आतिशी विवाद को लेकर पंजाब की राजनीति में उबाल लगातार बढ़ता जा रहा है। जालंधर में एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मुद्दा अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। एक के बाद एक राजनीतिक नेता सामने आकर इस मामले पर बयानबाजी कर रहे हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महासचिव तरुण चुघ का तीखा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) पर सिख गुरुओं के अपमान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
तरुण चुघ ने कहा कि आम आदमी पार्टी अब “गुरुओं का अपमान करने वालों की शरणस्थली” बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस का इस्तेमाल आतिशी को बचाने के लिए किया जा रहा है और इसके लिए जानबूझकर झूठी एफआईआर दर्ज करवाई गई है। चुघ के मुताबिक, यह पूरा मामला सच्चाई को दबाने और राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है।
विधानसभा वीडियो को लेकर बड़ा दावा
भाजपा महासचिव ने दावा किया कि विधानसभा की हर कार्यवाही आधिकारिक तौर पर वीडियो रिकॉर्ड होती है और वही विधानसभा की प्रमाणिक कार्यवाही मानी जाती है। उन्होंने कहा कि खुद विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने स्वीकार किया है कि उनके पास ऐसे वीडियो मौजूद हैं, जिनमें आतिशी द्वारा आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। चुघ ने कहा कि जब वीडियो सबूत मौजूद हैं, तो फिर सच्चाई से भागने और झूठी एफआईआर के सहारे बचाव करने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
AAP पर सच्चाई दबाने का आरोप
तरुण चुघ ने आम आदमी पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी पूरे मामले में राजनीतिक ड्रामा रच रही है। उनका आरोप है कि AAP सिख गुरुओं के अपमान से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय, आलोचकों को डराने के लिए एफआईआर का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में झूठ की राजनीति करने वाली आम आदमी पार्टी अब पंजाब में भी वही मॉडल लागू कर रही है।
इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग
भाजपा महासचिव ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने आतिशी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से तत्काल इस्तीफे की मांग की। चुघ ने कहा कि दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की जानी चाहिए, ताकि यह संदेश जाए कि सिख गुरुओं की आस्था और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
सिख आस्था और बलिदान का मुद्दा
तरुण चुघ ने अपने बयान में सिख इतिहास और बलिदानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी लगातार सिखों की आस्था का अपमान कर रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “अगर सिख न होते, तो आज हिंदुस्तान में न हिंदू होते और न ही सिख। सिख गुरुओं के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस विवाद में आगे प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
Our Thoughts
आतिशी विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया है कि संवेदनशील धार्मिक मुद्दे भारतीय राजनीति में कितनी जल्दी बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले लेते हैं। जहां एक ओर भाजपा इसे सिख आस्था और सम्मान से जोड़कर सरकार पर हमला कर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी पर आरोप है कि वह कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक ढाल के रूप में कर रही है। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होगी या फिर यह विवाद सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा। लोकतंत्र में आस्था और अभिव्यक्ति—दोनों का संतुलन बेहद जरूरी है, और यही संतुलन इस विवाद की असली कसौटी बनेगा।
