भारतीय स्टार्टअप्स को अब मिलेगी 'ग्लोबल उड़ान'—गूगल ने लॉन्च किया 'बाजार पहुंच कार्यक्रम', एआई की दुनिया में मेडजेम्मा और फंक्शनजेम्मा की एंट्री
नई दिल्ली, दिनांक: 16 जनवरी 2026 — भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम (Startup Ecosystem) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में गुरुवार को एक बड़ा और क्रांतिकारी अध्याय जुड़ गया। दिग्गज वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल (Google) ने भारतीय स्टार्टअप्स की क्षमता पर भरोसा जताते हुए एक महत्वाकांक्षी ‘बाजार पहुंच कार्यक्रम’ (Market Access Program) की शुरुआत की है। इस पहल का सीधा मकसद भारत में तैयार हो रहे अनूठे एआई प्रयोगों को स्थानीय सीमाओं से निकालकर वैश्विक बाजार के पटल पर रखना है।
इसके साथ ही, गूगल ने अपनी तकनीकी झोली से कुछ और नायब तोहफे निकाले हैं। कंपनी ने अपने ओपन-सोर्स मॉडल समूह 'जेम्मा' (Gemma) का विस्तार करते हुए इसमें नए और उन्नत एआई मॉडल जोड़ने की घोषणा की है, जो स्वास्थ्य और मोबाइल कंप्यूटिंग के क्षेत्र में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।
क्या है 'बाजार पहुंच कार्यक्रम'? (Local to Global)
गूगल द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह कार्यक्रम उन भारतीय स्टार्टअप्स के लिए एक लॉन्चपैड का काम करेगा जो अपने शुरुआती चरण (Early Stage) से आगे निकल चुके हैं और अब बड़े स्तर पर स्केलिंग (Scaling) के लिए तैयार हैं।
- उद्देश्य: इसका मुख्य लक्ष्य एआई-आधारित स्टार्टअप्स को मदद करना है ताकि वे स्थानीय स्तर पर किए गए अपने सफल प्रयोगों (Use Cases) को सीधे वैश्विक बाजारों तक ले जा सकें।
- जरूरत: अक्सर देखा गया है कि भारतीय स्टार्टअप्स के पास तकनीक तो शानदार होती है, लेकिन ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने का नेटवर्क और संसाधन नहीं होते। गूगल का यह प्रोग्राम उस 'ब्रिज' का काम करेगा।
जेम्मा परिवार में नए सदस्य: मेडजेम्मा और फंक्शनजेम्मा
गूगल ने अपने एआई शस्त्रागार में दो नए और बेहद विशिष्ट मॉडल शामिल किए हैं:
मेडजेम्मा 1.5 (MedGemma 1.5): यह मॉडल विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र (Healthcare Sector) के लिए डिजाइन किया गया है।
खासियत: यह उन्नत एआई जरूरतों को पूरा करेगा, जैसे मेडिकल डेटा का विश्लेषण, बीमारियों की भविष्यवाणी और रिसर्च में मदद। भारत जैसे देश में जहां स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव है, यह मॉडल डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के लिए एक शक्तिशाली साथी बन सकता है।
फंक्शनजेम्मा (FunctionGemma): यह एक 'हल्का' (Lightweight) मॉडल है।
उपयोग: इसे मोबाइल और अन्य उपकरणों (On-device AI) पर सुरक्षित और तेज गति से काम करने के लिए बनाया गया है। यह इंटरनेट के बिना भी जटिल गणनाएं करने में सक्षम होगा, जो दूरदराज के इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकता है।
15 अरब डॉलर का निवेश और 'ग्रीन एआई'
गूगल की यह पहल हवा में नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस बुनियादी ढांचा है। कंपनी ने आंध्र प्रदेश में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।
- विशाखापत्तनम हब: कंपनी पहले ही आंध्र प्रदेश में एआई बुनियादी ढांचा केंद्र के लिए 15 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश की घोषणा कर चुकी है। विशाखापत्तनम में स्थापित हो रहा यह वैश्विक एआई केंद्र पूरी तरह से हरित ऊर्जा (Green Energy) से संचालित होगा।
- कंप्यूटिंग पावर: इसमें गूगल के सबसे उन्नत एआई चिप्स का इस्तेमाल होगा, जिससे भारतीय स्टार्टअप्स को वह 'हाई कंप्यूटिंग पावर' मिलेगी जो अब तक केवल सिलिकॉन वैली की कंपनियों के पास थी।
"एआई अब सिर्फ लैब में नहीं": प्रीति लोबाना
इस मौके पर गूगल की क्षेत्रीय प्रबंधक (भारत) प्रीति लोबाना ने एक महत्वपूर्ण बात कही जो एआई के बदलते स्वरूप को दर्शाती है। उन्होंने कहा:
"एआई अब सिर्फ अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग जैसे वास्तविक क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। भारतीय स्टार्टअप्स अब एआई का सिर्फ प्रयोग (Experiment) नहीं कर रहे, बल्कि वे अपनी क्षमता को भरोसेमंद उत्पादों और सस्टेनेबल कारोबार में बदल रहे हैं।"
भारतीय स्टार्टअप्स के लिए इसके मायने
यह घोषणा भारतीय तकनीकी क्षेत्र के लिए एक 'टर्निंग पॉइंट' है।
- संसाधन: अब स्टार्टअप्स को महंगे सर्वर और कंप्यूटिंग पावर के लिए विदेश नहीं झांकना होगा।
- मेंटरशिप: 'बाजार पहुंच कार्यक्रम' के तहत उन्हें गूगल के वैश्विक विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिलेगा।
- स्वास्थ्य क्रांति: मेडजेम्मा जैसे मॉडल्स के आने से हेल्थ-टेक (HealthTech) स्टार्टअप्स को अपनी डायग्नोस्टिक टूल्स को सटीक बनाने में मदद मिलेगी।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
गूगल का यह कदम साबित करता है कि दुनिया अब भारत को केवल एक 'बाजार' (Consumer Market) के रूप में नहीं, बल्कि 'नवाचार के केंद्र' (Innovation Hub) के रूप में देख रही है। 'मेड इन इंडिया' एआई सॉल्यूशंस को ग्लोबल प्लेटफॉर्म देना एक सराहनीय पहल है।
The Trending People का विश्लेषण है कि मेडजेम्मा 1.5 का लॉन्च होना भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए संजीवनी हो सकता है। एआई की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में सटीक निदान पहुंचाना अब सपना नहीं हकीकत बन सकता है। हालांकि, स्टार्टअप्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे इस तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी से करें और डेटा गोपनीयता (Data Privacy) के मानकों का पालन करें। गूगल का 'सहयोग' और भारतीय युवाओं का 'दिमाग' मिलकर दुनिया को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।
