NCERT के निदेशक डीपी सकलानी चर्चा में, जानिए उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि
नेशनल डेस्क: देश की स्कूली शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम तय करने वाली संस्था National Council of Educational Research and Training के निदेशक प्रोफेसर डीपी सकलानी इन दिनों शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बने हुए हैं। पाठ्यपुस्तकों में बदलाव, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और पाठ्यक्रम सुधार से जुड़े फैसलों के कारण लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं।
प्रोफेसर डीपी सकलानी का पूरा नाम दिनेश प्रसाद सकलानी है और वे वर्ष 2022 से एनसीईआरटी के निदेशक पद पर कार्यरत हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1963 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हुआ था। इतिहास उनका मुख्य अध्ययन और शोध विषय रहा है।
शिक्षा और अकादमिक यात्रा
डीपी सकलानी ने अपनी उच्च शिक्षा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 1996 में इतिहास विषय में पीएचडी पूरी की और इसके बाद लंबे समय तक अकादमिक क्षेत्र में अध्यापन और शोध कार्य किया।
एनसीईआरटी में नियुक्ति से पहले वे इसी विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर रहे और विद्यार्थियों को पढ़ाते हुए शोध गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उनके अकादमिक अनुभव को शिक्षा जगत में व्यापक माना जाता है।
शोध, लेखन और संस्थागत भूमिका
प्रोफेसर सकलानी शिमला स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी में विजिटिंग फेलो भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने शोध कार्य में योगदान दिया। उन्होंने इतिहास से जुड़े कई विषयों पर लेखन किया है और उनके शोध का फोकस मध्य हिमालय के सामाजिक इतिहास, प्राचीन और मध्यकालीन भारत के शहरी विकास तथा सांस्कृतिक परंपराओं पर रहा है।
विभिन्न अकादमिक मंचों पर उनके शोध कार्य को सराहा गया है और उन्हें कई शैक्षणिक सम्मान भी मिल चुके हैं। प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मार्गदर्शन देने में भी उनकी भूमिका रही है।
NCERT में वर्तमान जिम्मेदारियां
एनसीईआरटी के निदेशक के रूप में डीपी सकलानी स्कूल पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों के संशोधन और नई शिक्षा नीति से जुड़े कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। एनसीईआरटी की किताबें देशभर के लाखों छात्रों के लिए आधार सामग्री मानी जाती हैं, इसलिए उनकी भूमिका शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यक्रम निर्माण और समीक्षा प्रक्रिया में निदेशक की भूमिका नीतिगत दिशा तय करने में अहम होती है। इसी वजह से सकलानी के फैसले शिक्षा जगत में व्यापक चर्चा का विषय बनते हैं।
संपादकीय विश्लेषण
डीपी सकलानी का अकादमिक अनुभव और इतिहास विषय में शोध पृष्ठभूमि उन्हें एनसीईआरटी जैसे संस्थान के नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे समय में जब शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम बदलाव और शैक्षणिक सामग्री को लेकर बहस तेज है, संस्थागत नेतृत्व की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
एनसीईआरटी के माध्यम से लिए गए फैसले सीधे छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं। इसलिए सकलानी के नेतृत्व में होने वाले बदलाव आने वाले वर्षों में स्कूल शिक्षा की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
