नॉर्थ ब्लॉक में महका 'हलवा', शुरू हुई बजट की 'अग्निपरीक्षा'—1 फरवरी तक कैद रहेंगे 70 अधिकारी, न फोन न परिवार, जानें बजट 2026 की 'लॉक-इन' कहानी
नई दिल्ली, दिनांक: 27 जनवरी 2026 — देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा तय करने वाले केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) के पेश होने की उल्टी गिनती अब आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। रायसीना हिल्स स्थित नॉर्थ ब्लॉक, जो वित्त मंत्रालय का मुख्यालय है, आज एक पारंपरिक और मीठी रस्म का गवाह बना। मंगलवार को वित्त मंत्रालय के गलियारों में देसी घी और मेवों की खुशबू के साथ बहुचर्चित 'हलवा सेरेमनी' (Halwa Ceremony) का आयोजन किया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट निर्माण की प्रक्रिया में दिन-रात एक करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का मुंह मीठा कराकर बजट दस्तावेजों की छपाई और अंतिम रूप देने के काम का औपचारिक श्रीगणेश किया। भारतीय परंपरा के अनुसार किसी भी बड़े और शुभ कार्य की शुरुआत मीठे से की जाती है, लेकिन वित्त मंत्रालय में इस हलवे का स्वाद केवल मिठास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बेहद सख्त और गोपनीय अनुशासन की शुरुआत का भी प्रतीक है।
हलवा सेरेमनी बजट प्रक्रिया का वह अंतिम पड़ाव है जिसके बाद गोपनीयता की दीवारें अभेद्य हो जाती हैं। इस रस्म के पूरा होते ही बजट निर्माण से सीधे तौर पर जुड़े लगभग 60 से 70 वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी 'लॉक-इन' पीरियड (Lock-in Period) में चले गए हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब ये सभी लोग 1 फरवरी को संसद में बजट पेश होने तक नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही रहेंगे और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाएंगे। यह प्रक्रिया किसी विज्ञान-कथा फिल्म जैसी लगती है, लेकिन भारतीय लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज की गोपनीयता बनाए रखने के लिए यह दशकों पुरानी अनिवार्य परंपरा है।
लॉक-इन पीरियड के दौरान इन अधिकारियों की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। अगले कुछ दिनों तक ये कर्मचारी न तो अपने परिवार के सदस्यों से मिल पाएंगे और न ही फोन या इंटरनेट के जरिए किसी से संपर्क कर सकेंगे। यहां तक कि आपात स्थिति में भी संपर्क करने के लिए विशेष प्रोटोकॉल और खुफिया एजेंसियों की निगरानी से गुजरना पड़ता है। नॉर्थ ब्लॉक के भीतर जैमर लगाए जाते हैं और साइबर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। यह कड़ा पहरा इसलिए रखा जाता है ताकि टैक्स स्लैब, नई योजनाओं या आर्थिक सुधारों से जुड़ी कोई भी संवेदनशील जानकारी समय से पहले लीक न हो जाए, जिससे बाजार में अनुचित लाभ उठाया जा सके। एक समय था जब बजट के भारी-भरकम दस्तावेजों की छपाई के लिए अधिकारियों को हफ्तों तक प्रेस के अंदर लॉक-इन में रहना पड़ता था। हालांकि, डिजिटल इंडिया के दौर में अब बजट 'पेपरलेस' हो चुका है, जिससे भौतिक छपाई का काम काफी कम हुआ है और लॉक-इन पीरियड भी थोड़ा संक्षिप्त हो गया है। बावजूद इसके, नॉर्थ ब्लॉक के भीतर की सुरक्षा और गोपनीयता के मानकों में रत्ती भर भी ढील नहीं दी गई है।
बजट 2026 से देश को काफी उम्मीदें हैं। हलवा सेरेमनी के साथ ही बाजार और उद्योग जगत की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। आर्थिक जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि इस बार सरकार का मुख्य फोकस 'डि-रेगुलेशन' यानी नियमों के सरलीकरण और आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखने पर होगा। वैश्विक मंदी की आहट और आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) की चुनौतियों के बीच भारत का लक्ष्य अपनी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और एक्सपोर्ट को नई गति देना है। उम्मीद की जा रही है कि बजट में ऐसे प्रावधान किए जाएंगे जो 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को जमीनी स्तर पर बढ़ाएं और निजी निवेश को प्रोत्साहित करें। इसके अलावा, आम आदमी और मध्यम वर्ग को महंगाई से राहत देने और टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीदें भी हर बार की तरह प्रबल हैं।
हलवा सेरेमनी के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ वित्त राज्य मंत्री और मंत्रालय के वरिष्ठ सचिव भी मौजूद रहे। एक बड़ी कड़ाही में हलवा तैयार किया गया और वित्त मंत्री ने खुद अपने हाथों से इसे अधिकारियों को परोसा। यह दृश्य सरकार और नौकरशाही के बीच के सहयोग और विश्वास को दर्शाता है। अब सबकी निगाहें 1 फरवरी की सुबह 11 बजे पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री संसद में अपना बजट भाषण शुरू करेंगी और लाल बही-खाते (अब टैबलेट) से देश के भविष्य का रोडमैप पेश करेंगी। तब तक के लिए, नॉर्थ ब्लॉक का बेसमेंट देश के सबसे बड़े राज का संरक्षक बना रहेगा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
हलवा सेरेमनी केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता और गोपनीयता के संतुलन का उत्सव है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे सैकड़ों लोगों की तपस्या और त्याग छिपा होता है जो हफ्तों तक अपने परिवारों से दूर रहकर देश का भविष्य तय करते हैं।
The Trending People का विश्लेषण है कि डिजिटल बजट ने प्रक्रिया को सुगम जरूर बनाया है, लेकिन साइबर सुरक्षा की चुनौती को भी बढ़ाया है। 2026 का बजट मोदी सरकार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत को 'विश्वगुरु' बनाने की दिशा में आर्थिक ईंधन मुहैया कराएगा। डि-रेगुलेशन और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देने की खबरें सकारात्मक हैं, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह बजट आम आदमी की जेब में कुछ अतिरिक्त बचत डाल पाता है या नहीं। 1 फरवरी तक सस्पेंस बरकरार है।
