Cancer Treatment: अब मिट्टी के बैक्टीरिया करेंगे कैंसर का खात्मा! जानिए इस धांसू रिसर्च के बारे में
डेस्क: दोस्तो, अगर आपसे कोई कहे कि मिट्टी में मिलने वाले छोटे-छोटे बैक्टीरिया कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को जड़ से खत्म कर सकते हैं, तो क्या आप यकीन करेंगे? जी हाँ, यह बिल्कुल सच होने जा रहा है! वैज्ञानिकों ने अपनी एक नई रिसर्च में कुछ ऐसे "स्मार्ट बैक्टीरिया" तैयार किए हैं, जो ट्यूमर के एकदम अंदर घुसकर उस पर सीधा हमला कर सकते हैं। वहां तक तो हमारी सबसे पावरफुल दवाइयां भी नहीं पहुंच पातीं! चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि ये चमत्कार कैसे हो रहा है।
मिट्टी का वो कण, जो बनेगा कैंसर का काल!
इस पूरी रिसर्च का 'हीरो' एक खास बैक्टीरिया है, जिसका नाम है 'क्लोस्ट्रीडियम स्पोरोजेन्स' (Clostridium sporogenes)। यह वैसे तो हमारी आम मिट्टी में पाया जाता है, लेकिन इसकी एक बहुत बड़ी खूबी है! इसे जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की बिल्कुल जरूरत नहीं होती।
दरअसल, कैंसर के बड़े ट्यूमर के बिल्कुल बीच वाले हिस्से में ऑक्सीजन नहीं होती (इसे 'डेड ज़ोन' कहते हैं)। बस फिर क्या, ये बैक्टीरिया सीधे ट्यूमर के बीचों-बीच जाकर मजे से बैठ जाते हैं, वहां का सारा खाना (पोषक तत्व) खुद चट कर जाते हैं और कैंसर की कोशिकाओं को अंदर ही अंदर पूरी तरह खोखला कर देते हैं!
लेकिन एक बड़ी दिक्कत भी थी...
अब आप सोच रहे होंगे कि अगर ये इतने कमाल के हैं, तो पहले इनका इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? दिक्कत यह थी कि जब ये बैक्टीरिया ट्यूमर को अंदर से खाते-खाते बाहर के किनारों की तरफ आते थे, तो उनका सामना ऑक्सीजन से हो जाता था। ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही ये बेचारे बैक्टीरिया मर जाते थे! इस वजह से कैंसर पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाता था।
वैज्ञानिकों ने निकाला धांसू जुगाड़!
अब हमारे वैज्ञानिकों ने भी हार नहीं मानी! उन्होंने 'एसीएस सिंथेटिक बायोलॉजी' नाम के जर्नल में बताया है कि उन्होंने इसका क्या गजब का तोड़ निकाला है। शोधकर्ताओं ने एक दूसरे बैक्टीरिया से एक ऐसा 'जीन' निकाला जो ऑक्सीजन को झेल सकता है, और उसे हमारे कैंसर मारने वाले बैक्टीरिया में फिट कर दिया!
इसके लिए उन्होंने 'कोरम सेंसिंग' (Quorum Sensing) नाम की एक कमाल की तकनीक का इस्तेमाल किया। इसे ऐसे समझिए कि जब ट्यूमर के अंदर इन बैक्टीरिया की फौज बहुत बड़ी हो जाती है, तो ये आपस में एक केमिकल सिग्नल छोड़ते हैं। सिग्नल मिलते ही इन सबका 'ऑक्सीजन से बचने वाला कवच' तुरंत ऑन हो जाता है। है ना एकदम साइंस फिक्शन फिल्म जैसा?
शरीर के लिए 100% सेफ!
अब आप डर रहे होंगे कि कहीं ये बैक्टीरिया शरीर के अच्छे हिस्सों को नुकसान तो नहीं पहुंचाएंगे? तो घबराइए मत! वैज्ञानिकों ने इस पूरे सिस्टम को एक 'DNA सर्किट' की तरह डिजाइन किया है। जैसे आप बटन दबाते हैं और सिर्फ उसी कमरे का बल्ब जलता है, ठीक वैसे ही ये बैक्टीरिया सिर्फ और सिर्फ ट्यूमर के अंदर ही एक्टिव होते हैं और बाकी स्वस्थ अंगों को एकदम सुरक्षित रखते हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल तो लैब में यह प्रयोग एकदम सुपरहिट रहा है! अब वैज्ञानिक इन स्मार्ट बैक्टीरिया का जानवरों पर 'प्री-क्लिनिकल ट्रायल' (Pre-clinical trial) करने की तैयारी में जुट गए हैं। अगर सब कुछ सही रहा, तो आने वाले समय में कीमोथेरेपी के दर्दनाक साइड इफेक्ट्स से छुटकारा मिल सकता है और सिर्फ इन छोटे, लेकिन दमदार योद्धाओं के जरिए कैंसर का सटीक और सुरक्षित इलाज हो सकेगा!
TheTrendingPeople.com क्या सोचता है?
कैंसर का नाम सुनते ही आज भी रूह कांप जाती है, लेकिन विज्ञान जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, वो सच में एक बहुत बड़ी उम्मीद जगाता है। कमाल की बात देखिए कि प्रकृति ने ही हमें बीमारी दी है और अब प्रकृति (यानी मिट्टी के बैक्टीरिया) से ही उसका इलाज भी मिल रहा है! जेनेटिक इंजीनियरिंग का यह कमाल बताता है कि भविष्य की मेडिकल साइंस कितनी जबरदस्त होने वाली है। बस दुआ है कि इसके जानवरों पर होने वाले ट्रायल भी जल्दी से सफल हों, ताकि आम लोगों तक यह सस्ता और सुरक्षित इलाज जल्द से जल्द पहुंच सके!
