Stock Market Today: अमेरिकी बयान से डगमगाया बाजार, सेंसेक्स–निफ्टी फिर लाल निशान में
चार कारोबारी सत्रों की लगातार गिरावट के बाद शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत जरूर की, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। अमेरिका से आए एक राजनीतिक–आर्थिक बयान ने निवेशकों की धारणा को झकझोर दिया, जिसके बाद बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। नतीजतन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों एक बार फिर लाल निशान में फिसल गए।
दोपहर 12:45 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 624.58 अंक यानी 0.74% गिरकर 83,556.38 के स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 653 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी 50 भी 193.25 अंक या 0.75% टूटकर 25,683.60 पर ट्रेड करता दिखा।
पिछले पांच कारोबारी सत्रों की बात करें तो सेंसेक्स अब तक करीब 2,200 अंक गंवा चुका है। इससे पहले गुरुवार को बाजार में 780 अंकों की बड़ी गिरावट देखी गई थी, जिसने पहले ही निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी।
किन शेयरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
निफ्टी 50 के शेयरों में आज मिला-जुला रुख देखने को मिला।
मजबूती दिखाने वाले शेयरों में ईटरनल, एचसीएल टेक और एशियन पेंट्स शामिल रहे। हालांकि इन चुनिंदा शेयरों की तेजी भी बाजार को संभाल नहीं सकी।
दूसरी ओर, आईसीआईसीआई बैंक, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। बैंकिंग और बड़े कॉर्पोरेट शेयरों में बिकवाली ने इंडेक्स पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी देखने को मिली।
- निफ्टी मिडकैप 150 में 0.33% की गिरावट
- निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 0.79% की गिरावट दर्ज की गई
इससे साफ है कि सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते दिखे।
सेक्टर के हिसाब से बाजार का हाल
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आज बाजार में साफ बंटवारा नजर आया।
- निफ्टी रियल्टी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा कमजोर रहे
- वहीं निफ्टी PSU बैंक और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में सीमित मजबूती देखने को मिली
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरों, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों को लेकर अनिश्चितता के कारण फाइनेंशियल और रियल्टी शेयरों में दबाव बना हुआ है।
अमेरिकी मंत्री के बयान से बदली बाजार की दिशा
बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक का हालिया बयान माना जा रहा है। एक इंटरव्यू में लुटनिक ने दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील इसलिए फाइनल नहीं हो पाई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया।
लुटनिक के मुताबिक, इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत जरूरी थी, लेकिन भारतीय पक्ष इस प्रक्रिया को लेकर सहज नहीं था। इसी कारण डील आगे नहीं बढ़ सकी।
इस बयान ने बाजार में यह आशंका पैदा कर दी है कि भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों में आगे भी अनिश्चितता बनी रह सकती है, जिसका सीधा असर निवेश और निर्यात आधारित कंपनियों पर पड़ सकता है।
निवेशकों में बढ़ी अनिश्चितता
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील से जुड़ी किसी भी नकारात्मक खबर का असर भारतीय शेयर बाजार पर तुरंत दिखता है। अमेरिका भारत का बड़ा ट्रेड पार्टनर है और ऐसे में किसी भी तरह की अनिश्चितता विदेशी निवेशकों (FII) की धारणा को प्रभावित कर सकती है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक इस मुद्दे पर स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों का रुख, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स की चाल भी घरेलू बाजार के लिए अहम बनी रहेगी।
Our Thoughts
शेयर बाजार इस समय न सिर्फ आर्थिक आंकड़ों, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक बयानों के प्रति भी बेहद संवेदनशील नजर आ रहा है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री का बयान इस बात का संकेत है कि वैश्विक राजनीति में आई छोटी-सी हलचल भी बाजार की दिशा बदल सकती है।
निवेशकों के लिए यह दौर सतर्कता बरतने का है। लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर नजर रखनी चाहिए, जबकि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए जोखिम बढ़ा हुआ है। जब तक भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर स्पष्टता नहीं आती और वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहना स्वाभाविक है
