बॉलीवुड की 'अनोखी' लव स्टोरी—तलाक के 4 साल बाद फिर 'एक्स' के प्यार में पड़े गुलशन देवैया, बोले- "थेरेपी ने सिखाया रिश्तों को जीना
मुंबई, दिनांक: 12 जनवरी 2026 — बॉलीवुड की दुनिया में अक्सर रिश्तों के बनने और बिगड़ने की खबरें सुर्खियों में रहती हैं। ब्रेकअप और तलाक के बाद कड़वाहट की कहानियां तो हमने बहुत सुनी हैं, लेकिन अभिनेता गुलशन देवैया (Gulshan Devaiah) ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने मॉडर्न रिलेशनशिप की परिभाषा ही बदल दी है। 'हंटर' और 'दहाड़' जैसी वेब सीरीज में अपनी दमदार एक्टिंग के लिए मशहूर गुलशन ने बताया है कि वे अपनी पूर्व पत्नी (Ex-Wife) कल्लिरोई त्जियाफेटा (Kallirroi Tziafeta) को दोबारा डेट कर रहे हैं।
यह बात सुनने में भले ही किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगे, लेकिन हकीकत में यह एक बेहद सधी हुई और परिपक्व (Mature) कहानी है। इसमें ड्रामा नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ, आत्मचिंतन और रिश्तों की गहरी समझ शामिल है। 2020 में तलाक लेने वाला यह जोड़ा 2024 में फिर एक-दूसरे के करीब आया है, और इसका श्रेय वे 'कपल्स थेरेपी' को देते हैं।
2012 से 2024: शादी, अलगाव और फिर वापसी का सफर
गुलशन और कल्लिरोई की कहानी समय के साथ बदलती रही है।
शादी: दोनों की शादी साल 2012 में हुई थी। करीब आठ साल साथ रहने के बाद, 2020 में उन्होंने अलग होने का फैसला किया। उस वक्त गुलशन ने इसे निजी कारण बताते हुए ज्यादा कुछ साझा नहीं किया था।बदलाव: समय बीतने के साथ दोनों की सोच और हालात बदले। साल 2024 में वे फिर से एक-दूसरे के संपर्क में आए।
नया अध्याय: गुलशन के मुताबिक, वे अब एक-दूसरे को दोबारा समझने और जानने के लिए डेट कर रहे हैं। यह फैसला कोई जल्दबाजी में लिया गया कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे खुद को समझने की एक लंबी प्रक्रिया और काफी सोच-विचार रहा है।
कपल्स थेरेपी: वो 'जादू' जिसने दी रिश्ते को दूसरी सांस
SCREEN Spotlight से खास बातचीत में गुलशन ने अपनी लव स्टोरी के 'रीबूट' होने का सीक्रेट साझा किया। उन्होंने बताया कि इस रिश्ते को दोबारा शुरू करने में 'कपल्स थेरेपी' (Couples Therapy) ने सबसे बड़ी और निर्णायक भूमिका निभाई।
गुलशन ने कहा:
"सिर्फ प्यार होना काफी नहीं होता। अपनी गलतियों को पहचानना और उन्हें सुधारने की ईमानदार कोशिश करना भी जरूरी होता है। हम दोनों नियमित तौर पर एक प्रोफेशनल से बात करते हैं। थेरेपी ने हमें यह समझने में मदद की कि पहले कहां चूक हुई थी और अब उसे दोहराने से कैसे बचा जा सकता है।"
यह बयान उन लोगों के लिए एक सबक है जो थेरेपी को टैबू मानते हैं। गुलशन ने स्वीकार किया कि थेरेपी ने उन्हें एक सुरक्षित जगह दी जहां वे बिना किसी डर के अपनी बात रख सके।
क्यों टूटा था रिश्ता? अब समझ आई वजह
जब गुलशन से पूछा गया कि क्या वे अब समझ पाते हैं कि पहली बार क्या गलत हुआ था, तो उन्होंने बेहद ईमानदारी से जवाब दिया।
करियर का दबाव: उन्होंने कहा, "अलगाव की कभी कोई एक वजह नहीं होती। उस समय मैं अपने करियर और जिंदगी को लेकर काफी दबाव में था। काम की अनिश्चितता और मानसिक उलझनें मुझ पर हावी थीं।"
अकेलापन: गुलशन ने माना कि भले ही वे अपनी पत्नी से प्यार करते थे, लेकिन कई बार उन्हें अकेले रहने (Solitude) की सख्त जरूरत महसूस होती थी। उस वक्त वे अपनी भावनाओं को सही तरीके से कम्युनिकेट नहीं कर पाए थे, जिसे अब वे थेरेपी के जरिए बेहतर समझ रहे हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? (Medical Perspective)
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मनोचिकित्सक डॉ. मुरली कृष्णा का मानना है कि पुराने रिश्तों में दोबारा लौटने का फैसला अक्सर तब लिया जाता है, जब इंसान भावनात्मक रूप से ज्यादा समझदार हो जाता है।
दूरी का फायदा: डॉ. कृष्णा कहते हैं, "दूरी कई बार इंसान को खुद को बेहतर तरीके से समझने का मौका देती है। समय के साथ गुस्सा कम होता है, बातचीत बेहतर होती है और व्यक्ति अपने पार्टनर से ज्यादा वास्तविक उम्मीदें (Realistic Expectations) रखने लगता है।"
थेरेपी की भूमिका: पुराने रिश्तों में लौटते समय बीते दर्द और भरोसे की कमी फिर से सामने आ सकती है। थेरेपी इससे निपटने का टूल देती है, ताकि गलत कम्युनिकेशन पैटर्न (Communication Patterns) दोबारा न पनपें।
आसान नहीं था 'यू-टर्न': एंग्जायटी से लड़ी जंग
गुलशन ने यह भी स्वीकार किया कि एक्स-वाइफ को दोबारा डेट करना आसान नहीं था। इसमें डर और हिचकिचाहट थी।
मानसिक स्वास्थ्य: उन्होंने बताया कि उन्हें एंग्जायटी (Anxiety) की समस्या है, लेकिन वे इसके लिए दवा नहीं लेते। इसके बजाय, उन्होंने अपनी परेशानी और उसके ट्रिगर्स को समझने की कोशिश की। थेरेपी और आत्मचिंतन से उन्हें मानसिक रूप से मजबूत होने में मदद मिली।
सबका अलग रास्ता: उन्होंने कहा, "हर इंसान की परेशानी और समाधान अलग होता है। जो तरीका मेरे लिए काम आया, जरूरी नहीं कि वह सबके लिए सही हो।"
शादी पर भरोसा कायम
इतने उतार-चढ़ाव के बावजूद, गुलशन का शादी की संस्था से विश्वास नहीं उठा है। उनका कहना है, "मुझे शादी का कॉन्सेप्ट आज भी पसंद है। भले ही पहली बार मैं इसमें पूरी तरह सफल नहीं हो पाया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शादी मेरे लिए नहीं है।" उनकी कहानी बताती है कि रिश्ता 'परफेक्ट' नहीं होता, उसे 'परफेक्ट' बनाने के लिए लगातार काम करना पड़ता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
गुलशन देवैया की यह कहानी बॉलीवुड के ग्लैमर के बीच एक बहुत ही मानवीय और संवेदनशील पहलू को उजागर करती है। अक्सर हम 'मूव ऑन' (Move On) करने को ही एकमात्र विकल्प मान लेते हैं, लेकिन गुलशन ने 'मूव बैक' (Move Back) करके यह साबित किया है कि अगर प्यार और सम्मान बाकी है, तो रिश्तों को दूसरा मौका दिया जा सकता है।
The Trending People का विश्लेषण है कि कपल्स थेरेपी को लेकर उनकी खुलासे ने एक सकारात्मक संदेश दिया है। मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों की जटिलताओं पर खुलकर बात करना एक प्रगतिशील समाज की निशानी है। यह लव स्टोरी सिखाती है कि अलग होना 'अंत' नहीं है, और साथ आना 'कमजोरी' नहीं। यह सब परिपक्वता और समय का खेल है।
