विश्व पुस्तक मेले में NCERT का 'डिजिटल अवतार'—ब्लैकबोर्ड से मोबाइल स्क्रीन तक का सफर, PM ई-विद्या और दीक्षा पोर्टल ने बदली पढ़ाई की तस्वीर
नई दिल्ली, दिनांक: 16 जनवरी 2026 — किताबों की दुनिया कहे जाने वाले विश्व पुस्तक मेले (World Book Fair) में इस बार पन्नों की सरसराहट के साथ-साथ डिजिटल क्रांति की गूंज भी सुनाई दे रही है। मेले में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) का स्टॉल छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहाँ आने वाले आगंतुक यह देखकर हैरान हैं कि दशकों से स्कूली पाठ्यपुस्तकों का पर्याय बना एनसीईआरटी अब डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में एक 'पावरहाउस' बनकर उभरा है।
स्टॉल पर CIET-NCERT (केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान) का प्रतिनिधित्व कर रहे न नितिन पाठक ने इस बदलाव की पूरी कहानी बयां की। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनसीईआरटी अब केवल भारी-भरकम बस्तों और किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बच्चों की शिक्षा को डिजिटल माध्यमों से सुलभ, रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक मिशन मोड में काम कर रहा है।
1960 से 2026: एक लंबी छलांग
नितिन पाठक ने बताया कि एनसीईआरटी की स्थापना 1960 में हुई थी और तब से यह स्कूली शिक्षा की रीढ़ रहा है। लेकिन समय के साथ सीखने के तौर-तरीकों में आए बदलावों को देखते हुए अब डिजिटल इनिशिएटिव (Digital Initiatives) पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
NEP 2020 का विजन: पाठक के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत पारंपरिक 'ब्लैकबोर्ड शिक्षा' और आधुनिक 'डिजिटल शिक्षा' के बीच एक बेहतरीन संतुलन (Hybrid Model) बनाने की कोशिश की जा रही है। लक्ष्य यह है कि चाहे बच्चा क्लासरूम में हो या घर पर, उसकी पढ़ाई का नुकसान न हो।
'PM ई-विद्या': शिक्षा अब हर घर, हर स्क्रीन पर
एनसीईआरटी की सबसे महत्वाकांक्षी और सफल डिजिटल पहल ‘PM ई-विद्या’ (PM e-VIDYA) को मेले में प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। इसे देश भर के बच्चों के लिए 'वन नेशन, वन डिजिटल प्लेटफॉर्म' के रूप में देखा जा रहा है।
- कंटेंट की विविधता: इसके तहत कक्षा 1 से 12 तक के पूरे पाठ्यक्रम को वीडियो, ऑडियो और इंटरैक्टिव कंटेंट के रूप में कई भारतीय भाषाओं में तैयार किया गया है।
- प्रसारण: इंटरनेट की बाधाओं को तोड़ते हुए, यह कंटेंट 200 से अधिक टीवी चैनलों, जियो टीवी और यूट्यूब के माध्यम से 24x7 प्रसारित किया जाता है।
- विश्वसनीयता: नितिन पाठक ने जोर देकर कहा, "इंटरनेट पर जानकारी का भंडार है, लेकिन उसमें से क्या सही है, यह जानना मुश्किल है। एनसीईआरटी का कंटेंट विशेषज्ञों द्वारा जांचा-परखा (Authentic) होता है, जिससे बच्चों को भ्रामक जानकारी से बचाया जा सकता है, वह भी पूरी तरह मुफ्त।"
'दीक्षा' और QR कोड: ज्ञान की चाबी
डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए ‘दीक्षा’ (DIKSHA) पोर्टल एक 'अम्ब्रेला प्लेटफॉर्म' के रूप में कार्य कर रहा है।
- सब कुछ एक जगह: यहाँ एनसीईआरटी की सभी डिजिटल पहलों, ई-बुक्स और शिक्षण सामग्री की जानकारी एक ही क्लिक पर उपलब्ध है।
- QR कोड का जादू: एनसीईआरटी ने अपनी किताबों को 'बोलती किताबों' में बदल दिया है। हर अध्याय की शुरुआत में दिए गए QR कोड को स्कैन करते ही छात्र सीधे उस टॉपिक से जुड़े वीडियो, एनिमेशन और डिजिटल सामग्री तक पहुंच सकते हैं। यह रटने के बजाय समझने की प्रक्रिया को आसान बनाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर 'मनोदर्पण' का मरहम
कोरोना काल के बाद छात्रों में बढ़ते तनाव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए एनसीईआरटी ने ‘मनोदर्पण’ (Manodarpan) पोर्टल की शुरुआत की है, जिसकी जानकारी स्टॉल पर दी जा रही है।
- फ्री काउंसलिंग: इस पोर्टल के जरिए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और टेली-काउंसलिंग की सुविधा दी जा रही है।
- कौशल विकास: इसके अलावा, कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोर्स और स्किल-बेस्ड लर्निंग के लिए 3 महीने, 6 महीने और साप्ताहिक सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किए गए हैं।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
एनसीईआरटी का यह 'डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन' भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत है। एक सरकारी संस्थान का इतनी तेजी से तकनीक को अपनाना और उसे मुफ्त में जन-जन तक पहुंचाना सराहनीय है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 'मनोदर्पण' जैसी पहल समय की सबसे बड़ी मांग है। जब छात्र परीक्षा के दबाव और अनिश्चित भविष्य से जूझ रहे हैं, तो उन्हें किताबों के साथ-साथ मानसिक संबल की भी जरूरत है। 'पीएम ई-विद्या' ने यह सुनिश्चित किया है कि डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) शिक्षा में बाधा न बने। हालांकि, चुनौती यह है कि इन डिजिटल संसाधनों के बारे में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों और शिक्षकों को कितना जागरूक किया जा रहा है। जागरूकता ही इस डिजिटल खजाने की असली चाबी है।
