भारतीय सड़कों पर 'ADAS' का रियलिटी चेक—क्या यह सुरक्षा का 'कवच' है या महंगा 'सिरदर्द'?
नई दिल्ली, दिनांक: 12 जनवरी 2026 — भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इन दिनों एक नया 'बज़वर्ड' (Buzzword) छाया हुआ है— ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम)। जब भी हम किसी नई एसयूवी या प्रीमियम सेडान का विज्ञापन देखते हैं, तो यह शब्द सबसे ऊपर होता है। दिमाग में एक ऐसी हाई-टेक कार की छवि बनती है जो खुद-ब-खुद ब्रेक मार ले, अपनी लेन में चले और दुर्घटना होने से पहले ही ड्राइवर को अलर्ट कर दे। विदेशों में यह तकनीक निश्चित रूप से 'जीवन रक्षक' साबित हुई है।
लेकिन, जब बात भारतीय सड़कों की आती है—जहां ट्रैफिक के नियम कम और 'जुगाड़' ज्यादा चलता है, जहां गाएं और कुत्ते अचानक प्रकट हो जाते हैं, और जहां लेन ड्राइविंग (Lane Driving) एक दुर्लभ दृश्य है—तो एक बड़ा और वाजिब सवाल खड़ा होता है: क्या ADAS तकनीक भारत के लिए वरदान है या एक महंगा सिरदर्द? आइए इस तकनीक की तह तक जाते हैं।
आखिर क्या है ADAS? (आसान शब्दों में)
तकनीकी शब्दावली से परे, अगर आसान शब्दों में कहें तो ADAS कार में लगे सेंसर, कैमरा, रडार और सॉफ्टवेयर का एक स्मार्ट पैकेज है। यह कार को आसपास के खतरे भांपने में मदद करता है और कई बार ड्राइवर से तेज प्रतिक्रिया देता है।
इसके 3 प्रमुख फीचर्स:
- ऑटो इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB): अगर कार के सामने अचानक कोई वस्तु, गाड़ी या इंसान आ जाए और ड्राइवर ब्रेक न लगाए, तो कार खुद ब्रेक लगा देती है।
- लेन कीप असिस्ट (LKA): यह फीचर कार को सड़क की सफेद लाइनों के बीच रखता है। अगर कार बिना इंडिकेटर दिए लाइन से बाहर जाती है, तो स्टीयरिंग खुद उसे वापस अंदर ले आता है।
- अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल (ACC): यह हाईवे पर बहुत काम आता है। यह आगे वाली गाड़ी की स्पीड के हिसाब से अपनी स्पीड कम या ज्यादा करता है और एक सुरक्षित दूरी बनाए रखता है।
क्यों है यह 'वरदान'? (सुरक्षा का पहलू)
अगर सही परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाए, तो ADAS किसी चमत्कार से कम नहीं है।
गलतियों की गुंजाइश कम: भारतीय सड़कों पर होने वाली अधिकांश दुर्घटनाएं मानवीय चूक (Human Error), थकान या ध्यान भटकने की वजह से होती हैं। ADAS थके हुए ड्राइवर के लिए 'तीसरी आंख' का काम करता है।
हाईवे पर सुकून: यमुना एक्सप्रेसवे या मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग जैसे आधुनिक एक्सप्रेसवे पर, जहां लेन मार्किंग स्पष्ट है, 'अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल' ड्राइवर की थकान को 80% तक कम कर देता है।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा: भारत में सड़क पार करते समय पैदल यात्रियों की मौत के आंकड़े डराने वाले हैं। ADAS के सेंसर अचानक सामने आने वाले बच्चों या जानवरों को पहचान कर मिली-सेकंड में ब्रेक लगा सकते हैं, जिससे कई जानें बच सकती हैं।
क्यों बन जाता है 'सिरदर्द'? (जमीनी हकीकत)
सिक्के का दूसरा पहलू भारत की अराजक ट्रैफिक व्यवस्था है, जो कई बार इस स्मार्ट सिस्टम को भी 'कंफ्यूज' कर देती है।
1. बेतरतीब ट्रैफिक और 'कट' मारना: भारत में लोग अक्सर बिना इंडिकेटर दिए लेन बदलते हैं या अचानक कट मारते हैं। ऐसे में 'लेन कीप असिस्ट' जैसा फीचर स्टीयरिंग को अचानक घुमा सकता है या वाइब्रेट कर सकता है, जो नए ड्राइवर को डरा सकता है और दुर्घटना का कारण भी बन सकता है।
2. फैंटम ब्रेकिंग (Phantom Braking): यह सबसे बड़ी समस्या है। संकरी गलियों या भीड़भाड़ वाले इलाकों में, जहां बाइक और रिक्शा कार के बहुत करीब (सटाकर) चलते हैं, वहां ADAS सेंसर को लगता है कि टक्कर होने वाली है। सिस्टम बार-बार जोरदार इमरजेंसी ब्रेक लगा सकता है।
- नतीजा: कार तो रुक जाती है, लेकिन पीछे से आ रही गाड़ी या बाइक सवार आपकी कार से टकरा सकता है।
4. लापरवाही को बढ़ावा: सबसे खतरनाक पहलू इसका दुरुपयोग है। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं जहां लोग ADAS ऑन करके स्टीयरिंग छोड़ देते हैं, खाना खाते हैं या रील (Reels) बनाते हैं। वे इसे 'सेल्फ-ड्राइविंग' (Tesla जैसी) समझने की भूल करते हैं, जबकि यह केवल एक 'सहायक' (Assist) तकनीक है। यह जानलेवा मूर्खता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
ADAS कोई जादू की छड़ी नहीं है, बल्कि एक औजार है। इसकी सफलता मशीन से ज्यादा इंसान की समझदारी पर निर्भर करती है। भारत में ADAS अभी अपने शुरुआती चरण (Nascent Stage) में है।
The Trending People का विश्लेषण है कि अगर आप शहर के बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक में इसे ऑन रखते हैं, तो यह निश्चित रूप से एक सिरदर्द साबित होगा। लेकिन अगर आप हाईवे पर लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, तो यह एक जीवन रक्षक वरदान है। कार कंपनियों को भी चाहिए कि वे भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से ADAS को 'ट्यून' (Calibrate) करें। अंततः, ड्राइवर को यह याद रखना होगा कि स्टीयरिंग और ब्रेक पर असली नियंत्रण उसका ही होना चाहिए, सेंसर का नहीं। तकनीक को 'सहयोगी' बनाएं, 'मालिक' नहीं।
