राजधानी दिल्ली में गर्मियों के दौरान पानी की किल्लत को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। Rekha Gupta ने सचिवालय में उच्च स्तरीय बैठक कर जल आपूर्ति और प्रबंधन की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि पानी की सप्लाई में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिकायतों का तुरंत समाधान होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ अस्थायी राहत देना नहीं, बल्कि दिल्ली को स्थायी रूप से जल संकट से मुक्त करना है। बैठक में जल मंत्री Parvesh Sahib Singh, मुख्य सचिव Rajiv Verma और Delhi Jal Board के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार ने सोनिया विहार, भागीरथी, चंद्रावल, वजीराबाद, हैदरपुर, नांगलोई, ओखला, बवाना और द्वारका जैसे सभी प्रमुख वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स को अधिकतम क्षमता पर चलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही हरियाणा के साथ समन्वय बनाकर कच्चे पानी में अमोनिया स्तर की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि शोधन प्रक्रिया प्रभावित न हो।
आंकड़ों में दिल्ली की तैयारियां
पिछले साल के मुकाबले इस बार जल आपूर्ति ढांचे को मजबूत किया गया है। ट्यूबवेल की संख्या 5,834 से बढ़ाकर 6,200 कर दी गई है। वाटर टैंकर 1,166 से बढ़ाकर 1,210 कर दिए गए हैं, जिनमें 100 अतिरिक्त टैंकर स्टैंडबाय रखे गए हैं। फिक्स्ड सप्लाई पॉइंट्स 8,700 से बढ़कर 13,000 हो गए हैं, जबकि फिलिंग हाइड्रेंट्स की संख्या भी बढ़ाई गई है।
संगम विहार, मटियाला, छतरपुर, देवली, तुगलकाबाद, पालम, बिजवासन और बवाना जैसे इलाकों में विशेष टैंकर रूट और सप्लाई शेड्यूल तैयार किया गया है, ताकि जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जा सके।
24x7 हेल्पलाइन और इमरजेंसी सेंटर
जल संबंधी समस्याओं के लिए 1916 और 1800117118 हेल्पलाइन को मजबूत किया गया है। शिकायतें सीधे संबंधित जूनियर इंजीनियर तक पहुंचाई जाएंगी। इसके अलावा, पूरे शहर में 28 वॉटर इमरजेंसी सेंटर बनाए गए हैं, जो सीसीटीवी निगरानी और आधुनिक संचार प्रणाली से लैस हैं।
भविष्य की योजनाएं
सरकार द्वारका में 50 MGD क्षमता के नए जल उपचार संयंत्र और बवाना में 2 MGD क्षमता के रीसाइक्लिंग प्लांट को जल्द शुरू करने की तैयारी में है। इसके अलावा, 2025-26 में 172 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइनों को बदला गया है और लीकेज रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
दिल्ली में हर साल गर्मियों के दौरान जल संकट एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। इस बार सरकार की तैयारियां और सख्ती यह संकेत देती हैं कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और तकनीकी सुधार करना निश्चित रूप से सकारात्मक कदम है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब इन योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभाव दिखेगा। खासतौर पर उन इलाकों में, जहां पानी की कमी सबसे ज्यादा रहती है, वहां लगातार और पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि सरकार अपनी रणनीति को प्रभावी तरीके से लागू कर पाती है, तो यह दिल्लीवासियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
