Indian Railways: रेल की पटरियों में जंग क्यों नहीं लगती? जानिए मजबूत तकनीक का राज
नेशनल डेस्क। Indian Railways आज सिर्फ देश की लाइफलाइन ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक रेल नेटवर्क में से एक बन चुका है। आधुनिक ट्रेनों, बेहतर सुविधाओं और उन्नत तकनीक के कारण भारतीय रेलवे यात्रियों के सफर को लगातार आसान और सुरक्षित बना रहा है। यही वजह है कि जब विदेशी यात्री भारत में ट्रेन से सफर करते हैं, तो वे इसकी व्यवस्थाओं और इंजीनियरिंग को देखकर हैरान रह जाते हैं।
भारतीय रेलवे की पहचान केवल ट्रेनों और स्टेशनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी मजबूत इंजीनियरिंग भी इसे खास बनाती है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि रेल की पटरियों में सालों तक जंग क्यों नहीं लगती, जबकि लोहे की दूसरी चीजों में जंग आम समस्या है।
भारत में रेलवे नेटवर्क पहाड़ों, रेगिस्तानों और दुर्गम इलाकों तक फैला हुआ है। कई कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी रेलवे ने बड़ी परियोजनाएं पूरी की हैं। इनमें हाई-स्पीड रेल, माल ढुलाई के विशेष कॉरिडोर और रणनीतिक रेल लाइनें शामिल हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण परियोजना है Udhampur–Srinagar–Baramulla Rail Link, जो हिमालयी क्षेत्र से होकर गुजरती है।
इस परियोजना का सबसे खास हिस्सा Chenab Rail Bridge है, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज माना जाता है। यह पुल नदी से करीब 359 मीटर की ऊंचाई पर बना है और इसे तेज हवाओं, भूकंप और अत्यधिक तापमान को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह भारतीय रेलवे की तकनीकी क्षमता का बड़ा उदाहरण है।
रेलवे ट्रैक की पटरियां आम लोहे से नहीं बनाई जातीं। इन्हें स्लीपर्स की मदद से मजबूती से बांधा जाता है, जिससे इन्हें आसानी से हटाया या नुकसान पहुंचाना संभव नहीं होता। इसके अलावा, ये पटरियां विशेष स्टील मिश्र धातु से तैयार की जाती हैं, जिन्हें काटना या कमजोर करना बेहद मुश्किल होता है।
रेल की पटरियां आमतौर पर हाई क्वालिटी हॉट-रोल्ड स्टील से बनाई जाती हैं, जिसमें कार्बन और मैंगनीज का संतुलित मिश्रण होता है। यह मिश्रण पटरियों को ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनाता है। सामान्य रूप से इनका वजन 52 किलो या 60 किलो प्रति मीटर होता है, जिससे वे भारी ट्रेनों और तेज रफ्तार को आसानी से झेल सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार, रेल पटरियों में जंग बहुत कम लगने का सबसे बड़ा कारण यही खास स्टील मिश्र धातु है। इसमें मौजूद तत्व ऑक्सीकरण की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे जंग बनने की गति कम हो जाती है। इसके अलावा, ट्रेनों के पहियों का लगातार दबाव और घर्षण पटरियों की सतह को पॉलिश करता रहता है, जिससे हल्की जंग अपने आप हट जाती है।
अगर पटरियां साधारण लोहे की बनी होतीं, तो नमी, बारिश और मौसम के बदलाव से उन पर जल्दी जंग लग जाती। इससे न केवल बार-बार मरम्मत करनी पड़ती, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता। यही कारण है कि भारतीय रेलवे लंबे समय तक चलने वाली मजबूत पटरियों का इस्तेमाल करता है।
आज भारतीय रेलवे की यही तकनीकी मजबूती उसे दुनिया के अग्रणी रेल नेटवर्क में शामिल करती है। चाहे पहाड़ हों, मैदान हों या समुद्री इलाके, हर जगह टिकाऊ ट्रैक और सुरक्षित संचालन भारतीय इंजीनियरिंग की पहचान बन चुके हैं।
हमरी राय में
हमरी राय में, भारतीय रेलवे की पटरियों की मजबूती और जंग-रोधी तकनीक देश की इंजीनियरिंग क्षमता का शानदार उदाहरण है। यह सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा नहीं बढ़ाती, बल्कि लंबे समय में रखरखाव का खर्च भी कम करती है।
अगर इसी तरह आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे भरोसेमंद और उन्नत रेल नेटवर्क में अपनी जगह और मजबूत करेगा।
