हर साल जनवरी महीने को Thyroid Awareness Month के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को थायराइड ग्रंथि से जुड़ी बीमारियों, उनके लक्षणों और समय पर जांच की अहमियत के प्रति जागरूक करना है। थायराइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्मोन बैलेंस, ऊर्जा स्तर, मूड और कई जरूरी अंगों के कामकाज को नियंत्रित करती है। ऐसे में जब इसमें गड़बड़ी होती है, तो इसका असर पूरे शरीर पर दिखाई देता है।
भारत में बड़ी संख्या में लोग Hypothyroidism से जूझ रहे हैं। कई मामलों में दवाएं लेने के बावजूद थकान, त्वचा का रूखापन, बालों का झड़ना, वजन बढ़ना और पाचन संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं।
डाइटीशियन ने क्या बताया
एक डाइटीशियन ने सोशल मीडिया पर साझा जानकारी में बताया कि अगर हाइपोथायराइडिज्म के मरीजों में दवा लेने के बावजूद लक्षण ठीक नहीं हो रहे हैं, तो यह ऑटोइम्यून हाइपोथायराइडिज्म (हाशीमोटो डिजीज) का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में शरीर में सूजन (Inflammation) अहम भूमिका निभाती है।
डाइटीशियन के मुताबिक, ऐसे मामलों में सिर्फ दवा ही नहीं, बल्कि एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट और लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। इसी संदर्भ में उन्होंने एक खास एंटी-इंफ्लेमेटरी हर्बल चाय का जिक्र किया है, जो लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकती है।
66 दिनों तक अपनाने की सलाह
डाइटीशियन का कहना है कि इस हर्बल चाय को लगातार करीब 66 दिनों तक अपनाने से शरीर की सूजन कम करने में मदद मिल सकती है और थायराइड से जुड़े कुछ लक्षणों में सुधार देखा जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यह चाय इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक उपाय है।
थायराइड के मरीजों को नियमित रूप से थायराइड पैनल टेस्ट कराते रहना चाहिए और किसी भी बदलाव के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
हर्बल चाय बनाने का आसान तरीका
एक बर्तन में एक कप पानी लें।
इसमें धनिया के दाने, काला जीरा, हल्दी, एक चुटकी दालचीनी, आधा चम्मच सूखा अदरक पाउडर और एक छोटा चम्मच मोरिंगा पाउडर डालें।
अंत में काली मिर्च डालकर पानी को अच्छी तरह उबालें।
छानने के बाद इसमें थोड़ा काला नमक और नींबू का रस मिलाकर सेवन करें।
क्यों मानी जाती है फायदेमंद
इस हर्बल चाय में मौजूद सामग्री को सूजन कम करने और पाचन सुधारने वाला माना जाता है।
धनिया और काला जीरा पाचन तंत्र को सपोर्ट करते हैं।
हल्दी और काली मिर्च में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
दालचीनी ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद कर सकती है।
मोरिंगा पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो ओवरऑल हेल्थ को सपोर्ट करता है।
जरूरी सावधानी
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहद जरूरी है, खासकर अगर आप पहले से थायराइड की दवाएं ले रहे हैं। बिना सलाह के किसी उपाय पर निर्भर रहना नुकसानदेह हो सकता है।
Our Thoughts
Thyroid Awareness Month लोगों को यह याद दिलाता है कि थायराइड सिर्फ एक छोटी ग्रंथि नहीं, बल्कि पूरे शरीर की सेहत से जुड़ा अहम हिस्सा है। दवाओं के साथ सही खानपान और सूजन को नियंत्रित करने वाले उपाय थायराइड मैनेजमेंट में मददगार हो सकते हैं, लेकिन मेडिकल सलाह को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
