सोना-चांदी में जोरदार वापसी: कीमतों में उछाल से ETF निवेशकों की चांदी, बाजार में लौटा भरोसा
पिछले कुछ दिनों से वैश्विक और घरेलू बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बाद कीमती धातुओं में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है। सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेज रिकवरी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ी राहत मिली। बीते सत्रों में अस्थिरता के चलते जो मुनाफा फिसल गया था, उसकी भरपाई अब तेजी से होती नजर आ रही है। इस सुधार का सबसे स्पष्ट असर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF में दिखा, जहां गोल्ड और सिल्वर दोनों सेगमेंट में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।
वायदा बाजार में भी रुझान पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना करीब दो प्रतिशत की मजबूती के साथ 1,58,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया। जून कॉन्ट्रैक्ट्स में भी सकारात्मक माहौल बना रहा। हालांकि, सबसे मजबूत प्रदर्शन चांदी ने किया। मार्च एक्सपायरी वाली चांदी में करीब छह प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई और इसके भाव 2,64,885 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए। मई कॉन्ट्रैक्ट्स में भी लगभग चार प्रतिशत की तेजी देखने को मिली, जिसे बाजार में लौटते भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
कीमतों में इस तेजी का सीधा फायदा म्यूचुअल फंड और ETF निवेशकों को मिला। सिल्वर ETF सेगमेंट में सबसे ज्यादा हलचल रही। UTI और निप्पॉन इंडिया जैसे सिल्वर ETF में 10 से 11 प्रतिशत तक की तेज बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा HDFC, टाटा और जेरोधा जैसे प्रमुख फंड हाउस के सिल्वर ETF भी 8 से 10 प्रतिशत के बीच मजबूत हुए। गोल्ड ETF में भी सुधार देखा गया। यूनियन और एंजेल वन के गोल्ड ETF में तीन प्रतिशत से अधिक की तेजी आई, जबकि SBI और कोटक जैसे बड़े फंड्स में दो प्रतिशत से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया।
कमोडिटी बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, वॉल्यूम और ओपन इंटरेस्ट दोनों में सुधार देखने को मिला है, जो यह दर्शाता है कि निवेशक दोबारा कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं।
बयान और विश्लेषण
विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के पीछे अमेरिका से जुड़ी नीतिगत खबरें अहम वजह थीं। डेरिवेटिव बाजार संचालक CME Group ने हाल ही में कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए मार्जिन लिमिट बढ़ा दी थी, जिसके चलते बड़े ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन कम करनी पड़ी। इसके अलावा अमेरिका में Kevin Warsh को अगले फेडरल रिजर्व चेयरमैन के रूप में नामांकित किए जाने की खबर से भी बाजार पर दबाव आया। वॉर्श को मजबूत डॉलर और सख्त ब्याज दरों का समर्थक माना जाता है, जो आमतौर पर सोने और चांदी के लिए नकारात्मक संकेत होता है।
एक वरिष्ठ कमोडिटी एनालिस्ट ने कहा कि जैसे ही मार्जिन से जुड़ा दबाव कम हुआ और डॉलर में स्थिरता आई, निवेशकों ने दोबारा गोल्ड और सिल्वर में एंट्री ली। वहीं, बाजार नियामक SEBI की ओर से ETF से जुड़े ढांचे में पारदर्शिता और लिक्विडिटी पर जोर भी निवेशकों के भरोसे को समर्थन दे रहा है।
Final Thoughts
कीमती धातुओं में आई यह तेजी सिर्फ एक तकनीकी रिकवरी नहीं, बल्कि निवेशकों की बदली हुई धारणा को भी दर्शाती है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों, डॉलर की चाल और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में उभरते नजर आ रहे हैं। खासतौर पर ETF के जरिए निवेश करने वालों के लिए यह संकेत अहम है, क्योंकि यहां लिक्विडिटी और पारदर्शिता दोनों मिलती हैं। हालांकि, आगे का रुख काफी हद तक अमेरिकी फेड की नीति, डॉलर इंडेक्स और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों पर निर्भर करेगा। अल्पकाल में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर आकर्षक माने जा रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ संतुलित पोर्टफोलियो और चरणबद्ध निवेश की सलाह दे रहे हैं, ताकि जोखिम और रिटर्न के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके।
