भारत में 'टाइफाइड' की वापसी का सायरन—गांधीनगर में 100 मरीज भर्ती, दवाइयां भी हो रहीं बेअसर, जानें कब जानलेवा बनता है यह बुखार
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नई दिल्ली/गांधीनगर, दिनांक: 5 जनवरी 2026 — भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक बार फिर एक पुरानी लेकिन खतरनाक बीमारी ने सिर उठा लिया है। हम बात कर रहे हैं टाइफाइड (Typhoid) की, जिसे आम बोलचाल में 'मोतीझरा' या 'मियादी बुखार' भी कहा जाता है। देश के कई हिस्सों में, विशेषकर गुजरात में, टाइफाइड के मामलों में अचानक आई तेजी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में गुजरात की राजधानी गांधीनगर (Gandhinagar) से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां टाइफाइड के संदिग्ध फैलाव के कारण करीब 100 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि दूषित पानी और स्वच्छता (Hygiene) की कमी आज भी हमारे समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है। मानसून बीत जाने के बावजूद इस बीमारी का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है, जो एक गंभीर 'हेल्थ इमरजेंसी' की ओर इशारा करता है।
गांधीनगर का मामला: पानी में घुला 'जहर'
गांधीनगर की घटना ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक ही इलाके से इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का आना यह संकेत देता है कि वहां के जल स्रोतों या खाद्य आपूर्ति में बड़े पैमाने पर संक्रमण (Contamination) फैला है। विशेषज्ञों का कहना है कि खराब सीवेज सिस्टम और पीने के पानी की पाइपलाइन में लीकेज अक्सर ऐसी महामारियों का कारण बनते हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों में तेज बुखार और पेट दर्द की शिकायतें आम हैं।
क्या है टाइफाइड? समझिए दुश्मन को
टाइफाइड, जिसे मेडिकल भाषा में 'एन्टेरिक फीवर' (Enteric Fever) कहा जाता है, एक जीवाणु जनित रोग है।
- कारक: यह 'साल्मोनेला टाइफी' (Salmonella Typhi) नामक बैक्टीरिया से फैलता है।
- प्रसार: यह बैक्टीरिया दूषित भोजन और पानी के जरिए स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है। एक बार अंदर जाने के बाद, यह आंतों (Intestines) पर हमला करता है और वहां से खून में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाता है।
- आंकड़े: भारत में यह बीमारी स्थानिक (Endemic) है। अनुमान के मुताबिक, हर साल देश में लगभग 47 से 48 लाख लोग टाइफाइड की चपेट में आते हैं।
क्यों खतरनाक हो रहा है टाइफाइड? (Drug Resistance)
टाइफाइड पहले भी होता था, लेकिन अब यह ज्यादा जानलेवा क्यों है? इसका जवाब है— एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance)। डॉक्टरों के लिए चिंता का सबसे बड़ा विषय यह है कि भारत के कई हिस्सों में टाइफाइड के बैक्टीरिया आम दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (Resistant) हो चुके हैं।
- सुपरबग: बैक्टीरिया ने खुद को इतना बदल लिया है कि उन पर सामान्य एंटीबायोटिक्स का असर नहीं हो रहा। इसका मतलब है कि इलाज लंबा चलता है, महंगा होता है और कई मामलों में मरीज की जान पर बन आती है।
- कारण: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना और कोर्स पूरा न करना इस प्रतिरोध का मुख्य कारण है।
संक्रमण के 'हॉटस्पॉट': कहां से आता है बैक्टीरिया?
टाइफाइड अमीरों और गरीबों में भेद नहीं करता, लेकिन गंदगी इसका सबसे बड़ा दोस्त है।
- दूषित पानी: खुले कुएं, हैंडपंप और पाइपलाइन का गंदा पानी संक्रमण का मुख्य स्रोत है।
- स्ट्रीट फूड: सड़क किनारे बिकने वाली पानी पूरी, गन्ने का रस, लस्सी और कटी हुई कच्ची सब्जियां (सलाद) अगर साफ पानी से न धोई गई हों, तो वे टाइफाइड का घर हो सकती हैं।
- स्वच्छता की कमी: शौच के बाद हाथ न धोना और उसी हाथ से खाना बनाना या खाना संक्रमण फैलाने का सबसे तेज तरीका है।
लक्षण: कब हो जाएं सतर्क?
टाइफाइड के लक्षण संक्रमण के 1 से 3 हफ्ते बाद दिखने शुरू होते हैं। इसे पहचानना जरूरी है:
- बुखार: धीरे-धीरे बढ़ता हुआ तेज बुखार (जो 103-104 डिग्री F तक जा सकता है)। यह बुखार सीढ़ी (Step-ladder) की तरह चढ़ता है।
- सिरदर्द और कमजोरी: असहनीय सिरदर्द और शरीर में टूटन।
- पेट की समस्याएं: पेट में तेज दर्द, कब्ज या दस्त और भूख न लगना।
- विशिष्ट लक्षण: तेज बुखार के बावजूद दिल की धड़कन का धीमा होना (Bradycardia)।
- अन्य: सूखी खांसी, मतली, उल्टी और कभी-कभी छाती पर गुलाबी दाने (Rose Spots)।
बचाव ही सर्वोत्तम इलाज है: 5 मंत्र
डॉक्टरों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी आपको अस्पताल जाने से बचा सकती है:
- पानी: हमेशा उबला हुआ या आरओ (RO) का फिल्टर्ड पानी ही पिएं। बाहर का खुला पानी पीने से बचें।
- हाथ धोना: खाना बनाने और खाने से पहले तथा शौच के बाद साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं।
- गर्म खाना: ताजा और गर्म भोजन ही करें। बासी खाना बैक्टीरिया का घर होता है।
- कच्ची चीजों से परहेज: बाहर का कच्चा सलाद, कटे फल और जूस पीने से बचें। फल और सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोएं या छीलें।
- टीकाकरण: टाइफाइड का टीका (Typhoid Conjugate Vaccine) उपलब्ध है। अपने डॉक्टर से सलाह लेकर इसे लगवाएं, यह लंबे समय तक सुरक्षा देता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
गांधीनगर की घटना एक 'वेक-अप कॉल' है। 21वीं सदी के भारत में अगर 100 लोग दूषित पानी पीने से अस्पताल पहुंचते हैं, तो यह हमारे बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 'स्वच्छ भारत अभियान' केवल झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका विस्तार 'शुद्ध पेयजल' तक होना अनिवार्य है। प्रशासन को पानी की पाइपलाइनों और सीवेज सिस्टम की नियमित जांच करनी चाहिए। वहीं, आम जनता को भी यह समझना होगा कि सड़क किनारे का 'चटपटा स्वाद' कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकता है। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के दौर में, परहेज ही एकमात्र विश्वसनीय दवा है।
