आसमान में 16,000 फीट पर 'मौत' से टकराया विमान—इंडिगो के 216 यात्रियों की सांसें अटकीं, वाराणसी में पायलट की सूझबूझ ने टाला बड़ा हादसा
वाराणसी/जौनपुर, दिनांक: 12 जनवरी 2026 — रविवार की शाम वाराणसी के आसमान में एक ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसने 216 यात्रियों और उनके परिजनों की धड़कनें रोक दीं। गोरखपुर से बेंगलुरु के लिए उड़ान भरने वाला इंडिगो एयरलाइंस (IndiGo Airlines) का एक विमान हवा में एक बड़े हादसे का शिकार होते-होते बचा। जौनपुर के ऊपर करीब 16,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते समय विमान एक पक्षी से टकरा गया (Bird Hit), जिससे विमान के नोज सेक्शन (Nose Section) को भारी नुकसान पहुंचा।
गनीमत रही कि पायलट ने अद्भुत संयम और सूझबूझ का परिचय दिया और विमान को तुरंत डायवर्ट कर वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (LBSI) पर सुरक्षित आपातकालीन लैंडिंग (Emergency Landing) करा दी। इस घटना ने एक बार फिर हवाई यात्रा में 'बर्ड हिट' के खतरों और सुरक्षा मानकों पर चर्चा छेड़ दी है।
15 मिनट बाद ही गूंजी खतरे की घंटी
घटनाक्रम के अनुसार, इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-437 ने रविवार शाम करीब 6 बजकर 25 मिनट पर गोरखपुर एयरपोर्ट से बेंगलुरु के लिए उड़ान भरी थी। विमान में 216 यात्री और क्रू मेंबर्स सवार थे। सब कुछ सामान्य लग रहा था।
- हादसा: उड़ान भरे अभी मुश्किल से 15 मिनट ही हुए थे और विमान जौनपुर के हवाई क्षेत्र में करीब 16,000 फीट की ऊंचाई पर क्रूज कर रहा था। तभी अचानक एक जोरदार आवाज के साथ एक बड़ा पक्षी विमान के अगले हिस्से (नोज) से टकरा गया।
- नुकसान: टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि विमान का रडार डोम (Nose Cone), जो बेहद संवेदनशील होता है और जिसमें मौसम रडार और नेविगेशन उपकरण होते हैं, क्षतिग्रस्त हो गया। कॉकपिट में खतरे के अलार्म बजने लगे।
पायलट का 'कॉल ऑफ ड्यूटी': एटीसी से संपर्क और डायवर्जन
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पायलट ने एक पल की भी देरी नहीं की।
- SOS: पायलट ने तुरंत वाराणसी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और 'पैन-पैन' (आपात स्थिति का संकेत) जारी करते हुए घटना की जानकारी दी।
- डायवर्जन: चूंकि विमान को लंबी दूरी तय करके बेंगलुरु जाना था और क्षति के साथ उड़ना जोखिम भरा था, इसलिए एटीसी ने विमान को तत्काल वाराणसी डायवर्ट करने की अनुमति दे दी।
- लैंडिंग: शाम करीब 6 बजकर 56 मिनट पर विमान ने वाराणसी एयरपोर्ट के रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग की। एयरपोर्ट पर पहले से ही फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस को अलर्ट मोड पर रखा गया था।
यात्रियों का हाल: दहशत, प्रार्थना और फिर राहत
विमान के अंदर का माहौल किसी डरावनी फिल्म जैसा था। यात्रियों ने बताया कि टक्कर के बाद विमान में हल्का झटका महसूस हुआ और पायलट की घोषणा के बाद सब सहम गए।
- अफरा-तफरी: 216 यात्री अपनी जान की सलामती की दुआ मांग रहे थे। जब विमान वाराणसी में लैंड हुआ और रुका, तब जाकर लोगों की जान में जान आई।
- सुरक्षित निकासी: रात करीब 8 बजकर 40 मिनट पर सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से विमान से उतारा गया। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन कई यात्री सदमे (Trauma) में नजर आए।
तकनीकी जांच और आगे की व्यवस्था
इमरजेंसी लैंडिंग के बाद इंडिगो की तकनीकी टीम (Engineering Team) ने विमान का निरीक्षण शुरू कर दिया है। शुरुआती जांच में नोज सेक्शन में बड़ा डेंट और दरारें देखी गई हैं।
- फ्लाइट रद्द: सुरक्षा नियमों के तहत एयरलाइन ने आगे की उड़ान को रद्द कर दिया है।
- यात्री सुविधा: फंसे हुए यात्रियों के लिए एयरलाइन ने स्थानीय होटलों में ठहरने और भोजन की व्यवस्था की है। कुछ यात्रियों को दूसरी उड़ानों से भेजने का विकल्प दिया गया है, जबकि अन्य के लिए रिफंड की प्रक्रिया शुरू की गई है।
16,000 फीट पर पक्षी? विशेषज्ञों की राय
आमतौर पर पक्षी कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, लेकिन 16,000 फीट पर बर्ड हिट होना एक दुर्लभ और चिंताजनक घटना है। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि यह शायद कोई प्रवासी पक्षी (Migratory Bird) या गिद्ध जैसा बड़ा पक्षी हो सकता है जो इतनी ऊंचाई तक उड़ सकता है।
- खतरा: बर्ड हिट अगर इंजन में हो जाता तो इंजन फेल हो सकता था, जिससे स्थिति भयावह हो सकती थी। नोज पर टक्कर ने नेविगेशन सिस्टम को प्रभावित किया हो सकता है, लेकिन पायलट ने स्थिति को संभाल लिया।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
वाराणसी में टला यह हादसा ईश्वर की कृपा और पायलट की दक्षता का परिणाम है। 216 जिंदगियों को सुरक्षित जमीन पर उतारना कोई छोटी बात नहीं है। इंडिगो के पायलट और एटीसी की त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) की सराहना की जानी चाहिए।
The Trending People का विश्लेषण है कि यह घटना विमानन सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है। हवाई अड्डों के आसपास पक्षियों की गतिविधि को रोकने के लिए और अधिक सख्त कदम उठाने की जरूरत है। हालांकि, इतनी ऊंचाई पर पक्षी से टकराना 'बैड लक' है, लेकिन तकनीक और प्रशिक्षण ने इसे त्रासदी बनने से रोक लिया। हम सभी यात्रियों की सुरक्षा की कामना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे जल्द अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे।
