ट्रंप ने जिसे कहा 'लप्पू', वो निकली दुनिया की सबसे जांबाज फोर्स—माइनस 50 डिग्री में तैनात 'कुत्ता गाड़ी' वाली आर्मी, जिसने अमेरिका को भी चौंका दिया
वाशिंगटन/कोपेनहेगन, [दिनांक: 12 जनवरी 2026 — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपनी बेबाक और कई बार विवादित टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने एक नाटो (NATO) सहयोगी देश के साथ ऐसा मजाक किया है जिसने आर्कटिक (Arctic) की जमी हुई वादियों में सियासी गर्मी पैदा कर दी है। ट्रंप ने डेनमार्क (Denmark) की ग्रीनलैंड सुरक्षा व्यवस्था पर तंज कसते हुए एक ऐसी टिप्पणी की, जिसने दुनिया की सबसे दुर्गम परिस्थितियों में तैनात एक एलीट सैन्य इकाई को सुर्खियों में ला दिया है।
ट्रंप ने डेनमार्क के प्रयासों को कमतर आंकते हुए कहा कि उन्होंने सुरक्षा के नाम पर सिर्फ "एक और डॉग स्लेज (कुत्ता गाड़ी)" जोड़ दी है। लेकिन हकीकत यह है कि जिस 'डॉग स्लेज' का मजाक उड़ाया गया, वह कोई खिलौना नहीं, बल्कि 'सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल' (Sirius Dog Sled Patrol) है—डेनमार्क की वह एलीट यूनिट जो वहां तैनात रहती है जहां आधुनिक टैंक और मिसाइलें भी बर्फ बन जाती हैं।
एयरफोर्स वन से ट्रंप का तंज: "क्या यह मजाक है?"
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप अपने अति-सुरक्षित और आरामदायक विमान 'एयरफोर्स वन' में थे। ग्रीनलैंड को लेकर चल रही रस्साकशी पर बात करते हुए उन्होंने हंसते हुए कहा:
"डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्या किया? एक और डॉग स्लेज जोड़ दी? उन्हें लगा यह बड़ा कदम है। नहीं, यह काफी नहीं है। हम वहां की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।"
ट्रंप का इशारा डेनमार्क की उस घोषणा की ओर था जिसमें उसने आर्कटिक में अपनी निगरानी बढ़ाने की बात कही थी। लेकिन ट्रंप, जो ग्रीनलैंड को अमेरिकी सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं (और जिसे वे कभी खरीदना चाहते थे), को यह प्रयास नाकाफी और हास्यास्पद लगा।
जिसे बताया 'कमजोर', वो है 'बर्फ का सिकंदर'
ट्रंप जिसे 'लप्पू' समझ रहे थे, वह दरअसल इंसानी जज्बे की मिसाल है। सिरियस पेट्रोल दुनिया की एकमात्र सैन्य डॉग स्लेज यूनिट है।
- कार्यक्षेत्र: यह यूनिट ग्रीनलैंड के उत्तर-पूर्वी हिस्से में तैनात रहती है। यह इलाका करीब 1.6 लाख वर्ग किलोमीटर का है, जो दुनिया का सबसे बड़ा नेशनल पार्क भी है।
- हालात: यहां तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। बर्फीले तूफान इतने तेज होते हैं कि दृश्यता शून्य हो जाती है। यहां न सड़कें हैं, न शहर और न ही कोई इंसानी आबादी। बस अंतहीन बर्फ का रेगिस्तान है।
मशीनें हुईं फेल, इसलिए भरोसेमंद हैं 'कुत्ते'
सवाल उठता है कि 21वीं सदी में जब दुनिया ड्रोन और सैटेलाइट से निगरानी कर रही है, तो डेनमार्क कुत्तों के भरोसे क्यों है?
- तकनीकी विफलता: आर्कटिक की इन परिस्थितियों में दुनिया के आधुनिक से आधुनिक हथियार, गाड़ियां और इलेक्ट्रॉनिक्स जवाब दे जाते हैं। बैटरियां डिस्चार्ज हो जाती हैं और इंजन जम जाते हैं।
- कुदरती साथी: ऐसे में केवल स्लेज (Sled) और विशेष नस्ल के कुत्ते ही परिवहन का साधन बनते हैं। हर साल यह यूनिट 15 से 20 हजार किलोमीटर की गश्त करती है।
- टीम: इस यूनिट में केवल 12-14 एलीट सैनिक होते हैं। ये सैनिक दो-दो की जोड़ी में महीनों तक गश्त पर रहते हैं। उनके पास केवल अपनी राइफल (पोलर बियर से बचने के लिए) और अपने वफादार कुत्ते होते हैं।
इतिहास: नाजियों को रोकने के लिए बनी थी यूनिट
इस यूनिट का इतिहास दूसरे विश्व युद्ध (WWII) से जुड़ा है। जब नाजी जर्मनी ने डेनमार्क पर कब्जा कर लिया था, तब ग्रीनलैंड में जर्मन सेना को मौसम स्टेशन बनाने से रोकने के लिए इस पेट्रोलिंग यूनिट की स्थापना की गई थी।
- संप्रभुता का प्रतीक: यह कोई आक्रमण रोकने वाली विशाल सेना नहीं है, बल्कि यह डेनमार्क की संप्रभुता (Sovereignty) का झंडा है। यह यूनिट सिर्फ इसलिए इस वीरान इलाके में घूमती रहती है ताकि दुनिया (और अब अमेरिका) को यह संदेश दिया जा सके कि "यह जमीन खाली नहीं है, यहां डेनमार्क का राज है।"
क्यों अहम है यह 'बर्फीला रेगिस्तान'? (रूस-चीन का खतरा)
डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा बेवजह नहीं है। ग्रीनलैंड भू-राजनीतिक (Geopolitics) रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
रूस और चीन: आर्कटिक की बर्फ पिघलने से नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं। रूस और चीन यहां अपनी सैन्य और व्यापारिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि 'डॉग स्लेज' चीन की पनडुब्बियों या रूस के आइस-ब्रेकर्स को नहीं रोक सकती।
अमेरिका की नजर: ग्रीनलैंड, अमेरिका के करीब है। वाशिंगटन इसे अपनी सुरक्षा के लिए एक ढाल (Shield) और संसाधनों (दुर्लभ खनिजों) का खजाना मानता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
डोनाल्ड ट्रंप का बयान आधुनिक युद्धनीति और पारंपरिक साहस के बीच के टकराव को दर्शाता है। एक तरफ अमेरिका की 'हाई-टेक' सोच है जो हर समस्या का हल मिसाइलों और रडार में देखती है, तो दूसरी तरफ डेनमार्क का 'प्रकृति के साथ तालमेल' वाला दृष्टिकोण है।
The Trending People का विश्लेषण है कि ट्रंप ने भले ही मजाक उड़ाया हो, लेकिन सिरियस पेट्रोल के सैनिकों का सम्मान कम नहीं होता। माइनस 50 डिग्री में जहां सांस लेना मुश्किल है, वहां देश की सीमा की रक्षा करना किसी सुपरहीरो से कम नहीं है। हालांकि, ट्रंप की यह बात भी सही है कि रूस और चीन की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए केवल 'डॉग स्लेज' काफी नहीं होगी; डेनमार्क और नाटो को आर्कटिक में अपनी 'हार्ड पावर' भी बढ़ानी होगी। यह विवाद बताता है कि आने वाले समय में अगला 'कोल्ड वॉर' सचमुच की ठंड (आर्कटिक) में ही लड़ा जाएगा।
