गाजियाबाद में गरजे सलमान खुर्शीद—"मनरेगा का नाम बदलने से गरीबी नहीं मिटेगी," राम मंदिर और वोटर लिस्ट पर सरकार से पूछे 5 तीखे सवाल
गाजियाबाद/नई दिल्ली, दिनांक: 12 जनवरी 2026— पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) ने आज गाजियाबाद में केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के जन्मदिन समारोह में शिरकत करने पहुंचे खुर्शीद ने मंच से भाजपा की नीतियों की जमकर बखिया उधेड़ी। उन्होंने मनरेगा से लेकर भ्रष्टाचार, चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी, दिल्ली दंगों और राम मंदिर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए लोकतंत्र की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
खुर्शीद का यह आक्रामक अंदाज बताता है कि कांग्रेस अब रक्षात्मक मुद्रा छोड़कर फ्रंट फुट पर खेलने की तैयारी में है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के दबाव ने भाजपा को घर-घर जाकर सफाई देने पर मजबूर कर दिया है।
मनरेगा पर वार: "नाम बदलना समाधान नहीं"
सलमान खुर्शीद ने ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा (MNREGA) योजना को कमजोर करने के प्रयासों पर सरकार को आड़े हाथों लिया।
- आजीविका का प्रश्न: उन्होंने कहा, "मनरेगा को हटाकर या उसका नाम बदलकर योजनाओं को खत्म नहीं किया जा सकता। अगर सरकार यह सोचती है कि केवल नाम बदल देने से गरीबों की जरूरतें खत्म हो जाएंगी, तो यह उसकी ऐतिहासिक भूल है।"
- अन्याय: खुर्शीद ने जोर देकर कहा कि मनरेगा करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है और इसे कमजोर करना जनता के साथ घोर अन्याय है।
भ्रष्टाचार के आरोप: "अपने गिरेबां में झांके भाजपा"
भाजपा द्वारा कांग्रेस पर लगातार लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर खुर्शीद ने पलटवार किया। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा हर मंच से कांग्रेस को कोसती है, लेकिन यह नहीं बताती कि भ्रष्टाचार कहां और कैसे हुआ।
- तर्क: उन्होंने कहा, "कांग्रेस हर जगह सत्ता में नहीं थी। जहां-जहां भाजपा के जनप्रतिनिधि रहे, क्या वहां सब दूध का धुला था? क्या वहां भ्रष्टाचार नहीं हुआ? सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।"
- अपमान: उन्होंने कहा कि पूरे देश और हर गांव को भ्रष्ट कहना हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था और समाज का अपमान है।
वोटर लिस्ट और 'नेवी चीफ' का उदाहरण
चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा उठाते हुए खुर्शीद ने विशेष गहन संशोधन (SIR) पर गंभीर सवाल खड़े किए।
- जानबूझकर कटौती: उन्होंने कहा, "नाम कटने से कष्ट नहीं होता, लेकिन जानबूझकर (Deliberately) नाम काटे जाने से कष्ट होता है। जो लोग जीवित हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट से कैसे गायब हो गए?"
- नेवी चीफ का जिक्र: खुर्शीद ने एक चौंकाने वाला उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि गोवा में रहने वाले भारतीय नौसेना के एक पूर्व चीफ का नाम भी वोटर लिस्ट से काट दिया गया। उन्होंने भावुक होकर पूछा, "जिन्होंने देश की सुरक्षा में पूरा जीवन लगा दिया, क्या अब उनका अस्तित्व ही नहीं रहा?" उन्होंने सरकार से ऐसी त्रुटियों को तुरंत सुधारने की अपील की।
राम मंदिर: "हमे राम से कोई अलग नहीं कर सकता"
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ के मौके पर खुर्शीद ने कांग्रेस के रुख को स्पष्ट किया, जिसे लेकर अक्सर भाजपा हमलावर रहती है।
- स्पष्टीकरण: उन्होंने साफ किया, "कांग्रेस ने कभी भगवान राम का बहिष्कार नहीं किया। हमने केवल भाजपा के 'राजनीतिक निमंत्रण' का बहिष्कार किया था। भगवान राम से कौन अलग हो सकता है और राम को कोई मना नहीं कर सकता।" यह बयान कांग्रेस की 'सॉफ्ट हिंदुत्व' और सर्वधर्म समभाव की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दिल्ली दंगे और जमानत: कोर्ट के फैसले का बचाव
दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर उन्होंने स्थिति साफ की। खुर्शीद ने कहा कि कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज नहीं की है, बल्कि उन्हें एक साल का समय दिया है क्योंकि वे उस अभियान को लीड कर रहे थे। उन्होंने मीडिया और विरोधियों पर इस मुद्दे को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
सलमान खुर्शीद का गाजियाबाद दौरा केवल जन्मदिन की बधाई तक सीमित नहीं था, बल्कि यह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कवायद थी। मनरेगा और वोटर लिस्ट जैसे जमीनी मुद्दों को उठाकर उन्होंने सरकार की दुखती रग पर हाथ रखा है।
The Trending People का विश्लेषण है कि नेवी चीफ का नाम वोटर लिस्ट से कटने का मुद्दा बेहद गंभीर है और यह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। वहीं, राम मंदिर पर उनका संतुलित बयान यह दर्शाता है कि कांग्रेस अब भाजपा को धार्मिक ध्रुवीकरण का मौका नहीं देना चाहती। खुर्शीद ने सही कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब सरकार विपक्ष के सवालों को सुने और अपनी गलतियों को सुधारे।
