ईरान ने अमेरिका-इजरायल की रणनीति पर उठाए सवाल, मध्य-पूर्व तनाव और गहरा
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच Seyyed Abbas Araghchi ने अमेरिका और इजरायल की रणनीतिक एकजुटता पर सवाल उठाकर नई बहस छेड़ दी है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि भले ही Donald Trump युद्धविराम करवाने में सफल हो जाएं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और इजरायल इस संघर्ष के अंतिम परिणाम को लेकर वास्तव में एकमत हैं या नहीं।
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि व्हाइट हाउस और ईरान के बीच बातचीत को लेकर विरोधाभासी संकेत सामने आ रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारों अमेरिकी सैनिकों को मध्य-पूर्व क्षेत्र में तैनात किया जा रहा है, जिससे हालात और अधिक तनावपूर्ण बन रहे हैं।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के युद्ध की शुरुआत को एक महीना पूरा हो चुका है और अब दुनिया भर की सरकारें इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि संघर्ष कितने समय तक जारी रहता है और Strait of Hormuz से तेल और अन्य मालवाहक जहाजों की आवाजाही कितने समय तक प्रभावित रहती है।
ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर नियमों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है। तेहरान ने अमेरिकी कार्रवाई को “दुर्भावनापूर्ण” और “वादाखिलाफी” करार देते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है और इसका जवाब दिया जाएगा।
इस बीच, अमेरिकी सेना ने 26 मई को होर्मुज क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की। United States Central Command के अनुसार, यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई। सेंटकॉम प्रवक्ता Timothy Hawkins ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों को खतरे से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया। अमेरिका ने कथित तौर पर बारूदी सुरंग बिछा रही नौकाओं और बंदर अब्बास पोर्ट के पास मौजूद मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर तेल कीमतों, वैश्विक व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
TheTrendingPeople की राय में
मध्य-पूर्व का मौजूदा संकट केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती बयानबाजी यह संकेत देती है कि हालात अभी स्थिर होने से दूर हैं। खास चिंता की बात होर्मुज स्ट्रेट है, जहां किसी भी बड़े अवरोध का सीधा असर दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे समय में कूटनीतिक समाधान की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि लंबे संघर्ष की कीमत केवल युद्धरत देशों को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को चुकानी पड़ सकती है।