1 अप्रैल 2026 से बदल जाएगी टैक्स की दुनिया—60 साल पुराने कानून की विदाई, अब 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' का राज, 12 लाख तक नो टैक्स!
नई दिल्ली, दिनांक: 6 जनवरी 2026 — भारतीय कर प्रणाली (Tax System) के इतिहास में एक नए युग का सूर्योदय होने वाला है। सरकार ने देश के करोड़ों करदाताओं को एक ऐतिहासिक सौगात देते हुए यह सुनिश्चित कर दिया है कि अब से ठीक दो महीने बाद, यानी 1 अप्रैल 2026 से देश में 'Income Tax Act 2025' लागू हो जाएगा। इसके साथ ही 1961 से चला आ रहा, संशोधनों के बोझ तले दबा 60 साल पुराना आयकर कानून इतिहास के पन्नों में समा जाएगा।
यह बदलाव केवल तारीखों का नहीं, बल्कि व्यवस्था का है। सरकार का दावा है कि नया कानून 'जटिलता से सरलता' (Complexity to Simplicity) की ओर एक निर्णायक कदम है। पिछले कई दशकों में बार-बार हुए पैचवर्क और संशोधनों के कारण जो कानून एक आम आदमी के लिए पहेली बन गया था, अब वह आसान भाषा और डिजिटल प्रक्रियाओं के साथ पारदर्शी बनने जा रहा है।
आखिर क्यों पड़ी 60 साल पुराने कानून को बदलने की जरूरत?
1961 का मौजूदा आयकर कानून समय के साथ इतना भारी-भरकम हो गया था कि इसे समझना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं था।
- संशोधनों का बोझ: पिछले छह दशकों में इसमें हजारों छोटे-बड़े संशोधन हुए, जिससे कानून की मूल भावना कहीं खो गई थी।
- कठिन भाषा: इसकी कानूनी शब्दावली इतनी जटिल थी कि एक साधारण वेतनभोगी या छोटा व्यापारी बिना चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स एक्सपर्ट की मदद के अपना रिटर्न फाइल करने की सोच भी नहीं सकता था।
- विवाद: अस्पष्टता के कारण टैक्स विभाग और करदाताओं के बीच मुकदमेबाजी बढ़ रही थी।
नया अधिनियम इन सभी कमियों को दूर कर 'सरलता, स्पष्टता और पूर्ण डिजिटल' विज़न पर आधारित है।
नए कानून की 3 सबसे बड़ी विशेषताएं: आसान हुई जिंदगी
सरकार ने नए कानून का मसौदा तैयार करते समय 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) को केंद्र में रखा है।
1. जटिलता का अंत (Simplification): सबसे बड़ा बदलाव कानून के आकार में किया गया है। पुराने कानून में जहां 800 से अधिक सेक्शन थे, वहीं नए कानून में इन्हें घटाकर केवल 536 सरल सेक्शन कर दिया गया है। अनावश्यक 23 अध्यायों और पुराने, अप्रासंगिक प्रावधानों को जड़ से हटा दिया गया है।
2. कागजी बाधाओं की छुट्टी (Paperless & Faceless): पूरी प्रक्रिया को 'पेपरलेस' और 'फेसलेस' बनाया गया है।
फायदा: अब आपको टैक्स अधिकारी की शक्ल देखने की जरूरत नहीं होगी। सब कुछ ऑनलाइन होगा। इससे न सिर्फ रिफंड की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि टैक्स विभाग के बेवजह के नोटिसों और 'इंस्पेक्टर राज' का डर भी खत्म होगा।
3. आम आदमी की आत्मनिर्भरता: कानून की भाषा को इतना सरल रखा गया है कि एक 10वीं पास व्यक्ति भी इसे समझ सके। इसका उद्देश्य यह है कि एक आम नागरिक बिना किसी सीए (CA) पर निर्भर हुए खुद अपनी टैक्स देनदारी समझ सके और फाइल कर सके।
मिडिल क्लास की बल्ले-बल्ले: 12 लाख तक 'शून्य टैक्स'
आम आदमी के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि "मेरी जेब पर क्या असर पड़ेगा?" नए कानून ने मिडिल क्लास के चेहरे पर मुस्कान ला दी है।
नई कर व्यवस्था (New Tax Regime): वर्ष 2025 के बजट में जो ऐतिहासिक राहत दी गई थी, उसका फायदा 2026 में भी जारी रहेगा। नई कर व्यवस्था अपनाने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को ₹12 लाख तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।
शर्त: हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि इस छूट के बदले आपको पुरानी कटौती (जैसे- HRA, इंश्योरेंस या होम लोन डिडक्शन) का लाभ नहीं मिलेगा। यह उन युवाओं के लिए बेहतरीन है जो निवेश के झंझट में नहीं पड़ना चाहते और हाथ में ज्यादा कैश (In-hand Salary) चाहते हैं।
GST और कस्टम ड्यूटी का नया अवतार
सिर्फ इनकम टैक्स ही नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) में भी स्थिरता लाने की कोशिश की गई है।
स्थिर GST: सितंबर 2025 के बड़े सुधारों के बाद, अब 2026 में दरों में किसी बड़े बदलाव की गुंजाइश नहीं है। अधिकांश उत्पाद 5% और 18% के दायरे में स्थिर रहेंगे, जिससे व्यापारियों को राहत मिलेगी।
सस्ते होंगे गैजेट्स: कस्टम ड्यूटी के स्लैब घटाकर मात्र 8 कर दिए गए हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि विदेशों से आने वाले मोबाइल पार्ट्स, कैमरा लेंस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते हो सकते हैं।
नशा महंगा: तंबाकू और सिगरेट पर भारी टैक्स और सेस का बोझ बरकरार रहेगा, ताकि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बनी रहे।
क्या वाकई बदल जाएगी टैक्स फाइलिंग की दुनिया?
सरकार का मुख्य उद्देश्य एक 'भय-मुक्त' (Fear-free) कर वातावरण तैयार करना है। नए नियमों के आने के बाद टैक्स विवादों में कमी आएगी और अदालतों में लंबित लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से राहत मिलेगी। यह कदम भारत को वैश्विक स्तर पर व्यापार के अनुकूल बनाने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
Income Tax Act 2025 का लागू होना भारत के आर्थिक सुधारों की दिशा में एक साहसिक कदम है। 60 साल पुराने कानूनों को ढोना एक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए बोझ बन गया था। 12 लाख तक की टैक्स छूट मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बढ़ाएगी, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी।
The Trending People का विश्लेषण है कि 'सरलता' ही सबसे बड़ा सुधार है। अगर एक आम आदमी बिना डरे अपना टैक्स भर सकता है, तो इससे टैक्स बेस (Tax Base) अपने आप बढ़ेगा। हालांकि, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नए पोर्टल और डिजिटल सिस्टम तकनीकी रूप से इतने सक्षम हों कि वे अंतिम समय के लोड को संभाल सकें। 1 अप्रैल 2026 का दिन भारत को एक 'टैक्स-फ्रेंडली' राष्ट्र बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम होगा।
