ट्रंप का 'टैरिफ' गुस्सा: सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद भारत को दी चेतावनी? जानें क्या हैं भारत के पास नए विकल्प
इंटरनेशनल डेस्क, वाशिंगटन/नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों एक साथ गुस्से और भारी कूटनीतिक तनाव में नजर आ रहे हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने न केवल ट्रंप की मनमाने ढंग से 'टैरिफ' (Tariff) लगाने की शक्ति को कमजोर कर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों में उनकी सौदेबाजी (Bargaining) की क्षमता को भी भारी डेंट दिया है।
इससे बौखलाए ट्रंप ने उन देशों को खुली चेतावनी दी है जो कोर्ट के फैसले का फायदा उठाकर अमेरिका के साथ 'खेल' खेलेंगे। उन्होंने धमकी दी है कि ऐसे देशों को पहले से भी ज्यादा टैरिफ और बुरे परिणाम झेलने पड़ेंगे।
क्या भारत के लिए है ट्रंप का यह मैसेज?
हालांकि अपने अस्थिर स्वभाव के लिए जाने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी पोस्ट में किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन यह टिप्पणी ठीक उस समय आई है जब एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए वॉशिंगटन की अपनी निर्धारित यात्रा टाल दी है।
दरअसल, ट्रंप दुनियाभर के देशों के साथ व्यापार समझौता करने के लिए 'टैरिफ' को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे। अब जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से वह ताकत कमजोर हो गई है, तो ट्रंप को अंदेशा है कि टैरिफ के दबाव में हुए समझौतों पर देश अब पुनर्विचार कर सकते हैं। इसी बीच उन्होंने तेजी दिखाते हुए आयात पर 10% का वैश्विक शुल्क घोषित कर दिया, जिसे बाद में बढ़ाकर 15% कर दिया गया (हालांकि यह केवल 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा)।
ट्रंप ने सोमवार शाम को 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर लिखा:
"जो भी देश सुप्रीम कोर्ट के इस हास्यास्पद फैसले का फायदा उठाकर खेल खेलना चाहता है, खासकर वे जिन्होंने सालों-दशकों तक अमेरिका को लूटा है, उन्हें उस टैरिफ से भी कहीं ज्यादा ऊंचा शुल्क और बुरा परिणाम भुगतना होगा, जो उन्होंने हाल ही में स्वीकार किया था।"
विशेषज्ञों की राय: 'लूटा' शब्द का इशारा भारत की ओर
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह निशाना परोक्ष रूप से भारत की ओर हो सकता है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- यात्रा स्थगित होना: इस पोस्ट के कुछ ही घंटे पहले भारत ने अपने व्यापार प्रतिनिधिमंडल की वॉशिंगटन यात्रा स्थगित कर दी थी, जिसका उद्देश्य ट्रंप द्वारा घोषित अंतरिम व्यापार समझौते की शर्तों को अंतिम रूप देना था।
- 'लूटा' शब्द का इस्तेमाल: ट्रंप मुख्य रूप से भारत के खिलाफ 'लूटा' (Robbed/Ripped off) शब्द का इस्तेमाल करते रहे हैं। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के दिन भी ट्रंप ने कहा था, "कुछ नहीं बदलेगा। वे (भारत) टैरिफ देंगे और हम टैरिफ नहीं देंगे। PM मोदी महान व्यक्ति हैं लेकिन वे हमें लूट रहे थे, इसलिए हमने थोड़ा पलटी मारी।"
भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने ट्वीट किया, "ट्रंप के पोस्ट में सारे इशारे हैं कि यह भारत के लिए है। उनकी ईगो वाली सोच एक गंभीर समस्या है।"
दुनिया भर में अमेरिका का विरोध
भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जिसने अमेरिका के साथ ट्रेड डील से ब्रेक लिया है। यूरोपियन यूनियन (EU) ने भी अमेरिका के साथ अपनी ट्रेड डील को मंज़ूरी देने पर रोक लगा दी है, जिससे ट्रंप और नाराज हो गए हैं। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम का कहना है, "ट्रंप प्रशासन की पकड़ निश्चित रूप से कमजोर हुई है। कुछ देश इस कमजोरी से कुछ हासिल करने की कोशिश करेंगे।"
भारत के पास क्या हैं विकल्प? (What are India's Options?)
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भारत को अमेरिका के साथ बातचीत में 'अपर हैंड' (बढ़त) दे दिया है:
बेहतर दरें: भारत के लिए 15% का नया टैरिफ निश्चित रूप से उस 18% की दर से बेहतर है, जिस पर पहले व्यापार समझौते के तहत सहमति बनी थी। (याद रहे, पिछले साल ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद को लेकर 50% का भारी टैरिफ लगाया था, जिसे घटाकर 18% किया गया था)।
समझौते की धारा (Clause) का फायदा: अंतरिम व्यापार सौदे में एक छोटा सा क्लॉज है जो अब भारत के लिए 'ब्रह्मास्त्र' बन गया है। इसके अनुसार, यदि कोई देश सहमत टैरिफ में बदलाव करता है, तो दूसरा देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं को संशोधित कर सकता है।
फिर से मोलभाव: इससे भारत को अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले अपनी शर्तों की समीक्षा करने और अमेरिका से अधिक अनुकूल शर्तें हासिल करने के लिए फिर से मोलभाव (Renegotiate) करने का सुनहरा अवसर मिल गया है।
संपादकीय विश्लेषण
डोनाल्ड ट्रंप का 'बुलडोजर कूटनीति' (Bulldozer Diplomacy) का तरीका अब उन्हीं पर भारी पड़ रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक नई गतिशीलता ला दी है। भारत का वॉशिंगटन दौरा टालना एक कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक है, जो यह दर्शाता है कि भारत अब दबाव में आकर कोई व्यापारिक समझौता नहीं करेगा। वह क्लॉज जो दोनों देशों को प्रतिबद्धताओं में संशोधन की अनुमति देता है, अब भारत के लिए ट्रंप प्रशासन से बेहतर डील निकालने का एक मजबूत हथियार बनेगा।
