महाराष्ट्र की सियासत में 'परमाणु विस्फोट'—उद्धव ठाकरे का अब तक का सबसे तीखा हमला, बोले- "देवेंद्र फडणवीस मराठी हो सकते हैं, पर हिंदू नहीं
मुंबई, दिनांक: 12 जनवरी 2026 — महाराष्ट्र की राजनीति में जुबानी जंग अक्सर देखने को मिलती है, लेकिन सोमवार को शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। न्यूज18 को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उद्धव ठाकरे ने मर्यादा की सारी लकीरें लांघते हुए राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) की धार्मिक और क्षेत्रीय पहचान पर सीधा प्रहार किया।
उद्धव ने एक बेहद विवादास्पद और चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि "मुझे पता चला है कि देवेंद्र फडणवीस मराठी होने के बावजूद हिंदू नहीं हैं।" बीएमसी (BMC) चुनावों की आहट के बीच दिया गया यह बयान स्पष्ट करता है कि आगामी लड़ाई 'विकास' के साथ-साथ 'अस्मिता' और 'हिंदुत्व की परिभाषा' पर भी लड़ी जाएगी।
"नागपुर वाले मुंबई को क्या समझेंगे?": उद्धव का तर्क
इंटरव्यू के दौरान उद्धव ठाकरे का आक्रामक अंदाज देखने लायक था। फडणवीस को 'हिंदू' न मानने के अपने बयान के पीछे उन्होंने एक अजीबोगरीब तर्क दिया।
क्षेत्रीय वार: उद्धव ने कहा, "फडणवीस मूल रूप से मुंबई के नहीं हैं, वे नागपुर से आते हैं। इसलिए उन्हें मुंबई की नब्ज (Pulse) और यहां के लोगों की भावनाओं की समझ नहीं है।"
चालाकी: उन्होंने सीएम फडणवीस को 'चालाक' बताते हुए कहा कि भले ही वे राजनीतिक गुणा-गणित में माहिर बनने की कोशिश करें, लेकिन मुंबईकर अब उनकी चालों को भांप चुके हैं। "मुंबई के लोग देख रहे हैं कि किस तरह शहर की राजनीति को मैनिपुलेट करने की कोशिश की जा रही है," उद्धव ने जोड़ा।
यह बयान भाजपा के कोर वोट बैंक और संघ (RSS) की विचारधारा पर सीधा हमला है, क्योंकि नागपुर संघ का मुख्यालय है।
बालासाहेब और मोदी: "मेरे पिता ने ही मोदी जी को बचाया था"
उद्धव ठाकरे का दर्द उस वक्त छलक उठा जब उन्होंने अपनी पार्टी (शिवसेना) और चुनाव चिन्ह (धनुष-बाण) के छिन जाने का जिक्र किया। उन्होंने एकनाथ शिंदे गुट और बीजेपी के गठबंधन पर करारा प्रहार करते हुए कहा, "जिन लोगों ने मेरे पिता और पार्टी का नाम चुराने की जरूरत समझी, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है?"
इस दौरान उन्होंने एक ऐतिहासिक और संवेदनशील किस्सा साझा किया। उद्धव ने दावा किया:
"मैं आपको बता दूं कि हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे एक ही हैं। जब नरेंद्र मोदी मुश्किल दौर में थे (संभवतः गुजरात दंगों के बाद का संदर्भ), तब बालासाहेब ठाकरे ही उनके साथ चट्टान की तरह खड़े थे। उन्होंने ही सबसे पहले मोदी जी का समर्थन किया था और उन्हें बचाया था।"
यह बयान भाजपा को याद दिलाने की कोशिश है कि आज जिस 'हिंदुत्व' की लहर पर वे सवार हैं, उसकी नींव बालासाहेब ने ही मजबूत की थी।
बीएमसी चुनाव: 'खांसी' और प्रदूषण का मुद्दा
मुंबई के बिगड़ते हालात पर उद्धव ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने इंटरव्यू के दौरान अपनी खांसी का हवाला देते हुए कहा, "देखिए, आपसे बात करते हुए मुझे भी खांसी आ रही है। यह शहर की खराब हवा का सबूत है।"
विकास मॉडल पर सवाल: उन्होंने मौजूदा सरकार के अनियंत्रित निर्माण कार्यों को प्रदूषण का जिम्मेदार ठहराया। उद्धव ने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल में कोविड मैनेजमेंट की तारीफ 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' (WHO) ने भी की थी, जबकि आज मुंबई का दम घुट रहा है।
एजेंडा: बीएमसी चुनाव पर उन्होंने कहा कि भाजपा और शिंदे गुट के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वे बार-बार 'हिंदुत्व' का कार्ड खेलते हैं, जबकि हम मुंबई के विकास की बात कर रहे हैं।
"मुंबई को निचोड़कर गुजरात ले जा रहे": आर्थिक आरोप
उद्धव ठाकरे ने अपना पुराना और सबसे धारदार आरोप फिर दोहराया—मुंबई को महाराष्ट्र से तोड़ने और कमजोर करने की साजिश।
रोजगार की चोरी: उन्होंने कहा, "यह सरकार मुंबई का बिज़नेस और रोजगार गुजरात ले जा रही है। बड़े प्रोजेक्ट्स (जैसे फॉक्सकॉन-वेदांता) को मुंबई से बाहर भेजा जा रहा है, जिससे यहां के युवाओं के हक का रोजगार छिन रहा है।"
मराठी मानूस की घर वापसी: उद्धव ने वादा किया कि वे एक ऐसी 'सस्ती आवास योजना' लाएंगे, जिसके जरिए बढ़ती महंगाई के कारण मुंबई छोड़ने को मजबूर हुए मराठी मानूस को वापस अपने शहर में घर मिल सके।
वोट चोरी का आरोप: "जनता सब जानती है"
हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार पर उद्धव ने माना कि उनसे कुछ रणनीतिक गलतियां हुई होंगी, लेकिन उन्होंने हार का मुख्य कारण 'वोट चोरी' और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को बताया। बीएमसी के फंड के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने जनता के पैसे को सुरक्षित रखा और वित्तीय अनुशासन बनाए रखा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
उद्धव ठाकरे का यह इंटरव्यू एक हताश नेता का नहीं, बल्कि एक घायल शेर का है जो पलटवार करने के लिए तैयार है। देवेंद्र फडणवीस को 'हिंदू नहीं' कहना एक बड़ा राजनीतिक जुआ (Political Gamble) है। इससे वे शायद कट्टर शिवसैनिकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि असली हिंदुत्व 'मातोश्री' में है, न कि नागपुर में।
The Trending People का विश्लेषण है कि बीएमसी चुनाव इस बार 'अस्मिता' की लड़ाई होंगे। उद्धव ठाकरे ने प्रदूषण और रोजगार जैसे शहरी मुद्दों को भावनात्मक मुद्दों (मराठी मानूस और हिंदुत्व) के साथ मिलाकर एक मजबूत पिच तैयार की है। फडणवीस को 'बाहरी' (नागपुर का) बताकर वे मुंबई बनाम विदर्भ की लकीर भी खींच रहे हैं। यह बयानबाजी आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति को और कड़वा और ध्रुवीकृत (Polarized) करेगी।
