लोकसभा में 'चीन' पर संग्राम—राहुल गांधी ने लहराया 'जनरल का सच', बोले "डोकलाम में 100 मीटर तक घुस आए थे टैंक", राजनाथ-शाह ने नियमों की ढाल से रोका वार
नई दिल्ली, दिनांक: 3 फरवरी 2026 — संसद का बजट सत्र अपने दूसरे दिन ही एक ऐसे सियासी बवंडर का गवाह बना, जिसकी गूंज सीमा से लेकर सत्ता के गलियारों तक सुनाई दे रही है। सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मोदी सरकार की चीन नीति (China Policy) पर अब तक का सबसे बड़ा और विस्फोटक हमला बोला। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की बहुचर्चित लेकिन अब तक 'अप्रकाशित' किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' (Four Stars of Destiny) के अंशों का हवाला देते हुए 2017 के डोकलाम विवाद पर एक सनसनीखेज दावा किया। राहुल ने सदन के पटल पर कहा कि डोकलाम गतिरोध के दौरान चीनी सेना (PLA) के चार टैंक भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे और वे हमारे जवानों से महज कुछ मीटर की दूरी पर थे।
इस दावे ने सदन में भारी हंगामा खड़ा कर दिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह को मोर्चा संभालना पड़ा। सरकार ने राहुल गांधी के दावों को खारिज करते हुए तकनीकी पेंच फंसाया कि सदन में किसी अप्रकाशित सामग्री का हवाला नहीं दिया जा सकता। लेकिन राहुल अपने रुख पर अड़े रहे और आरोप लगाया कि सरकार सच को छिपाने के लिए किताब को प्रकाशित नहीं होने दे रही है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक पत्रिका का हवाला देते हुए कहा कि जनरल नरवणे ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि डोकलाम संकट के चरम पर स्थिति बेहद नाजुक थी। राहुल ने दावा किया कि चीनी टैंक भारतीय सीमा के बहुत करीब, लगभग 100 मीटर तक आ गए थे और वे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कैलाश रिज तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह जानकारी किसी राजनीतिक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस समय सेना का नेतृत्व कर रहे जनरल की है, जो 100% भरोसेमंद है। राहुल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जब आप हम पर देशभक्ति का सवाल उठाते हैं, तो मेरे पास यह सबूत है कि सीमा पर असलियत क्या थी। उनका आरोप था कि सरकार ने देश को अंधेरे में रखा और चीनी घुसपैठ की गंभीरता को कम करके आंका।
जैसे ही राहुल ने किताब से उद्धरण पढ़ना शुरू किया, ट्रेजरी बेंच (सत्ता पक्ष) से विरोध के स्वर फूट पड़े। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) तुरंत अपनी सीट से खड़े हो गए और उन्होंने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। राजनाथ सिंह ने कड़े शब्दों में आपत्ति जताते हुए कहा कि यह किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित ही नहीं हुई है। संसदीय नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सदन में किसी ऐसी किताब या मैगजीन के अंश का हवाला नहीं दिया जा सकता जिसकी सत्यता प्रमाणित न हो या जो पब्लिक डोमेन में न हो। रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी को चुनौती दी कि वे बताएं कि क्या यह किताब छपी है? उन्होंने दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना संदर्भ के चीजों को पेश करना सेना और देश के मनोबल के लिए ठीक नहीं है।
विवाद तब और गहरा गया जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) भी इस बहस में कूद पड़े। शाह का तेवर बेहद आक्रामक था। उन्होंने राहुल गांधी से सीधा सवाल पूछा कि क्या यह पुस्तक प्रकाशित हुई है? आप किसी का लिखा हुआ मसौदा या लीक हुए अंश सदन में नहीं पढ़ सकते। शाह ने कहा कि राहुल ने खुद स्वीकार किया है कि किताब अप्रकाशित है, इसलिए उनका दावा निराधार और नियम विरुद्ध है। उन्होंने इसे सदन को गुमराह करने की कोशिश बताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने भी हस्तक्षेप करते हुए स्पीकर से नियम 353 का हवाला दिया और कहा कि अप्रकाशित सामग्री का जिक्र करना संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है।
सत्ता पक्ष के भारी विरोध और मंत्रियों के पलटवार के बावजूद राहुल गांधी ने अपनी बात जारी रखने की कोशिश की। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि उनका सोर्स एक प्रतिष्ठित मैगजीन का आर्टिकल है, जिसमें किताब के अंश छपे हैं और उसे कोई भी पढ़ सकता है। राहुल ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इस किताब को जानबूझकर दबा रही है और प्रकाशित नहीं होने दे रही है, क्योंकि इसमें लद्दाख गतिरोध (2020) और डोकलाम जैसे मुद्दों पर ऐसे 'असुविधाजनक खुलासे' हैं जो सरकार की 'मजबूत सीमा नीति' के दावों की पोल खोलते हैं। उन्होंने पूछा कि अगर सब कुछ ठीक है, तो एक पूर्व सेना प्रमुख की किताब को सेंसरशिप का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
सदन में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि स्पीकर ओम बिरला को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत दी कि वे राष्ट्रपति अभिभाषण पर फोकस करें और नियमों के दायरे में रहकर अपनी बात रखें। स्पीकर ने कहा कि असत्यापित तथ्यों को रिकॉर्ड में नहीं लिया जा सकता। लेकिन विपक्ष के हंगामे और सत्ता पक्ष की नारेबाजी के चलते सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी और अंततः उसे स्थगित करना पड़ा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
लोकसभा में हुआ यह टकराव राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पारदर्शिता की मांग करता है। पूर्व सेना प्रमुख की किताब में क्या लिखा है, यह जानने का हक देश की जनता को है। अगर चीनी टैंक वाकई 100 मीटर तक घुस आए थे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
The Trending People का विश्लेषण है कि सरकार का तकनीकी बचाव (किताब अप्रकाशित है) नियमों के लिहाज से सही हो सकता है, लेकिन यह नैतिक सवालों का जवाब नहीं है। राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दे को केवल 'राजनीतिक स्टंट' कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। एक लोकतंत्र में, राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार की जवाबदेही सर्वोपरि होती है। इस हंगामे ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि जनरल नरवणे की किताब, छपे या न छपे, अब देश की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ चुकी है।
