा करते हैं, इसलिए इन्हें स्वच्छ बनाना अनिवार्य है।
चुनौतियां: लागत, नीति और अनिश्चितता
डब्ल्यूईएफ की यह रिपोर्ट, जिसे बैन एंड कंपनी (Bain & Company) के सहयोग से तैयार किया गया है, राह में आने वाली बाधाओं को भी रेखांकित करती है।
- शुरुआती लागत: स्वच्छ ईंधन परियोजनाओं (जैसे ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट) को शुरू करने में बहुत अधिक पूंजी (Capital Intensive) लगती है।
- मांग की अनिश्चितता: अभी बाजार में इन महंगे ईंधनों के लिए खरीदार कम हैं।
- नीतिगत असमानता: अलग-अलग देशों में अलग-अलग नियम होने से निवेशक हिचकिचाते हैं।
आगे की राह: सरकार और उद्योग का 'गठजोड़'
रिपोर्ट में चुनौतियों को दूर करने के लिए एक खाका (Blueprint) पेश किया गया है। इसमें सरकार, उद्योग जगत और वित्तीय संस्थानों के बीच 'बेहतर तालमेल' की वकालत की गई है।
- नीतिगत उपाय: सरकारों को स्पष्ट और दीर्घकालिक नीतियां बनानी होंगी ताकि निवेशकों का भरोसा बढ़े।
- सब्सिडी और इंसेंटिव: शुरुआती दौर में इस सेक्टर को खड़ा करने के लिए वित्तीय मदद जरूरी होगी।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
विश्व आर्थिक मंच की यह रिपोर्ट दावोस बैठक के लिए एजेंडा सेट करती है। अब तक दुनिया का पूरा जोर सोलर और विंड एनर्जी पर रहा है, लेकिन यह रिपोर्ट याद दिलाती है कि बिना 'क्लीन फ्यूल' के हम जहाजों, विमानों और इस्पात कारखानों को डीकार्बोनाइज नहीं कर सकते।
The Trending People का विश्लेषण है कि 100 अरब डॉलर का लक्ष्य बड़ा जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। अगर दुनिया भर की सरकारें जीवाश्म ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी को स्वच्छ ईंधन की तरफ मोड़ दें, तो यह लक्ष्य आसानी से हासिल हो सकता है। यह रिपोर्ट भारत के लिए भी एक अवसर है, जो पहले ही 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' और 'एथेनॉल ब्लेंडिंग' में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगर हम निवेश आकर्षित करने में सफल रहे, तो भारत स्वच्छ ईंधन का वैश्विक निर्यातक बन सकता है।
