योजनाएं बहुत, पर जमीन पर गैप'—बजट से पहले स्टार्टअप्स का दर्द, बैंकों की शर्तें और टैक्स के जंजाल से मुक्ति की गुहार
नई दिल्ली, दिनांक: 12 जनवरी 2026 — भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम (Startup Ecosystem) कहा जाता है, लेकिन चमकते हुए यूनिकॉर्न्स की सुर्खियों के पीछे एक संघर्ष की कहानी भी है। आगामी केंद्रीय बजट (Union Budget 2026) से पहले देश के स्टार्टअप उद्योग ने अपनी चुनौतियों और उम्मीदों का पिटारा खोल दिया है। उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि सरकार की तमाम महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद, नीतियों और उनके क्रियान्वयन (Implementation) में अभी भी एक बड़ा 'गैप' मौजूद है।
खासकर नए और युवा स्टार्टअप्स के लिए फंड जुटाना आज भी एवरेस्ट चढ़ने जैसा मुश्किल है। इसके अलावा, जटिल टैक्स नियम और नियामकीय अनुपालन (Regulatory Compliance) की बेड़ियों ने उनकी रफ्तार को धीमा कर दिया है। स्टार्टअप फाउंडर्स अब वित्त मंत्री से केवल 'घोषणाओं' की नहीं, बल्कि ठोस 'समाधान' की उम्मीद कर रहे हैं।
बैंकों के दरवाजे पर 'नो एंट्री': कोलेटरल का चक्रव्यूह
स्टार्टअप फाउंडर्स का सबसे बड़ा दर्द फंडिंग तक पहुंच को लेकर है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियां कागजों पर तो शानदार हैं, लेकिन बैंक उन्हें जमीन पर उतारने में आनाकानी करते हैं।
- योजनाएं बनाम हकीकत: सरकार ने स्टार्टअप्स की मदद के लिए CGTMSE (क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज), मुद्रा योजना और PMEGP जैसी कई स्कीम्स चला रखी हैं। इनका उद्देश्य बिना गारंटी के लोन देना है।
- बैंकों की मनमानी: लेकिन जब उद्यमी बैंक या एनबीएफसी (NBFC) के पास जाते हैं, तो उनसे भारी-भरकम कोलेटरल (गिरवी रखने के लिए संपत्ति) की मांग की जाती है। अधिकांश युवा उद्यमियों के पास गिरवी रखने के लिए संपत्ति नहीं होती, जिससे वे इन योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।
मांग: सेक्टर ने सरकार से अपील की है कि वह कर्ज बांटने वाले संस्थानों को सख्त और स्पष्ट गाइडलाइन जारी करे, ताकि लोन के गारंटी मैकेनिज्म को पूरी तरह और ईमानदारी से लागू किया जा सके।
मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप्स: 'बिक्री पर सब्सिडी' का फॉर्मूला
घरेलू विनिर्माण (Make in India) को बढ़ावा देने में जुटे स्टार्टअप्स ने एक नई मांग रखी है। कई फाउंडर्स का कहना है कि उन्हें उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए केवल निवेश आधारित नहीं, बल्कि 'वास्तविक बिक्री' (Actual Sales) आधारित प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
सुझाव: उनका तर्क है कि अगर सरकार वाहनों या उत्पादों की वास्तविक बिक्री के आधार पर सब्सिडी देती है, तो इससे न केवल विनिर्माण क्षमता मजबूत होगी, बल्कि बाजार में मांग भी बढ़ेगी। इससे स्टार्टअप्स को तकनीक में निवेश करने और स्केल-अप करने में आसानी होगी।
जीएसटी और टैक्स का 'मकड़जाल': 1 करोड़ की लिमिट चाहिए
स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन का बोझ (Compliance Burden) एक बड़ी सिरदर्दी है। एक छोटी टीम को अपने मुख्य काम (Innovation) से ज्यादा समय सीए और वकीलों के चक्कर काटने में बिताना पड़ता है।
- जीएसटी लिमिट: स्टार्टअप सेक्टर के प्रतिनिधियों ने एक सुर में मांग की है कि जीएसटी पंजीकरण (GST Registration) की अनिवार्य सीमा को मौजूदा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 1 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए। इससे छोटे और शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को कागजी कार्रवाई से राहत मिलेगी।
- टैक्स लाभ: एडुटेक (Edutech) और स्किल डेवलपमेंट सेक्टर में काम करने वाले स्टार्टअप्स ने विशेष टैक्स छूट की मांग की है। उनका कहना है कि वे देश के भविष्य को तैयार कर रहे हैं, इसलिए उन्हें प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
सामाजिक बदलाव के सिपाहियों को चाहिए 'कवच'
केवल मुनाफा कमाने वाले नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े स्टार्टअप्स भी सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।
- फोकस एरिया: बचपन के विकास (Early Childhood Development), मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए बजट में विशेष आवंटन की मांग की गई है।
- सरल फंडिंग: इन क्षेत्रों में काम करना मुश्किल होता है और रिटर्न देर से मिलता है, इसलिए इनके लिए 'आसान फंडिंग' और 'सरल कम्प्लायंस' की व्यवस्था की जानी चाहिए।
रोजगार और कौशल विकास: बजट का मूल मंत्र
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि बजट का असल मकसद केवल आंकड़े पेश करना नहीं, बल्कि नियोक्ताओं के भरोसे को मजबूत करना होना चाहिए। श्रम सुधारों (Labor Reforms) के जरिए कंपनियों को अपना प्रशिक्षण बजट बढ़ाने और तकनीक के जरिए युवाओं के कौशल विकास को बढ़ावा देने का मौका दिया जाना चाहिए।
हमारी राय
स्टार्टअप्स केवल कंपनियां नहीं हैं, वे भारत के '5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' के सपने के इंजन हैं। अगर इंजन में ही तेल (फंड) नहीं होगा या वह जंजीरों (नियमों) में जकड़ा रहेगा, तो गाड़ी आगे कैसे बढ़ेगी?
The Trending People का विश्लेषण है कि बैंकों द्वारा कोलेटरल की मांग करना सरकार की 'स्टार्टअप इंडिया' मुहिम की आत्मा के खिलाफ है। सरकार को इस बजट में 'क्रेडिट गारंटी' को केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक अधिकार बनाना होगा। जीएसटी सीमा बढ़ाना एक साहसिक कदम हो सकता है, जो 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' रैंकिंग में भारत को ऊपर ले जाएगा। उम्मीद है कि वित्त मंत्री इस बार स्टार्टअप्स की 'विशलिस्ट' पर 'टिक' जरूर लगाएंगी।
