वो 5 'महारथी' जिनके कदम कभी भारतीय पिच पर नहीं पड़े—ब्रैडमैन से लेकर एम्ब्रोस तक, एक अनसुलझी दास्तां और तीन दोस्तों का एक साथ संन्यास
नई दिल्ली, दिनांक: 12 जनवरी 2026 — क्रिकेट की दुनिया में भारत को आज 'पावरहाउस' और खेल का आध्यात्मिक घर माना जाता है। ईडन गार्डन्स का शोर हो या वानखेड़े का जोश, विदेशी खिलाड़ियों के लिए भारत में टेस्ट खेलना और जीतना किसी 'अंतिम सीमा' (Final Frontier) को फतह करने जैसा होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्रिकेट इतिहास के कुछ ऐसे महानतम खिलाड़ी भी रहे हैं, जिन्होंने अपने सुनहरे करियर में कभी भी भारतीय सरजमीं पर एक भी टेस्ट मैच नहीं खेला?
यह सूची चौंकाने वाली है क्योंकि इसमें 'क्रिकेट के भगवान' कहे जाने वाले सर डॉन ब्रैडमैन से लेकर वेस्टइंडीज के खूंखार गेंदबाज कर्टली एम्ब्रोस तक शामिल हैं। आज हम आपको उन 5 दिग्गजों के बारे में बताएंगे जिनके लिए भारत में खेलना एक अधूरा सपना (या शायद अनिच्छा) रहा, और उस ऐतिहासिक वाकये का भी जिक्र करेंगे जब इनमें से तीन दोस्तों ने एक साथ क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।
1. सर डॉन ब्रैडमैन: 'द डॉन' और भारत की दूरी
क्रिकेट के आंकड़ों में अगर कोई एवरेस्ट है, तो वह सर डॉन ब्रैडमैन (Sir Don Bradman) हैं। 99.94 का जादुई औसत रखने वाले ब्रैडमैन ने अपने करियर में 52 टेस्ट खेले, लेकिन एक भी भारत में नहीं।
- भारत के खिलाफ: उन्होंने भारत के खिलाफ 5 टेस्ट मैच खेले और 178.75 के अविश्वसनीय औसत से 715 रन बनाए (4 शतक), लेकिन ये सभी मैच ऑस्ट्रेलिया में खेले गए थे।
- कारण: कहा जाता है कि ब्रैडमैन भारत आने से परहेज करते थे, शायद स्वास्थ्य कारणों या तत्कालीन सुविधाओं के अभाव के चलते।
- कोलकाता कनेक्शन: डेली मेल के मुताबिक, ब्रैडमैन ने केवल एक बार बहुत कम समय के लिए भारतीय जमीन पर कदम रखा था। 1953 में एशेज कवर करने इंग्लैंड जाते समय उनका विमान ईंधन (Fuel) के लिए कलकत्ता (अब कोलकाता) एयरपोर्ट पर रुका था, जहां उन्होंने ट्रांजिट लाउंज में कुछ वक्त बिताया था।
2. डेनिस लिली: रफ्तार का सौदागर
70 और 80 के दशक में बल्लेबाजों के दिलों में खौफ भरने वाले ऑस्ट्रेलिया के डेनिस लिली (Dennis Lillee) को एक 'कम्प्लीट फास्ट बॉलर' माना जाता था।
- करियर: 70 टेस्ट में 355 विकेट लेने वाले लिली ने 7 बार पारी में 10 या उससे अधिक विकेट लिए।
- भारत के खिलाफ: उन्होंने भारत के खिलाफ 3 टेस्ट खेले और 21 विकेट झटके, लेकिन ये सभी मैच उनकी अपनी धरती (ऑस्ट्रेलिया) पर हुए। एमआरएफ पेस फाउंडेशन (चेन्नई) के जरिए भारतीय गेंदबाजों को तराशने वाले लिली अपने पीक समय में भारत में गेंदबाजी का जौहर नहीं दिखा पाए।
3. ग्रेग चैपल: कोच बनकर आए, खिलाड़ी बनकर नहीं
यह विडंबना ही है कि जो शख्स बाद में भारतीय टीम का विवादित कोच बना, उसने खिलाड़ी के तौर पर कभी भारत में टेस्ट नहीं खेला। ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज ग्रेग चैपल (Greg Chappell) ने 87 टेस्ट में 7110 रन बनाए और 24 शतक जड़े।
- रिकॉर्ड: उन्होंने अपने डेब्यू और आखिरी टेस्ट, दोनों में शतक जड़ने का अनोखा रिकॉर्ड बनाया था।
- भारत के खिलाफ: भारत के विरुद्ध खेले गए 3 टेस्ट मैचों में उन्होंने 73.60 के औसत से 368 रन बनाए, लेकिन ये सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में ही हुए। भारतीय स्पिनरों के खिलाफ टर्निंग ट्रैक पर उनकी परीक्षा कभी नहीं हो सकी।
4. रोडनी मार्श: विकेट के पीछे की दीवार
ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज विकेटकीपर रोडनी मार्श (Rodney Marsh) और डेनिस लिली की जोड़ी क्रिकेट जगत में मशहूर थी "Caught Marsh, Bowled Lillee"।
- आंकड़े: 96 टेस्ट में 3633 रन और 343 कैच लपकने वाले मार्श ने भी कभी भारत का दौरा नहीं किया।
- प्रदर्शन: उन्होंने भारत के खिलाफ 3 टेस्ट में 16 शिकार (15 कैच, 1 स्टंपिंग) किए, लेकिन यह कमाल उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई मैदानों पर ही दिखाया।
5. कर्टली एम्ब्रोस: वेस्टइंडीज का 6 फुटा खौफ
वेस्टइंडीज के 6 फीट 7 इंच लंबे गेंदबाज कर्टली एम्ब्रोस (Curtly Ambrose) अपनी उछाल और लाइन-लेंथ के लिए मशहूर थे। 98 टेस्ट में 405 विकेट लेने वाले एम्ब्रोस भारतीय बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द रहे।
- भारत के खिलाफ: उन्होंने भारत के खिलाफ 9 टेस्ट मैच खेले और 15 विकेट लिए। लेकिन संयोग देखिए, ये सभी 9 मैच वेस्टइंडीज की धरती पर खेले गए। भारतीय पिचों पर उनकी आग उगलती गेंदों का सामना करने का मौका भारतीय फैंस को कभी नहीं मिला।
जनवरी 1984: जब तीन दिग्गजों ने एक साथ कहा अलविदा
क्रिकेट इतिहास का एक भावुक और दुर्लभ पल जनवरी 1984 में सिडनी टेस्ट के दौरान आया था। ऑस्ट्रेलिया के तीन महानतम खिलाड़ियों— ग्रेग चैपल, डेनिस लिली और रोडनी मार्श—ने एक साथ संन्यास का ऐलान कर दिया था। यह एक युग का अंत था। दिलचस्प बात यह है कि ये तीनों ही वे खिलाड़ी थे जिन्होंने कभी भारत में टेस्ट नहीं खेला।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
इन महान खिलाड़ियों का भारत में न खेलना क्रिकेट इतिहास का एक बड़ा 'किंतु-परंतु' (What If) है। भारतीय पिचें, जो स्पिन के लिए मददगार होती हैं, विदेशी बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों के लिए सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती हैं। अगर ब्रैडमैन या चैपल ने यहां खेला होता, तो उनके आंकड़ों में क्या बदलाव आता, यह बहस का विषय है।
The Trending People का विश्लेषण है कि आधुनिक दौर में आईपीएल और द्विपक्षीय सीरीज के कारण अब ऐसा होना लगभग नामुमकिन है। विदेशी खिलाड़ी अब भारत को अपना 'दूसरा घर' मानते हैं। लेकिन उस दौर में लॉजिस्टिक्स और कम दौरों के कारण भारतीय फैंस इन दिग्गजों को अपनी आंखों के सामने खेलते देखने से वंचित रह गए। यह क्रिकेट के सुनहरे दौर की एक अधूरी दास्तां है।
